Posts

Showing posts from May, 2010

इस गीत के बारे में बताने और हो सके तो उपलब्ध कराने की कृपा करें.....

एक गीत है "कहां से चले थे कहां को है जाना, मुसाफिर न जाने कहां है ठिकाना" . इस गीत के बारे में बताने की और यदि हो सके तो उपलब्ध कराने की कृपा करें.......

गृहमन्त्री जी अब तो नक्सलियों का कुछ कीजिये या अभी भी संयम बाकी है ...

मिदनापुर में ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस पर हुये हमले में सत्तर लोग मारे गये हैं और दो-ढ़ाई सौ घायल हुये हैं जिसकी जिम्मेदारी नक्सलियों के एक गुट पीसीपीए ने ली है. चिदम्बरम साहब अब आप कुछ करेंगे या फिर अभी भी आपके पास संयम, निन्दा, चिन्ता का पर्याप्त स्टाक है जिसकी बराबरी के लिये दूसरे पलड़े में मारे गये लोगों के शरीर अभी तक पर्याप्त वजन पैदा नहीं कर सके हैं.

हिन्दी के ब्लाग क्या केवल एक-दूसरे की टांग खींचने और गरियाने के साधन बन चुके हैं?

पिछले कई दिनों से बल्कि महीनों से हिन्दी के ब्लाग लेखक आपस में गुत्थम-गुत्था हुये जा रहे हैं. कभी एक नम्बर की पदवी को लेकर तो कभी ब्लाग की रैंकिंग न सुधरने पर तो कभी गुटबाजी को लेकर. कौन किस गुट का है, कहां का मठाधीश है, किस धरती से सम्बन्धित है. अब ब्लागर्स मीट को लेकर दिक्कत पैदा हो गयी है. लोग आपस में एक दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं. फर्जी आई-डी बना-बनाकर एक दूसरे को गरियाने का वह सिलसिला चल निकला है कि कई बार तो खुद ही बड़ी आत्मग्लानि सी होने लगती है. इतने बड़े नाम, इतना अच्छा काम और फिर एकदम इस स्तर पर पहुंचना. इस सबसे क्या सिद्ध करना चाहते हैं हम लोग. हिन्दी ब्लाग्स पर ढ़ेरों साहित्यिक कृतियां मौजूद हैं. लोग इतना अच्छा लिखते हैं कि पढ़ने के बाद मालूम चलता है कि वास्तव में मैं कूप-मंडूक ही था, एक इतनी विशाल दुनिया है हिन्दी ब्लाग. लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद जब ब्लागर्स इन चीजों को लेकर आपस में उलझ जाते हैं तो वाकई में दुख होता है. इतनी अपरिमित ऊर्जा का ऐसा दुरुपयोग! मैं फिर से आप सभी से प्रार्थना करूंगा कि इस ऊर्जा को सही दिशा में लगने दें, न कि रैंकिंग, गुटबाजी और मठाधीशी इत्यादि को...

इस खबर को पढ़कर सिर शर्म से झुक गया..

यह खबर अभी आईबीएन पर पढ़ी और सिर शर्म से झुक गया. "मध्य प्रदेश के छतरपुर में खाकी वर्दी की काली करतूतों ने दो बहनों की जान ले ली। छतरपुर जिले में दो बहनों ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली। आरोप है कि पुलिस के दो कॉन्सटेबल ने बड़ी बहन का एमएमएस बनाया, और उसे दूसरे मोबाइल पर सर्कुलेट करने की धमकी दी। इतना ही नहीं बड़ी बहन पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला। इस संबंध में छोटी बहन ने जिले के एसपी से मुलाकात कर शिकायत भी दर्ज कराई थी। लेकिन इसके बाद भी दोनों बहनों पर पुलिसवाले दबाव बनाते रहे। खाकी के खौफ की वजह से दोनों बहनों ने एक साथ जहर खा लिया और कुछ घंटों के अंतराल पर दोनों बहनों की मौत हो गई।" यदि पुलिस का यही चरित्र है तो नहीं चाहिये ऐसी पुलिस. यदि सत्ता और शासन व्यवस्था यदि ऐसे पुलिसिये और उसे संरक्षण देने वालों को सूली पर नहीं चढ़ा सकते तो नहीं चाहिये ऐसी सत्ता और शासन व्यवस्था.

बिना पढ़े टिप्पणी दीजिये

पढ़कर टिप्पणी करना भी कोई बात है. बड़ा ही मामूली सा काम है. पढ़िये, समझिये और फिर जैसा लगे वैसी टिप्पणी जड़ दीजिये. लेकिन असली मजा तो तब है जब बिना पढ़े ही या फिर शीर्षक मात्र पढ़कर ही टिप्पणी दी जाये. खैर बातें तो होती ही रहेंगी, लेकिन प्रारम्भ कर दिया जाये कुछ टिप्पणियों से जो छोटी तो अवश्य हैं लेकिन हैं बड़े काम की. यहां पर कुछ रेडीमेड टिप्पणियां तैयार हैं. बस इन्हें अपने दिमाग में रखिये, शीर्षक देखिये और झट से एक टिपा दीजिये. कुछ एक शब्दीय या द्विशब्दीय टिप्पणियां पेश-ए-खिदमत हैं., मसलन "nice", "very good", "excellent","बढ़िया", "अच्छा लगा","विचारोत्तेजक", "चिन्तनीय़", "वन्दनीय़", "निन्दनीय","खेद है", "दुख हुआ". इसके बाद नम्बर आता है एक लाइना टिप्पणियों का. इनमें प्रमुख हैं, "अति उत्तम अभिव्यक्ति", "अभूतपूर्व विचार हैं ", "बहुत गहराई युक्त लेख", "सार्थक और प्रभावशाली अभिव्यक्ति", "चिंतनीय विषय है", "विचार करने योग्य", "...

आठ नम्बर का कीड़ा

Image
इसे देखिये और बताइये कि यह कौन सा कीट है. मेरे बच्चों ने इसे आठ नम्बर का कीड़ा नाम दिया है.

क्या देश के मुसलमान सिखों से सबक नहीं ले सकते?

दो दिन पहले मैंने एक पोस्ट में लिखा था कि क्या सारे मुसलमान आतंकवादी हैं. इसी परिप्रेक्ष्य में मैं एक सवाल उठाता हूं "क्या देश के मुसलमान सिखों से सबक नहीं ले सकते?". आप लोग पंजाब में पनपे आतंकवाद से परिचित होंगे. अस्सी  के दशक में पंजाब में आतंकवादियों ने निर्दोषों की हत्याओं, बम विस्फोटों से पूरे भारत को दहलाकर रख दिया था. कुछ को छोड़ दिया जाये तो सिखों का बहुमत इन आतंकवादियों के विरोध में था. सिखों के बहुमत ने कभी भी इन आतंकवादियों को अपने धर्म  का होने के बावजूद न तो स्वीकार किया और न ही समर्थन दिया. अपनी जान गंवाकर इनके सामने डटे रहे. और शायद इसी कारण राजनीतिबाज भी सिख-धर्म और आतंकवादियों को जोड़कर दिखाने में कामयाब नहीं हो पाये. सिखों के धार्मिक नेता भी इस आतंकवाद के विरोध में मजबूती से आ खड़े हुये. नतीजा यह कि पंजाब में उत्पन्न हुआ आतंकवाद खत्म हो गया. मुस्लिमों के साथ स्थिति ऐसी नहीं है. मैं अधिक न लिखकर केवल यह पूछना चाहता हूं कि क्या देश के मुसलमान सिखों से सबक नहीं ले सकते और यदि नहीं तो क्यों?

क्या सारे मुसलमान आतंकवादी हैं?

पेश-ए-खिदमत है एक माइक्रो पोस्ट - शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली दिल्ली की कांग्रेस सरकार चार वर्षों से अफजल गुरू की फांसी की सजा की फाइल, जिसमें दिल्ली सरकार को अपनी राय देना थी, दबाये रखी रही.  जब अजमल कसाब की फांसी की सजा को लेकर हो-हल्ला हुआ तो इस मामले को खंगाला गया. शीला दीक्षित पहले मना करती रहीं कि गृह मंत्रालय से उन्हें ऐसा कोई पत्र नहीं प्राप्त हुआ लेकिन अब रातोंरात पत्र भी मिल गया उसका जबाव भी चला गया, फिर उस पर आपत्ति लगी और तुरन्त ही उस आपत्ति का जबाव भी दे दिया गया. शीला जी ने यह भी लिखा था कि अफजल को फांसी की स्थिति में कानून-व्यवस्था का मसला भी देख लिया जाये. दो दिन के अन्दर इस तरह की हां-ना, और इस तेजी से पत्र पाना, उत्तर भेजना, ये परिस्थितियां एक संदेह उत्पन्न  करती हैं. जाहिर है कि इस प्रकरण को किसी और जगह से निर्देशित किया जा रहा है. एक प्रश्न जो सरकार संसद पर हमले के अभियुक्त को फांसी की स्थिति में कानून व्यवस्था नहीं संभाल सकती वह दिल्ली के करोड़ों नागरिकों की सुरक्षा कैसे कर सकती है. दूसरा प्रश्न यह कि क्या राजनीतिबाजों को यह लगता है कि यहां के सारे मुसलमान...

आज फिर शहीद बना दिये गये पचास जनसामान्य और पुलिस वाले

एक बार फिर दंतेबाड़ा में पचास सामान्य लोगों और पुलिसकर्मियों को शहीद बना दिया गया. हम लोग उन शहीद पुलिस कर्मियों के परिवारीजनों के गम को बांट तो नहीं सकते, लेकिन उन परिवारों के प्रति आभार तो व्यक्त कर ही सकते हैं, जिनके प्रियजनों ने हमारे ही अन्य भाइयों की प्राणरक्षा में शहादत प्राप्त की.... निकम्मे राजनेता, भ्रष्ट अफसर और इन सब से उत्पन्न गरीबी, बेरोजगारी, भूख, अन्याय ने कहीं न कहीं गरीबों को इन दुर्दांत हत्यारों का मोहरा बनने को विवश कर दिया है. देश के नेता और नीतियों तथा जनता के संवेदनहीन मालिकों (अफसरों) और खून चूसने वाले उद्योगपतियों ने देश को चौपट करके रख दिया है.... अभी भी वक्त है सुधरने का. न्यूटन का नियम अभी भी सत्य है जिसके अनुपालन में गंगा अभी भी ऊपर से नीचे की तरफ ही बहती है. वही लड़का जो भ्रष्टाचार के विरोध में हर समय तैयार खड़ा रहता है, अफसर या नेता बनते ही उसकी आंखें मुंद जाती हैं. शिक्षित इसलिये नहीं किया कि लोग शिक्षित हो जायेंगे तो भला-बुरा सोचने लगेंगे. वोट किसे प्यारे नहीं.... सब जागो अब वरना पछताने का समय भी नहीं मिलेगा.

ढ़ेर सारी बातें..--- संस्कृत की किताब, तिवारी जी का डीएनए,टेस्ट, मोइली साहब का बयान, एम पी बेचारे, नया न्यूजपेपर और ज्ञानदत्त जी

Image
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक स्कूल में पढ़ाई जा रही संस्कृत की किसी पुस्तक में जातिसूचक शब्द मिल गया. बवाल हो गया. जैसा कि होता है स्कूल, पुस्तक विक्रेता पर छापे मारे गये. लेखक, प्रकाशक, स्कूल प्रबंधन और शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ. हम जाति प्रमाण पत्र बनवाने जाते हैं, कालम भरते हैं. अभी जाति गणना होगी, जाति बतायेंगे. आरक्षण और दूसरी सुविधायें उठाने हेतु विभिन्न प्रपत्रों में जाति का कालम भरेंगे. लेकिन किसी किताब में किसी संदर्भ में हमें यह मंजूर नहीं.  एक और किस्सा या़द आ रहा है "आजा नच ले" फिल्म का, जिस के गाने से कोई शब्द हटाया गया कि वह भी जातिसूचक है. पता नहीं हम जाति को तोड़ने के लिये आगे बढ़ रहे हैं या इस खाई को और मजबूत करने के लिये कुदाल लेकर आगे बढ़ रहे हैं. इससे पहले भी मुरादाबाद के किसी कस्बे में हजरत साहब के बारे में कोई शब्द अंग्रेजी की किसी किताब में लिखा था जो मुस्लिमों को नागवार गुजरा. एक बार फिर वही हुआ जो ऊपर लिखा हुआ है. अन्तर इतना था कि मुस्लिमों ने जाम लगाया, हंगामा किया और पुतला फूंका. तिवारी जी अपना डीएनए टेस्ट कराने को तैयार नहीं हैं. दाढ़ी में तिनके वा...

"हिन्दू" आतंकवाद एक गंभीर समस्या

चिदम्बरम जी,  मत कहिये कि "हिन्दू" आतंकवाद एक गंभीर समस्या है... देश में सौ करोड़ से कुछ ही कम हिन्दू होंगे और अभी तक तथाकथित "हिन्दू" आतंकवादी सौ भी नहीं पकड़े गये हैं. आपने एक कहानी तो पढ़ी ही होगी. वही भेड़िया आया, भेड़िया आया और फिर एक दिन भेड़िया आ गया सच्च में. कश्मीर में हिन्दू साफ हो गये, कोई परेशानी नहीं. मुस्लिम बाहुल्य अन्य इलाकों से हिन्दू धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं. आप ही की सरकार के रहते सीआरपीएफ ने एक रिपोर्ट पेश की है जिसमें असोम में आपरेट करते चौदह इस्लामी आतंकवादी संगठनों के बारे में बताया गया है कि वे किस प्रकार हर व्यक्ति से वसूली कर रहे हैं. हिन्दू को पहले ही दोयम दर्जे का नागरिक बनाया जा चुका है और पहला हक अल्पसंख्यकों का मनजी भी सुनिश्चित कर चुके हैं. संख्या में देखा जाये तो हिन्दू नवयुवक ही बेरोजगारी में, भुखमरी में पहला स्थान पायेंगे. और आतंकवादी घटनाओं में जान गंवाने में भी हिन्दू ही पहले स्थान को घेरे बैठे होंगे.  जान-माल के नुकसान की भी गणना करा लीजियेगा, वहां भी पहला स्थान हिन्दू को ही मिलेगा. क्षमा कीजियेगा आप जैसे नेताओं और देश की रक्षा कर...

क्या यह किसी महाघोटाले से कम है--इसे अवश्य पढ़ें

यह खबर देने के लिये सत्यजीत प्रकाश जी का आभार.... बस एक मौका मिल जाये फिर सात क्या सात हजार पीढ़ियां तर जायेंगी.. स्टेटसमैन का भी आभार..  इसे पढ़िये और अपनी फूटी किस्मत को कोसिये कि क्यों हमें और आपको यह बढ़िया मौका नहीं मिल पा रहा.  Money in black & white Government, Opposition And Corruption ;Rajinder Puri THE most damaging weakness of India’s political class is its lack of credibility. Regardless of the truth, people at large are convinced that the entire political class is corrupt. The government covers up corruption cases. The Opposition dares not pursue them even when those in the government are involved. The Scorpene deal, the Koda mining scam, the Raja Spectrum scam, the IPL scam ~ the list of unresolved cases that do, or will, gather dust seems endless. The highest leadership in both the government and the Opposition lacks public credibility. This is because of the curious inertia displayed by these leaders even after circumstances cloud their reputations. ...

"अशोक के फूल" - लेखक श्रीमान हजारी प्रसाद द्विवेदी जी..

यह वह किताब है जो पिछले दिनों मुझे एक मित्र के यहां दिखाई दी. अभी इसे पढ़ ही रहा हूं. श्रीमान हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के ललित निबन्धों का संग्रह है और तकरीबन समाज के हर एक विषय पर, हर एक पहलू पर लिखा गया है. कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी यह पुस्तक समाहित की गयी है. मौका मिले तो आप भी पढ़कर देखियेगा.. धन्यवाद..

देश में समुदाय आधारित इकाइयां बनाई जायें.

जाति आधारित जनगणना होने जा रही है. पक्ष-विपक्ष में वाद-विवाद जारी है. देश की दशा बहुत चिन्तनीय होती जा रही है. विघटन से बचाने के लिये अब एक ही उपाय है कि सामुदायिक आधार पर इकाइयां बनाई जायें जिसमें शासन-प्रशासन-नौकरी-व्यवसाय विशेष क्षेत्र में समुदाय विशेष के लिये ही हो. अपना क्षेत्र, अपना शासन, अपना व्यवसाय, अपनी नौकरी, अपना जीना, अपना मरना. आरक्षण-जाति-धर्म के आधार पर वोट बैंक की राजनीति एक ही झटके में खत्म हो जायेगी.

तालिबानी क्या इसका उत्तर देंगे....

पुराना लिखा हुआ है. कुछ प्रचारक बड़े तीखे हमले कर रहे हैं,  मैंने भी इनका लिखा हुआ पढ़ा है. कुछ लोग बड़े प्रश्न लेकर मैदान में उतरे हुये हैं कि ऐसा होता तो क्या होता, यूं होता तो क्या होता. मुझे इनके बारे में अधिक कुछ लिखने की आवश्यकता महसूस नहीं होती.  खैर कुछ सवाल मेरे दिमाग में भी उमड़ने-घुमड़ने लगे थे जो एक लेख के रूप में प्रकाशित कर चुका हूं और वही सवाल फिर आप के आगे परोस रहा हूं. दुबारा प्रकाशित कर रहा हूं इसलिये क्षमा करें लेकिन आप लोगों के पास इसका उत्तर है क्या ? ये प्रश्न मुख्यत: उन तालिबानियों के लिए है जो फिरदौस जी, महफूज जी जैसे लोगों के ऊपर उनके सम्यक विचारों को लेकर निरन्तर हमले करते रहते हैं..  कुछ लोगों ने मेरे कुछ आलेख पढ़कर मुझे धर्मांध हिन्दू के रूप में परिभाषित कर दिया और कुछ ने जातिवाद का समर्थक बताया लेकिन ऐसा नहीं है, बिल्कुल भी नहीं। मैं बिल्कुल कट्टर नहीं हूँ और न ही जातिवादी प्रक्रिया का समर्थक। मेरा अपना मानना यह है कि किसी भी बच्चे के पास यह अधिकार नहीं होता कि वह यह फैसला कर सके कि उसे किस व्यक्ति के यहाँ पैदा होना है। जन्म लेन...

भारत में लड़कियों की स्थिति - तीन चित्र

Image
भारत में लड़कियों की स्थिति कैसी है, इन तीन चित्रों से तस्वीर क्या कुछ साफ होती है. देखिये.