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Showing posts from February, 2010

क्या प्रभात शुंगलू जी ने मकबूल फिदा हुसैन द्वारा बनाये गये चित्र देखे भी हैं?

जी नहीं. उनके ब्लाग का एक लेख जो शब्दश: नीचे दिया जा रहा है, गौर फरमायें. प्रभात जी का मूल लेख इस साइट पर छपा है. . "हुसैन, तुम माफी मत मांगना मकबूल फ़िदा हुसैन को कतर की नागरिकता दिये जाने पर एक बार फिर से उन्हें खोने का ऐहसास हो रहा। लेकिन राजनीति की बिसात पर हुसैन बस मोहरा बन कर रह जाते हैं। आज सेक्युलरिज़म की दुहाई देने वाले चुप हैं। ये वही लोग हैं जिन्होने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को सरकारी दस्तावेजों के विशाल डम्पिंग ग्राउंड में दफन कर दिया है । ये हिम्मत कौन दिखाएगा कि उस रिपोर्ट को बाहर निकाल कर, उसे झाड़ पोंछ कर उसपर सिरे से अमल किया जाए। हुसैन से अलग जस्टिस सच्चर ने जो देश की अक़लियत के विकास का एक्स-रे निकाला उसमें देश की सेक्युलर छवि तार-तार दिखी। सेक्युलरवाद की दुहाई देने वाला ये समाज अक्सर कट्टरवादी हो-हल्ला करने वालों के सामने घुटने टेकता देखा गया। सरकारी तंत्र भी नपुंसक बन जाता है। यदि ऐसा न होता तो हुसैन को दुबई जाकर न बसना पड़ता। महाराष्ट्र के पंढरपुर की धरती पर वो दोबारा लौटते जहां उन्होंने जन्म लिया था। लेकिन महाराष्ट्र की धरती को तो मातोश्री विचारधारा वाले बिगड़...

हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान यहां देखिये.........

इस लिंक पर जाइये http://bharhaas.blogspot.com/2010/01/blog-post_7783.htmlऔर देखिये कि किस तरह मकबूल फिदा हुसैन ने अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के नाम पर हिन्दू देवी देवताओं का अपमान किया है. इस सबके खिलाफ मुस्लिम धर्मगुरू आगे क्यों नहीं आते और क्यों मुस्लिम संगठन इस सबको चुपचाप देखते रहते हैं. क्यों धर्मनिरपेक्षी इस पर आंख मूंद लेते हैं.मेरी इच्छा नहीं थी कि इसे प्रचारित करूं लेकिन इस तरह की गलीज हरकत का सबके सामने आना ही उचित है, क्योंकि रेत में सर छुपाने से तूफान खत्म नहीं हो जाता......... अब भी समय है जागने का............. साभार:- भड़ास और काव्यमंजूषा जहां से मैंने यह पढ़ा ........

रिलायन्स और बीएसएनएल द्वारा अपने उपभोक्ता को किया गया परेशान

पिछली पोस्ट में मैंने एअरटेल के कस्टमर केयर के बारे में लिखा था. अब आपको बताता हूं रिलायन्स और बीएनएनएल के बारे में. दिसम्बर के अंत में मैंने अपने रिलायन्स प्रीपेड में संदेश वाला एक कूपन डलवाया. उद्देश्य था कि बीएसएनएल जब काम न करे तो बात करने और संदेशे भेजने के लिये रिलायन्स का कनेक्शन काम आयेगा. काफी कुछ सुन रखा था रिलायन्स के बारे में. हमने भी उन्तीस तारीख से धड़ाधड़ संदेश भेजना प्रारम्भ किया जिसमें कुछ काफी महत्वपूर्ण थे. मोबाइल फोन की संदेश सेवा में डिलीवरी रिपोर्ट आफ कर दी थी, क्योंकि संदेश डिलीवर होने के बाद जब उसका पुष्टिकरण आता तो थोड़ी झुंझलाहट होती. अब हुआ यह कि पन्द्रह जनवरी तक हम इस मुगालते में कि सारे संदेश पहुंच गये होंगे. भला हो हमारे मित्र का, जिन्होंने हमें यह बताया कि मेरा संदेश उन तक नहीं पहुंचा. फिर एक अन्य सज्जन ने भी चेक किया तो पाया कि उनके संदेश भी डिलीवर नहीं हुए थे. यह दिक्कत बीएसएनएल पर भेजने वाले संदेशों को लेकर थी. अब इस डिलीवरी की पीड़ा से भन्नाकर जब हमने काल सेंटर बात करने की कोशिश की तो लगभग पन्द्रह मिनट बाद एक पुरुष स्वर सुनाई पड़ा. अपनी समस्या के बारे में ...

कस्टमर केयर पर बात करने के लग रहे हैं पैसे - पेश है एक सुपर माइक्रो पोस्ट.

विश्वास नहीं होता, मुझे भी नहीं हुआ था. आखिर कस्टमर केयर क्यों बनाया जाता है, इसलिये कि कस्टमर को कोई समस्या हो तो केयर पर बात कर समस्या का निदान करा सके या शिकायत दर्ज करा दे या फिर कोई सुझाव इत्यादि दे सके. अभी पिछले दिनों जब मैंने एक कठिनाई के सिलसिले में एअरटेल के कस्टमर केयर से इंटरनेट सेटिंग्स के बारे में बात करना चाहा तो एक कनकलता, गजगामिनी टाइप महिला की आवाज आई "ध्यान दें कि उपभोक्ता से इस नम्बर पर काल करने के लिये प्रति तीन मिनट पचास पैसे चार्ज किये जायेंगे". पहले मुझे लगा कि शायद मैंने कोई और नम्बर मिला दिया है या फिर शायद कोई वैल्यू एडेड योजना पर चला गया हूं, इसलिये फिर दोबारा और फिर तिबारा नम्बर डायल किया. लेकिन मैं गलत था, वास्तव में कस्टमर केयर पर पचास पैसे चार्ज किये जा रहे थे. कितना अच्छा किया कम्पनी ने. एक पंथ और तीन काज. पहला कि लोग काल कम करेंगे इसलिये उन्हें काल सेंटर पर कम लोग रखना पड़ेंगे. दूसरा काल करेंगे तो पैसे सीधे होंगे. तीसरा शिकायतें अपने आप कम हो जायेंगी. और मेरे एक मित्र के अनुसार भारत में तो वैसे भी कस्टमर का अर्थ होता है वह व्यक्ति जो कष्ट से म...

पुणे बम-ब्लास्ट के सिलसिले में एक तथ्यपरक रिपोर्ट.

हिन्दुस्तान के बीस फरवरी के अंक में श्री पंकज चतुर्वेदी का एक लेख छपा है जिसके कुछ हिस्से यहां दिये जा रहे हैं. पूरा लेख आप हिन्दुस्तान में पढ़ सकते हैं. यह एक बहुत ही रोचक तथा तथ्यों से परिपूर्ण लेख है, लेख को पढ़ने से आपको ऐसे तथ्य पढ़ने को मिलेंगे जो अभी तक सामने नहीं आ सके हैं. "मीडिया ने जल्दबाजी में हादसे के कारणों की तह में गये बगैर किसी वर्ग या देश विशेष को इसके लिये जिम्मेदार मान लिया जाये. यह भी नहीं पता चल सका है कि धमाके में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक कौन सा था. यह तय नहीं हो पाया था कि धमाके में आरडीएक़ का इस्तेमाल किया गया कि अमोनियम नाइट्रेट का, लेकिन यह स्थापित करने का प्रयास होता रहा कि धमाका करने वालों का प्रशिक्षण पाकिस्तान में हुआ था. यह भुला दिया गया कि एक कर्नल ने सेना के जब्ती वाले भंडार से आरडीएक्स चुराया था. मालेगांव, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ दरगाह में हुए धमाकों में भी इसी तरह की तकनीक थी." "दो साल पहले ही कानपुर में एक घर में बम फटने से दो युवकों की मौत के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि मृतक बजरंग दल से जुड़े थे. फिर जर्मन बेकरी में धमाके ...

बद अच्छा, बदनाम बुरा

पूर्वोत्तर में ईसा मसीह के एक विवादित चित्र को लेकर देश भर में बवाल प्रारम्भ हो गया. कल मजीठा में उपद्रव हुआ. उपद्रवियों ने जमकर तोड़-फोड़ की और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया. मजीठा, मोगा इत्यादि पंजाब के कई शहरों में काफी बवाल हो चुका है. सिख भी अपनी धार्मिक भावनाओं को लेकर बिल्कुल समझौता नहीं करते, जिसका प्रमाण बाबा राम रहीम द्वारा गुरु गोविन्द सिंह साहब जैसी वेश-भूषा धारण करने पर हुआ दंगा-फसाद है. रामगढियों को लेकर भी बवाल हो चुका है, और आजकल दर्शन सिंह को लेकर है.  इससे पहले डेनिश कार्टूनिस्ट द्वारा बनाये गये मोहम्मद साहब के विवादास्पद चित्र को लेकर पूरे देश में आगजनी और तोड़फोड़ की गयी. पिछले दिनों मुहर्रम के दौरान उत्तर प्रदेश में दंगे और तोड़-फोड़ की कुछ घटनायें हुई :- १-आगरा में उपद्रव हुआ. २-मथुरा में शिया-सुन्नी भिड़े. ३-मैनपुरी में ताजिया दफनाने को लेकर शमशान की मिट्टी हटाने को लेकर पथराव की नौबत. ४-अलीगढ़ में एक बस के सामने आने पर बवाल, ताजियादार बड़ी मुश्किल से माने. ५-बहजोई, मुरादाबाद में नये रास्ते से ताजिये ले जाने की जिद, फिर पथराव...

अस्सी वर्षीय वृद्ध ने रचाई चौथी शादी और अब इकतीसवें बच्चे का इच्छुक

नीचे एक खबर ज्यों की त्यों दी जा रही है,. कृपया इसे पढ़ें. आभार :- आईबीएन खबर. असम के हुसैन अली भले ही 80 साल के हो गए हों लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर भी वह पूरी तरह सेहतमंद हैं। पेशे से किसान अली के पहले ही 30 बच्चे हैं और अब वह 31वें बच्चे के पिता बनने जा रहे हैं। अली की चार पत्नियां हैं और उनकी तीसरी पत्नी मां बनने वाली हैं। वह अपने इस विशाल परिवार से बेहद खुश हैं। अली कहते हैं, "यह सब खुदा का तोहफा है और मैं हमेशा भरा-पूरा परिवार चाहता था। " गुवाहाटी से 370 किलोमीटर पूर्व में स्थित लखीमपुर जिले के मोहखाली के रहने वाले अली कहते हैं, "किसी के बारे में उसकी लंबाई या वजन देखकर ही धारणा मत बनाइए। मैं दिल से अब भी जवान हूं, हालांकि अब मैं किसी और से शादी करने नहीं जा रहा हूं लेकिन 31वें बच्चे का बाप बनने की उम्मीद मुझे खुश करती है। " यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें अपने सभी बच्चों के नाम याद हैं? अली थोड़ा गुस्सा होकर अपने बच्चों के नाम गिनाना शुरू करते हैं लेकिन 15 बच्चों के नाम गिनाने के बाद वह भूल जाते हैं। अली कहते हैं कि इस समय भले ही वह नाम भूल गए हों, लेकिन चेहरा द...

कुछ वाक्य जिनका अर्थ कुछ और ही होता है

यह वाक्य हमें अक्सर लिखे हुये मिल जाते हैं, इनमें छुपे हुये अर्थ निम्न हैं. १-कृपया वार्ता करें - फाइल को महीने दो महीने के लिये उठाकर रख दो. २-रिजर्व्ड फार आर्डर - मोल-तोल हो सकता है. ३-मिलने का समय ...... - बाकी समय नहीं मिल सकते. ४-रुकावट के लिये खेद है - जो करना है कर लो, ऐसा ही रहेगा. ५-सरकार आर्थिक स्थिति के मद्देनजर कड़े कदम उठायेगी - टैक्स और बढ़ेगा. ६-सरकार किसी दबाव के आगे नहीं झुकेगी - अमेरिका दबाव डाल रहा है. ७-साम्प्रदायिक सद्भाव बढा़ने के लिये कदम उठाये जायेंगे - मुस्लिमों के लिये कोई नयी योजना आने वाली है. ८-कानून अपना काम करेगा - नेताओं को डरने की जरूरत नहीं, उनके मामले धीमी रफ्तार से चलते रहेंगे. ९-सीबीआई पर कोई दबाव नहीं है - सारे अधिकारी अपने हिसाब से फिट किये जा चुके हैं. १०-कार्य प्रगति पर है - सड़क कम से कम छ: माह तक खराब रहेगी. ११-एक-तरफा ट्रैफिक - पुलिस और प्रशासन तथा नेता इसमें से गुजर सकते हैं. १२-दलालों का प्रवेश वर्जित - अंदर की जगह बाहर चलकर बात करें. १३-सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है - मन्त्री जी के घर के बाहर आठ कमांडो और लगा दिये है. १४-साहब बाथरूम में ह...

नक्सलियों ने फिर बीस जवानों को शहीद कर दिया.

 नक्सलियों ने फिर बीस जवानों को शहीद कर दिया. रोज की घटना बन गयी. हथियार कहां से आते हैं. सीमा पार से. सीमा पर तैनात कौन. हमारे जवान. अन्दर से सप्लाई होता है गोला-बारूद. चेकिंग और सुरक्षा किस के हाथ. हमारे ही जवानों के हाथ. भ्रष्टाचार का राक्षस पूरे देश को जकड़ चुका है. नीतियां कौन बनाता है. जन प्रतिनिधि. आम की चिन्ता क्यों करें? आम को समझा दिया कि चुसना तेरा जन्मसिद्ध कर्तव्य और चूसना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार. जनता को दो युवराज की जादू की झप्पी, दलित के झोंपड़े में बिताया एक घण्टा और हल्के परात में एक मुट्ठी मिट्टी उठाकर श्रमदान करने का बढ़िया चित्र. पढ़ने दिया नहीं. पढ़े नहीं तो समझ कैसे आये. समझ नहीं तो बाहर से अपने फायदे की समझदारी इंजेक्ट की. जो पढ़ गये वे जातिवाद फैलाने में पारंगत हो गये. रहने को घर नहीं, खाने को अन्न नहीं, पहनने को कपड़ा नहीं, फिर भी सारा जहां हमारा. उद्विग्न हूं. क्या लिखूं, शब्द भी नहीं मिल रहे. उन मारे गये जवानों के परिवारी जनों के बारे में सोच रहा हूं जिन्होंने अपना बाप-भाई-बेटा खोया होगा. जिस सुबह के इन्तजार में सब बैठे हैं, वह सुबह कभी नहीं आयेगी. कभी नहीं...

पुणे में बम विस्फोट में दस की मौत-चलो फिर मोमबत्ती जलायें

पिछले एक लेख में मैंने लिखा था "रोज चेतावनी दी जा रही है देश की जनता को. सब अपना अपना कर्तव्य बखूबी निभा रहे हैं. मन्त्री अपना और प्रधानमन्त्री अपना. अफसर भी इसी दिशा में कदमताल मिलाकर वक्त के साथ चल रहे हैं. उनकी तरफ से भी चेतावनी जारी कर दी जाती है. रुटीन बन गया है चेतावनी जारी करना. बल्कि एक स्थाई चेतावनी जारी कर दी जाये कि " आतंकवादी कभी भी और कहीं भी बम फोड़ सकते हैं, कहीं भी गोलियां बरसा सकते हैं, अपनी जानमाल की रक्षा स्वयं करें." एक बयान भी अनडेटेड जारी कर दें कि प्रधानमन्त्री और गृहमन्त्री तथा यूपीए की अध्यक्ष ने हमलों की कड़ी निन्दा की है, दोषी बख्शे नहीं जायेंगे, तथा मरने वालों को पांच लाख और घायलों को पचास हजार. आतंकियों के मुस्लिम होने की बात होती है तो सिकुलर मीडिया और पार्टी तथा घोर कट्टरपंथी मुस्लिम नेता बयानबाजी करने लगते हैं कि इस्लाम में दहशतगर्दी की इजाजत नहीं है, जुल्म करना गुनाह है, वगैरा-वगैरा. और फिर यदि गलती से कभी दो-चार आतंकी मारे जाते हैं तो ये सभी लोग उस पर उंगली उठाने लगते हैं, ऊपर से रही बसी कसर नेता खुद पूरी कर देते हैं. जब आतंकी गिरफ्तार हो ...

फहीम अंसारी के वकील और दिनेश यादव में फर्क

"आतंकी शहजाद को पकड़वाने वाले स्कूल मैनेजर की हत्या" - जिसमें दो ब्लाग के लिंक मैंने दिये थे और उनके हवाले से इस घटना की जानकारी दी तथा यह लिखा था कि किस प्रकार मीडिया और नेताओं के मुंह पर पट्टी बंध गयी है. एक सप्ताह भी नहीं बीता कि इसी प्रकार की एक घटना फिर हो गई,  बस पात्र बदल गये. आतंकी फहीम अंसारी और अंडरवर्ल्ड के कई मामले देखने वाले वकील की हत्या हो गयी,  फिर क्या था, मीडिया मुखर हो गयी. लगभग हर चैनल के स्क्रोलर में इस हत्या की जानकारी दी जा रही थी. किसी चैनल ने एक मिनट की बाईट दी तो किसी ने कम या ज्यादा. अब तो जान जाईये कि भारतीय मीडिया के लिये कौन अधिक महत्वपूर्ण है  आतंकी को पकड़वाने वाले दिनेश यादव  नहीं बल्कि उनकी पैरवी करने वाला वकील.

मुसलमानों को शोषण से बचाने और उन्नति-प्रगति-विकास के पथ पर ले जाने के लिये एक आसान सुझाव

सैकड़ों वर्षों से मुसलमानों का शोषण होता रहा है भारत में. जिसके कारण वे दबे-कुचले रह गये हैं और उन्हें संसाधनों पर भी पूरा अख्तियार नहीं मिल सका. हिन्दुओं  की अधिकता के कारण मुसलमानों को पूरा न्याय नहीं मिल सका और वे षड़यन्त्र के चलते तालीम भी हासिल नहीं कर सके. गरीबी-गुरबत ही उनकी किस्मत बनकर रह गयी. इस बात को समझने में साठ साल लग गये और फिर मनजी ने कहा कि संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है. अल्पसंख्यक मतलब मुसलमान और अब उनमें ईसाई भी जुड़ गये हैं. सभी धर्मनिरपेक्ष दल और भाजपा भी अल्पसंख्यक कल्याण को लेकर बड़े चिन्तित रहते हैं. मेरे मन में उनकी इस चिन्ता को हरने के लिये एक विचार आया है (जिसे कुविचार कतई न समझें). मुझे लगता है कि भाजपा-शिवसेना इसे समर्थन नहीं देंगी लेकिन कांग्रेस, सपा, बसपा, माकपा, भाकपा, राजद, लोकपा, नेशनल कांफ्रेंस, राकांपा, द्रमुक, अन्नाद्रमुक इत्यादि धर्मनिरपेक्ष दल इसे जरूर मानेंगे और अपनायेंगे भी, यदि ये सब सही अर्थों में अल्पसंख्यकों का कल्याण चाहते हैं. अब वह रास्ता क्या है, मैं बताता हूं. वह रास्ता है कि सभी विधानसभाओं, विधानपरिषदों तथा लोकसभा और राज्...

कश्मीरी आतंकियों का पुनर्वास होगा

अभी कुछ देर पहले खबरों में चर्चा चल रही थी जिसमें कश्मीर के मुख्यमन्त्री उमर अबदुल्ला के उस बयान का जिक्र था जिसमें दिग्भ्रमित कश्मीरी युवाओं के पुनर्वास और वापसी का प्रस्ताव उन्होंने दिया था. कितना अच्छा लगता है सुनने में. लाखों कश्मीरी पंडित अपने ही देश में कश्मीरी आतंकवादियों का शिकार होकर विस्थापित हो देश के विभिन्न भागों में ठोकर खा रहे हैं. उनके पुनर्वास के लिये न तो कश्मीरी सरकार के पास कोई योजना है और न ही इस मुद्दे पर कोई धर्मनिरपेक्ष नेता बात करना चाहता है. लेकिन दिग्भ्रमित कश्मीरी युवाओं के लिये उनके पास पर्याप्त समय है. जब यही सब करना है तो फिर क्या जरूरत है कश्मीर में सेना के जवानों की बलि चढ़ाने की. क्या आवश्यकता है सीमा पर सेना तैनात करने की और भी तमाम तरह की नौटंकी करने की. बंग्लादेशियों को भारत का नागरिक बना ही लिया गया है, जो आतंकवादी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. जब दुर्दान्त आतंकवादियों के बारे में ऐसी सोच है और जब उन्हें माफ करने की तैयारी...

सावधान, खबरदार, जागते रहो.

रोज चेतावनी दी जा रही है देश की जनता को. सब अपना अपना कर्तव्य बखूबी निभा रहे हैं. मन्त्री अपना और प्रधानमन्त्री अपना. अफसर भी इसी दिशा में कदमताल मिलाकर वक्त के साथ चल रहे हैं. उनकी तरफ से भी चेतावनी जारी कर दी जाती है. रुटीन बन गया है चेतावनी जारी करना. बल्कि एक स्थाई चेतावनी जारी कर दी जाये कि " आतंकवादी कभी भी और कहीं भी बम फोड़ सकते हैं, कहीं भी गोलियां बरसा सकते हैं, अपनी जानमाल की रक्षा स्वयं करें." एक बयान भी अनडेटेड जारी कर दें कि प्रधानमन्त्री और गृहमन्त्री तथा यूपीए की अध्यक्ष ने हमलों की कड़ी निन्दा की है, दोषी बख्शे नहीं जायेंगे, तथा मरने वालों को पांच लाख और घायलों को पचास हजार. आतंकियों के मुस्लिम होने की बात होती है तो सिकुलर मीडिया और पार्टी तथा घोर कट्टरपंथी मुस्लिम नेता बयानबाजी करने लगते हैं कि इस्लाम में दहशतगर्दी की इजाजत नहीं है, जुल्म करना गुनाह है, वगैरा-वगैरा. और फिर यदि गलती से कभी दो-चार आतंकी मारे जाते हैं तो ये सभी लोग उस पर उंगली उठाने लगते हैं, ऊपर से रही बसी कसर नेता खुद पूरी कर देते हैं. जब आतंकी गिरफ्तार हो जाते हैं तो मुस्लिमों की ओर से आरोप ल...

गीतों को डाउनलोड करने के लिये साफ्टवेयर सुझायें.

कुछ गीत जो कि डिवशेयर पर उपलब्ध हैं तथा कुछ हिन्द-युग्म आवाज( http://podcast.hindyugm.com/ ) पर उपलब्ध हैं,  को आफलाइन सुनने के उद्देश्य से डाउनलोड करना चाहता हूं. इसके लिये कौन सा साफ्टवेयर उपलब्ध है, बताने की कृपा करें. यह भी बताने की कृपा करें कि इंटरनेट एक्सप्लोरर प्रयोग करते समय इसकी टेम्पररी फाइल किस नाम-एक्सटेंशन से स्टोर होती है तथा गूगल क्रोम प्रयोग करते समय यह कहां स्टोर होती है. पहले ही धन्यवाद ज्ञापित करता हूं.

बाटला कांड के अभियुक्त शहजाद को पकड़वाने वाले स्कूल प्रबन्धक दिनेश यादव की हत्या…

आजमगढ़ में दिल्ली एटीएस की टीम गई थी, बाटला हाउस के फरार आतंकवादियों को पकड़ने. एक स्कूल प्रबंधक ने टीम को अपने स्कूल में ठहराया, आतंकवादी पकड़ा गया और नतीजा यह हुआ कि स्कूल प्रबंधक दिनेश यादव और उनके एक मित्र को दिन दहाड़े गोलियों से भून दिया गया. अब सब मौन हैं, धर्मनिरपेक्ष नेता और निडर पत्रकार. सब के मुंह पर पट्टी बंध गयी है धर्मनिरपेक्षता की. इसे पढ़ें और धीरे-धीरे इस्लामी सत्ता जो तालिबान की बंदूकों से होकर गुजरती है, के लिये अपने आपको तैयार करें जिसकी नींव हमारे  ......... हिन्दू धर्मनिरपेक्ष नेताओं ने रख दी है. अभी भी समय है, यदि अब न चेते तो आनी वाली पीढियां हमें धिक्कारेंगी. खबरें यहां पर हैं  :- http://hindubulletin.blogspot.com/2010/02/blog-post_4048.html तथा http://wohchupnahi.blogspot.com/2010/02/blog-post_06.html साभार उक्त ब्लाग लेखकों से.

किसानों की आर्थिक हालत सुधारने और मंहगाई कम करने के नाम पर जीएम बीजों को बाजार में उतारना उचित है?

कृषि मंत्रालय ने कहा है कि जेनेटिकेली मोडीफाईड बैंगन अर्थात बीटी बैंगन को स्वीकृति दी जा चुकी है.हालांकि अलग-अलग मंत्रालयों से भी अलग-अलग बयान आ रहे हैं. दुनिया में शायद भारत ही वह सबसे उत्सुक देश है जो अभी इसके सम्पूर्ण परीक्षण के बिना ही इसे बाजार में उतरने की अनुमति दे चुका है. आखिर इतनी व्यग्रता क्यों? यहां तक कि कई प्रदेशों में चोरी-छुपे इस बैंगन की खेती भी शुरू हो गई है. बीटी बैंगन के समर्थक निम्न तर्कों पर जोर डालते हुये कहते हैं कि १-भारत में आने वाले समय में ऐसी फसलों की आवश्यकता होगी क्योंकि तेजी से बढ़ती हुई आबादी के लिये सामान्य तरह की प्रजातियों में फसल की मात्रा उतनी अधिक नहीं होगी जितनी कि जेनेटिकेली मोडीफाईड प्रजातियों में होगी. २-इस तरह की प्रजातियों से अधिक उत्पादन होगा जिससे कि मंहगाई पर काबू पाया जा सकेगा और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुये तथा बढ़ती हुई जनसंख्या को खाद्यान्न की आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिये इनका अपनाना अपरिहार्य है. ३-इन प्रजातियों में स्वयं ही ऐसी क्षमता होगी जिससे कि किसी बीमारी के पनपने की स्थिति में पौधे के अन्दर खुद-ब-खुद एन्टी प्रोटीन उत्पन...

क्लिक करें और पांच सौ रुपये कमायें

 यह एक ईमेल मुझे प्राप्त हुई है जो कि पहली नजर में बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा भेजी गयी प्रतीत होती है . Customer Satisfaction Survey At Bank of India, we sincerely value your opinions. As part of our continuous improvement process, we're conducting a survey to benchmark the opinions of our customers. We will use the resulting information to better serve all of our customers. We kindly ask you to take part in our quick and easy reward survey. In return we will credit 500 Rupees to your account - Just for your time! Click here to start the survey With the information collected we can decide to direct a number of changes to improve and expand our services. जहाँ तक मुझे महसूस होता है यह एक फर्जी आई डी से भेजी गयी है और लोगों को पांच सौ रुपये देने का प्रलोभन दे उनके खातों इत्यादि की जानकारी लेने के लिए भेजी गयी है. अभी तक तो इनाम और लाटरी मिलने जैसी ही मेल आती थीं अब इस तरह की भी आने लगी हैं.