जंतर-मंतर पर टिप्पणी नहीं छापी गयी..और गौतम राजरिषी जी की आज की पोस्ट पर एक टिप्पणी.
टिप्पणी छापना न छापना हर एक का हक है. जो टिप्पणी श्रीमान शेष नारायण जी के ब्लाग जंतर-मंतर "मोदी से एस आई टी की पूछताछ के पीछे क्या है" पर नहीं छापी गयी, उसमें मैंने जो पूछा था उसका लब्बो-लुआब यह था " यह लेख ठीक लग रहा है लेकिन इसके साथ यह भी बताने की कृपा करें कि कश्मीर में हुये हिन्दुओं के नरसंहार के पीछे कौन दोषी है, चौरासी के दंगों में सिखों के कत्लेआम के लिये आप किसे दोषी मानते हैं और अगले लेख में इस भी कुछ लिखने की कृपा करें" राजनीतिक सामाजिक मुद्दों और आम आदमी की चिंताओं और सवालों को बहस की मुख्य धारा में लाने की एक कोशिश तो अवश्य है श्रीमान शेष नारायण सिंह जी की लेकिन इस टिप्पणी को न छापने से मुझे निराशा हुई है, क्योंकि इससे पूर्व काफी तीखी टिप्पणियों को भी श्री सिंह ने माडरेट नहीं किया. गौतम राजरिषी जी के ब्लाग पर एक श्रद्धान्जलि थी उनके एक मित्र के लिये. टिप्पणी बंद कर रखीं थीं और इसके पीछे एक सही कारण भी था. मैं टिप्पणी देना चाहता था लेकिन वहां न दे सका इसलिये यहां दे रहा हूं. हे सैनिक मर मर जायेगा तो क्य...