भारत की वर्तमान दशा पर एक लेख.
यह लेख कुछ पहले मेरे एक मित्र ने लिखा था, जो कि यूनिकोड में पहले कन्वर्ट नहीं कर पाया था अब जाकर इसे यूनिकोड में बदल पाया हूँ, आप लोगों के सम्मुख प्रस्तुत। विगत 15 अगस्त को भारत को स्वतन्त्र हुये 61 वर्ष पूरे हो गये, स्वतन्त्र भारत की एक पीढ़ी अपने शैशव, युवावस्था को पूर्ण कर अपनी वृद्धावस्था में प्रवेश कर गयी।। स्वातन्त्र्य के इन वर्षों में हमने क्या खोया, क्या पाया, का विश्लेषण करना आज अपरिहार्य हो गया है। आजादी के लिये लड़ने वाले दीवानों ने क्या इसी स्वतन्त्र भारत की कल्पना की थी? हमारा देश एक ऐसे देश में बदल चुका है जहाँ हजारों नियम-कानून हैं, लेकिन एक भी कानून पूरी ईमानदारी से लागू नहीं होता। आजादी के बाद से सैकड़ों घोटाले हो चुके हैं, लेकिन इनमें शामिल एक भी बड़े आदमी को सजा नहीं हुई, यह अलग बात है कि जाने-अनजाने में, मजबूरी वश इनके मोहरे बने छोटे कर्मचारी अवश्य सजा पा गये। जीप घोटाला, बैंक घोटाला, चीनी घोटाला, जमीन घोटाला, चारा घोटाला, शेयर घोटाला, तोप घोटाला, चारा घोटाला, दवा घोटाला, खाद्यान्न घोटाला, डेयरी घोटाला, न जाने कितने घोटाले हो चुके हैं, कर देने वाली गरीब जनता के पैसे को...