अपनी ऐयाशी की कहानी.
अपनी ऐयाशी की कहानी बयान कर रहा हूँ । जी हाँ , एक ऐयाशी मैंने भी की , पिछले साल अगस्त में । मेरे पिताजी एक अध्यापक हैं , इस वर्ष वह सेवानिवृत्त हो गए हैं । पिछले दो - तीन वर्षों से मैं एक कार लेने की सोच रहा था , कई दफा भीड़ - भाड़ से तंग आकर मैंने बाहर जाने के कई प्रोग्राम रद्द कर दिए । इनमें से दो - तीन मेरी ससुराल जाने के भी थे , हालाँकि मेरी ससुराल मेरे शहर से लगभग तीन घंटे की दूरी पर है , लेकिन कई बार जब मैंने ससुराल जाने के लिए मना कर दिया तो मेरी धर्मपत्नी काफी कुंठित हो गयीं । एक - दो बार झगड़े की भी नौबत आ गई, अत : पिताजी ने कार लेने के लिए कुछ पैसा अपने पास से दे दिया और बाकी का बैंक से फाइनेंस करा दिया । अंततोगत्वा घर पर कार आ गई , नई कार थी , शौकिया खूब चलाई गई । कुछ दिनों बड़ा उत्साह रहा , कार पर बैठ कर कुछ और दिखाई ही नहीं देता था । थोड़े दिनों बाद जब कार का नशा उतरा और आंखों ने इधर - उधर भी देखना शुरू किया तब जो दृश्य...