पढ़कर टिप्पणी करना भी कोई बात है. बड़ा ही मामूली सा काम है. पढ़िये, समझिये और फिर जैसा लगे वैसी टिप्पणी जड़ दीजिये. लेकिन असली मजा तो तब है जब बिना पढ़े ही या फिर शीर्षक मात्र पढ़कर ही टिप्पणी दी जाये. खैर बातें तो होती ही रहेंगी, लेकिन प्रारम्भ कर दिया जाये कुछ टिप्पणियों से जो छोटी तो अवश्य हैं लेकिन हैं बड़े काम की. यहां पर कुछ रेडीमेड टिप्पणियां तैयार हैं. बस इन्हें अपने दिमाग में रखिये, शीर्षक देखिये और झट से एक टिपा दीजिये. कुछ एक शब्दीय या द्विशब्दीय टिप्पणियां पेश-ए-खिदमत हैं., मसलन "nice", "very good", "excellent","बढ़िया", "अच्छा लगा","विचारोत्तेजक", "चिन्तनीय़", "वन्दनीय़", "निन्दनीय","खेद है", "दुख हुआ". इसके बाद नम्बर आता है एक लाइना टिप्पणियों का. इनमें प्रमुख हैं, "अति उत्तम अभिव्यक्ति", "अभूतपूर्व विचार हैं ", "बहुत गहराई युक्त लेख", "सार्थक और प्रभावशाली अभिव्यक्ति", "चिंतनीय विषय है", "विचार करने योग्य", "...