Posts

Showing posts from November, 2008

जिसे सम्मान देना चाहिए, उसका मखौल उडाया जा रहा है

ज़माने का रिवाज बड़ा ही उल्टा है, बल्कि इसे यूँ कहा जाए कि हम भारतीयों का व्यवहार बड़ा ही विचित्र है तो कहना ग़लत न होगा। जिन का हमें सम्मान करना चाहिए, उनका हम मजाक उड़ा रहे हैं, पूरा मीडिया, कुछ निकम्मे ब्लॉगर जिनके हम प्लास्टिक पीटर भी कहते हैं (क्योंकि वे कीबोर्ड खटखटाते रहते हैं) ऐसे व्यक्ति के पीछे हाथ धोकर पड़ गए हैं जिसने हजारों लोगों की जान बचाई लेकिन उसे सम्मानित करना तो दूर ऊपर से उसकी मजाक बना रहे हैं, भिगो भिगो कर मार रहे हैं। आपको विश्वास नहीं होता , आइये हम आपको पूरा किस्सा बताते हैं। सबसे पहले तो इनका नाम जान लीजिये- ये हैं पाटिल साहब। नहीं, नहीं, वे पाटिल साहब नहीं, जो एक घंटे में तीन जोड़ी कपड़े बदलते थे। ये हैं दूसरे पाटिल साहब महाराष्ट्र वाले अर्थात आर०आर० पाटिल । भई क्या खूब ज़माना आ गया है, लोग कितने अहसान-फरामोश हो गए हैं। पाटिल साहब ने पूरी 4817 जानें बचा लीं, आतंकवादियों का इरादा था पूरे पाँच हजार लोगों की जान लेने का। लेकिन मात्र 183 जानें ही ले पाये कमबख्त। वो तो हमारे पाटिल साहब इतने कुशल निकले कि सिर्फ़ तीन घंटों के अन्दर पता चल गया कि आतंकवादी मुंबई में घुस आए ह...

शहीदों तुम्हें आतंकियों की गोली ने नहीं मारा

शहीदों तुम्हें आतंकियों की गोली ने नहीं मारा, तुम्हें मारा है हमारे नेताओं ने, जिनके ऊपर जिम्मेदारी थी, तुम्हारे द्वारा पकडे गये आतंकियों को सजा दिलाने की, उन्हें फांसी पर लटकाने की, लेकिन उन्होंने कानून को ही मारा, शहीदों तुम्हें आतंकियों की गोली ने नहीं मारा, तुम्हें मारा है तुम्हारे देश के उन अधिकारियों ने, जिनके ऊपर जिम्मेदारी थी, तुम्हें अच्छे हथियार और गोला - बारूद मुहैया कराने की, अच्छे उपकरण दिलाने की, लेकिन उन्हें दलाली की दलदल ने मारा, शहीदों तुम्हें आतंकियों की गोली ने नहीं मारा, तुम्हें मारा है खुफिया के उन अफसरान ने, जिनके ऊपर जिम्मेदारी थी, देश के दुश्मनों की गतिविधियों की सूचना पहुंचाने की, उन्हें चिन्हित कराने की, लेकिन उन्हें आराम-तलबी ने मारा, शहीदों तुम्हें आतंकियों की गोली ने नहीं मारा, तुम्हें मारा है पुलिस के उन निगहबानों ने, जिनके ऊपर जिम्मेदारी थी, मुजरिमों को पकडकर सजा दिलाने की, उनको जेल पहुंचवाने की, लेकिन उन्होने घूस लेकर कानून को मारा, शहीदों तुम्हें आतंकियों की गोली ने नहीं मारा, तुम्हें मारा है उन गद्दीधारियों ने, जिनके ऊपर जिम्मेदारी थी, आतंकियों के मददग...

शहीदों तुम्हें आतंकियों की गोली ने नहीं मारा

कुछ कुतर्क और कुछ प्रश्न

शकील साहब और अन्य नेता कहते थे कि पोटा के रहते हुए संसद पर आक्रमण हुआ तो पोटा ने क्या कर लिया। अब बाकी कानूनों के रहते आक्रमण हुआ है तो क्या अब सारे क़ानून ख़तम कर दिए जायेंगे। पुलिस और सेना के रहते हमला हुआ है तो क्या पुलिस और सेना ख़त्म कर दी जायेगी और तो और सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने वाले नेताओं के रहते हमला हुआ है तो अब क्या नेता समुद्र में छलाँग लगा देंगे। देवबंद के उलेमाओं ने यह कहा है कि आतंकवादियों के साथ कठोर सुलूक करना चाहिए, साथ में यह भी जोड़ा कि यह कहीं मालेगाँव बम धमाकों से ध्यान हटाने की साजिश तो नहीं, लिहाजा मैं यह कहना चाहता हूँ कि कहीं मालेगाँव के बम धमाके दिल्ली-राजस्थान बम-धमाकों से ध्यान बंटाने के उद्देश्य से जैश इत्यादि के आतंकवादियों ने तो नहीं किए। कुछ चैनल इन आतंकवादियों को लड़का और भटका हुआ बताते नहीं थक रहे थे, मुझे उनकी बुद्धि पर तरस आता है. जो चैनल भगवा भगवा चिल्ला रहे थे अब क्या हरा-हरा चिल्लायेंगे? एक चैनल पर समाचार-वाचक कह रहा था कि मुंबई ने मुहंतोड़ जवाब दिया है, मुंबई चलने लगी, काश वह शहीद पुलिसवालों और मारे गए लोगों के घर जाकर देखता कि उनका घर कैसा चल ...

मुंबई में मोर्चा संभाल रहे कमांडिंग अधिकारी से एक प्रार्थना

मुंबई में मोर्चा संभल रहे कमांडिंग अधिकारी से एक प्रार्थना है कि जो आतंकवादी पकड़े गए हैं, उनसे सूचना उगलवाने के बाद उनके हाथों-पैरों को चारों दिशायों में जीप से बाँध दें और इन्हें चीर दें तथा इसका सीधा प्रसारण टेलीविजन पर कराएँ, आख़िर आतंकवादियों को भी मौत की आहट सुनाई देना चाहिए। पकडेंगे तो पहले तो सजा करना ही बहुत मुश्किल होगा, तिरानवे के गुनाहगारों तेरह साल लगे सजा देने में, फिर इसके बाद अपील का झंझट। धूर्त राजनीतिक वैसे ही यह नहीं चाहते कि मुकदमों का निपटारा अधिकतम तीन - चार सालों में हो जाए क्योंकि ऐसा होने में आधे से ज्यादा जेलों में सड़ते दिखाई देंगे। दूसरा देख ही चुके हैं कि वोट बैंक के लिए कांग्रेस अफजल को फांसी देना नहीं चाहती। इसलिए सबसे अच्छा रास्ता यही है जो मैंने लिखा है, जिससे कि मौत बांटने वालों को मौत की दहशत का अहसास हो सके। नेताओं और नाकारा अधिकारियों की सुरक्षा करना बन्द करें।

भइया जी और मन जी का बयान पढ़ लें

राहुल ने कहा कि आतंकवादी समझते हैं कि वे हमें बांट देंगे। लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है। Prime Minister Manmohan Singh delivered his strongest message yet about his government’s intention to crack down on the enemies of India। Addressing the nation on the morbid occasion he sought to give an impression of the government and security agencies being in control of the situation. While condemning the assault in most severe terms, he assured Indian citizens that all possible measures would be taken against the perpetrators of this outrage. Hinting for the first time that India might be contemplating hot pursuit, the Prime Minister said that his government “will go after perpetrators” of the attacks all the way. On the issue of more stringent laws, a demand that has been raised time and again especially by the opposition, the PM said current laws will be tightened as per the need. He also addressed another long standing demand of setting up a Federal Agency to tackle terror saying that such an...

द ग्रेट इंडियन ब्लास्ट तमाशा

पहले पुंसत्वहीन लोगों की तरफ़ से :- आओ वीर आतंकियो आओ तुम्हारा स्वागत है इस धर्मनिरपेक्ष मुल्क में हम तैयार हैं तुम्हारे स्वागत को हमारे बच्चे भी, आओ तुम बम लगाओ हमारी जडें बहुत मजबूत हैं हिलेंगी नहीं तब भी, जब हमारा अस्तित्व खत्म हो जायेगा, तब भी कौमी तराने गूंजते रहेंगे चाहे उन्हें सुनने वाला कोई न हो तुम हमारी पीढियों को तबाह कर सकते हो क्योंकि तुम अल्प हो हम अपने बच्चों को आगे करते रहेंगे तुम उनके सीने चाक करते रहना क्योंकि तुम अल्प हो और जो चीज बढ जाती है उसे खत्म होना ही होता है इसलिये तुम बम लगाओ हम तुम्हें सजा नहीं देंगे, खीर देंगे खीर खाओ और इन्तजार करो कि कब एक आई सी ८१४ उडे और कब तुम्हें शाही मेहमान की तरह छोडा जाये तुम हमारे उन बच्चों के सीने गोलियों से छलनी कर दो जिन्हें हमने प्यार से पाला था बडे अरमानों से पोसा था तुम बम लगा सकते हो हम कोई कार्रवाई नहीं करेंगे क्योंकि हम वास्तविक धर्म निरपेक्ष हैं हम इतिहास से भी सबक नहीं लेंगे क्योंकि हम बहुल हैं, हम निरपेक्ष हैं आओ तुम स्वतन्त्र हो कहीं भी बम लगाओ ट्रेन में, पार्क में, पूजा स्थलों में, अदालतों में लेकिन हम फिर भी चुप रह...

धर्म निरपेक्षता का पाखण्ड

कितने धर्मनिरपेक्ष हैं हमारे नेता इसका अंदाजा कुछ नीचे लिखे तथ्यों से हो जाएगा :- १-आज तक जम्मू कश्मीर के लिए अलग से क़ानून बनाये जाते हैं, प्रत्येक एक्ट में लिखा होता है, पूरे भारत में लागू जम्मू कश्मीर को छोड़ कर. २-मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष रूप से उनका पर्सनल क़ानून लागू होता है बाकी बहुसंख्यकों के लिए उनके अपने धर्म से सम्बंधित कानूनों की जगह देश की सामान्य संहिता लागू होती है. ३-चुनावों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि टिकट जाति और धर्म के अनुसार अधिक संख्या वाली बिरादरी के व्यक्ति को दिया जाता है. ५-जम्मू कश्मीर में लाखों हिन्दुओं को अपना घर-परिवार छोड़कर अपने ही देश में शरणार्थियों की तरह रहना पड़ा, उनकी सुधि आज तक किसी धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति ने नहीं ली, केवल जबानी जमा-खर्च ही किया जाता रहा. ६-देश में हज हाउस बनने पर कहीं कोई आपत्ति नहीं होती लेकिन अमरनाथ यात्रा हेतु थोडी जमीन लीज़ पर देने पर इतना बड़ा बवाल, गोया कि विदेशियों को जमीन दे दी गई हो. ६- शाहबानो को गुजारा भत्ता देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए संविधान में संशोधन किया गया. ७-जम्मू कश्मीर में दो विश्...

चमचे का महत्व

कुछ दिनों पहले यूँ ही कुछ लिख लिया था, दूसरे ब्लॉग पर पोस्ट भी किया था, एक बार फिर। बन्धु चमचा राखिये, बिन चमचा सब सून चमचा गर नहि मिल सके, ले लें इक स्पून ले लें एक स्पून, काम जो चमचा आवे लगा लीजिये शर्त, नहीं दूजा कर पावे कर दानव कविराय, कढाई, थाली, कढछा रह जाते सब नीचे, मुंह तक जाता चमचा ।

एक दिन का मार्निंग वाक

एक दिन प्रात: जब मैंने मार्निंग वाक को कदम बढ़ाया तो पाया कि नगर का चौकीदार राम लुभाया जो चौदह साल से नहीं दिया था दिखाई झाड़ू लगा रहा था मेरे भाई थोड़ा और आगे बढ़ा दिमाग का बल्ब झक्क से उडा नजारा अजब था माहौल कुछ गजब था तोता राम नाम का ट्रैफिक सिपाही जो करता था दिन भर उगाही बड़े कायदे से पेश आ रहा था रिक्शे वाले को भी भाई-साहब कह कर बुला रहा था मैंने अपने दिल को कड़ा किया और धड़कते दिल के साथ कदमों को बढ़ा दिया आगे चला तो पाया कि लोग बड़े कायदे से आ-जा रहे थे ऑटो वाले भी अठारह की जगह आठ सवारी बैठा रहे थे लोगों ने हटा दिए थे अपने घरों के सामने के नाजायज ग्रिल देखकर चेहरा हमारा उठा खिल घर पंहुचते ही लगा जोर का झटका दिमाग सातवें आसमान में जा लटका पानी अभी तक आ रहा था बिजली का बल्ब भी मुस्कुरा रहा मैंने थोड़ा और साहस जुटाया और फिर अखबार की ओर हाथ बढाया पहली हेड-लाइन को पढ़ते ही माथा ठनक गया मैं तो इसे देखते ही अटक गया शीर्षक था-कल शिक्षकों ने आखिरी घंटे तक पढाया १०० डायल करने पर पुलिस वाला बडी भद्रता से पेश आया आगे लिखा था सरकारी स्कूलों में हुयी पढ़ाई रेल-गाडियां भी आज टाइम पर आईं सरकारी अस्प...

कहानी एक पुलिस वाले की

पिछली पोस्ट की तरह यह भी एक सच्ची घटना है। देहात क्षेत्र के एक थाने में वाहन चोरी की एक रिपोर्ट दर्ज हुई। वाहन का मालिक एक रसूखदार आदमी था, लिहाजा थानेदार ने तेजी से कार्रवाई करना प्रारम्भ की। मेहनत रंग लाई और करीब दो सौ किलोमीटर दूर वह वाहन पकड़ा गया। जिस व्यक्ति के यहाँ से वह वाहन पकड़ा गया, वह व्यक्ति एक गरीब मैकेनिक था। वह वाहन उसके यहाँ मरम्मत हेतु किसी व्यक्ति ने दिया था। थानेदार साहब ने उस मैकेनिक को पकड़ा, तदुपरांत वाहन चोर को भी पकड़ लिया गया। अब चूँकि चोर पुलिस से बहुत अच्छी तरह से वाकिफ था, उसने तुंरत ही साम-दाम-दंड-भेद का सहारा लिया। उस चोर ने थानेदार साहब से अकेले में कुछ बातें की, थोड़ी देर बाद थानेदार साहब की कलम के प्रताप से वाहन मैकेनिक चोर बन गया, यद्यपि उस इलाके के सभी लोग यह जानते थे कि वह मैकेनिक चोर नहीं था। लेकिन पुलिस के आगे किस का बस चला है जो उनका चलता। उस गरीब मैकेनिक को तीन दिन अवैध रूप से हिरासत में रखा गया, उसे प्रताड़ना दी गई यह कबूल कराने को कि उसी ने वह वाहन चुराया था और उस इलाके में हुई कई अन्य चोरियों में भी उसी का हाथ था। उसने यह गुनाह नहीं कबूल...

एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद की कहानी

एक स्टिंग ऑपरेशन की कहानी बयान कर रहा हूँ। एक अधिकारी का स्टिंग ऑपरेशन एक पीड़ित व्यक्ति की शिकायत पर एक न्यूज चैनल ने किया। उस स्टिंग में उस अधिकारी को पीड़ित से रुपये लेते हुए दिखाया गया था। मामले की शिकायत पुलिस में भी की गई थी, अत: स्टिंग ऑपरेशन होने के बाद पुलिस ने भी जांच शुरू की। विभागीय जांच के अलावा एक अन्य एजेन्सी ने भी जांच की। आप सोच रहे होंगे, नतीजा क्या हुआ होगा, संभवत: बहुत ही कड़ी कार्रवाई हुई होगी। लेकिन असलियत बिल्कुल इसके विपरीत है। अधिकारी को निलंबित किया गया। पुलिस गिरफ्तारी नहीं कर पायी, दूसरी एजेंसियों ने भी मामले में कुछ तथ्य नहीं पाये, न्यूज एजेन्सी वालों को इतनी फुरसत ही नहीं थी कि वे आगे आ पाते (हालाँकि कानूनी पेचीदगियां इतनी हैं कि उन्होंने ने भी कुछ हद तक ठीक किया , क्योंकि अजय कटारा का उदाहरण सबके सामने है)। न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुए मुक़दमे की पुलिस द्वारा की गई छान-बीन के बाद यह पाया गया कि जिस आदमी ने यह रुपये दिए, उसकी हैसियत ही नहीं थी रुपये देने की। फिर वह व्यक्ति कहाँ से रिश्वत देता, अत: यह शिकायत निराधार है और किसी षडयंत्र के चलते उस अधिकारी को ...

सिर्फ एक छोटा सा सवाल

पेट्रोल के दाम पचास डॉलर से भी कम हो गए हैं, जो कि अधिकतम एक सौ पैंतालीस डॉलर तक पहुँच गए थे। पेट्रोलियम पदार्थों के दाम अभी तक क्यों कम नहीं किए गए यह जानते हुए भी कि मंहगाई के कारण भारत की जनता त्राहि त्राहि कर रही है । सरकारी पेट्रोलियम कम्पनियाँ कहने को स्वतंत्र हैं, लेकिन पूरी तरह से सरकार पर निर्भर। इस समय दक्षिणपंथी, वामपंथी, सपा, बसपा, कांग्रेस, भाजपा इत्यादि सभी राजनैतिक दल इस मुद्दे पर कोई भी प्रतिक्रिया देते हुए नहीं दिखाई देते। इससे क्या यह स्पष्ट नहीं होता कि सभी मौसेरे भाई हैं, एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं, कोई नागनाथ है तो कोई सांपनाथ, हाथी के दांत खाने के और हैं , दिखाने के और । प्रदेशों की सरकारों को यह लाभ है कि जब पेट्रोलियम के दाम बढ़ते हैं तो उसके ऊपर लगा हुआ विक्रयकर अपने आप बढ़ जाता है। जब कभी भी पेट्रोल-डीजल का दाम दो-तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ता है तो माल-भाड़ा और किराया सम-अनुपात में न बढ़कर अच्छी-खासी मात्रा में बढ़ जाता है, जिससे ट्रांसपोर्टर तो फायदे में रहता है, लेकिन नतीजा भुगतती है गरीब जनता और ईमानदारी से टैक्स देने वाला आम आदमी, जिसे बाजार से खरीदी जान...

आर्थिक मंदी से बेहाल दुनिया

आर्थिक मंदी से दुनिया बेहाल है , शेयर मार्केट धड़ाम हो चुके हैं । लोग आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या करने जैसे दुर्भाग्यपूर्ण कदम भी उठा रहे हैं । मेरा भी कुछ रुपया म्युचुअल फंडों में लगा हुआ था जो आज की तारीख में घटकर तिहाई रह गया है। मेरे पड़ोस में रहने वाला जयप्रकाश जो मोची का काम करता है , उसने मुझसे एक सवाल किया जोकि उसी के शब्दों में लिख रहा हूँ - " भाई साहब , अखबार में रोज आ रहा है कि दुनिया में मंदी आ रही है , कंपनियों के शेयर रोज गिर रहे हैं , लेकिन महंगाई वहीं के वहीं । न तेल - साबुन के दाम कम हुए , न आटा - चावल के , बसों - टेंपो के किराये जो बढ़ जाते हैं कभी कम नहीं होते । मंदी बहुत है लेकिन मकान सस्ते नहीं हुए , न जमीनों के दाम कम हुए , न लोहे सीमेंट के । सब्जियों के दाम इतने बढ़ गए हैं कि घर का खर्च कैसे चलता है , हम ही जानते हैं । स्कूल की फीसें कम नहीं हुईं , कापी - किताबों के दाम कम नहीं हुए , जूते - कपड़े भी उतने ही महंगे हैं ।...

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर तथा कर्नल पुरोहित के मामलों की सूक्ष्म जांच होना चाहिए.

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर तथा लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के मामले में जिस तरह से एटीएस रोज नए खुलासे कर रही है वह अपने आप में संदेह उत्पन्न करने वाले हैं। एटीएस कहती है कि समझौता एक्सप्रेस में आरडीएक्स का प्रयोग हुआ, लेकिन फोरेंसिक सबूतों के अनुसार इसमें अमोनियम नाइट्रेट का प्रयोग हुआ था। अब खबरें आ रही हैं कि आई० बी० के दवाब के कारण एटीएस इसका खंडन कर रही है। हरियाणा पुलिस भी अब कह रही है कि इस ब्लास्ट में आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था। इनमें से कौन सी एजेन्सी सच्ची है और कौन सी झूठी, कहना मुश्किल है। एक चैनल ने उस प्रापर्टी डीलर से बात की जिसके बारे में यह आरोप लगाया गया था कि कर्नल पुरोहित ने उस डीलर को रुपये विस्फोटकों को खरीदने के लिए दिए थे, उस प्रापर्टी डीलर ने चैनल को यह बताया कि यह पैसे उसे एक फ्लैट को खरीदने के लिए दिए गए। भारतीय सेना C-4 अर्थात आरडीएक्स का प्रयोग करती ही नहीं तथा जब्त किए गए विस्फोटकों को गवाहों के सामने ही निष्प्रयोज्य कर दिया जाता है, अत: सेना का विस्फोटक पुरोहित के हाथ लगने की थ्योरी परवान चढ़ती नहीं दिखाई देती। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कल यह भी कहा ...

घूस महत्त्व

बंधु इस संसार में बड़ी चीज है घूस, जिसमें जितनी शक्ति है जोर लगा कर चूस, जोर लगा कर चूस यह मौका चूक न जाना, कार्य बड़ा दुष्कर है जॉब सरकारी पाना, पकडे जाने का कभी मन में उठे ख्याल, आधा हिस्सा बॉस का, तत्क्षण रखो निकाल.

आज भी राष्ट्रीय शर्म का दिन है.

आज भी राष्ट्रीय शर्म का दिन है, कल एक छोटी सी ख़बर टेलीविजन पर थी कि जिस जर्मन शोधार्थी महिला ने अपनी नाबालिग पुत्री के गोवा के एक मंत्री महोदय के पुत्र द्वारा यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराई थी, उस महिला ने अपना शिकायत यह कहते हुए वापस लेने की प्रार्थना की है कि वह अपने परिवार के शोषण के डर से अपना मामला वापस लेना चाहती है। छोटा सा स्क्रोलर दिखाकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने अपना औपचारिकता निभा ली, प्रिंट मीडिया ने भी ऐसे ही अपना कर्तव्य पूरा कर लिया। पहले तो मंत्री पुत्र की गिरफ्तारी ही नहीं हो सकी, माननीय मंत्री जी अपने साथ बेटे को थाने में ले गए आत्म समर्पण कराने हेतु। पता नहीं कहाँ है महिला आयोग, बाल आयोग, मानवाधिकार आयोग, हमारे धर्म-निरपेक्ष नेता, हमारे स्वनाम धन्य समाज सेवी, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के हमारे महान पत्रकार। एक छोटी सी लड़की का यौन शोषण, उसके बाद उसकी पैरवी करने वाली उसकी माँ के लिए पैदा की जा रही दिक्कतें हमारे सभ्य समाज के मुहं पर तमाचा हैं। सनद रहे कि ऐसे ही लोग जब वोट मांगने आते हैं तो समाज को उसकी गरिमा, उसकी सुरक्षा का आश्वासन देते हैं और मौका पाते ही क़ानून की...

नेताजी को घाटा-कुछ दिनों पूर्व रची गई व पुराने ब्लॉग पर प्रकाशित

शाम को टहलते हुए मिले नेताजी जुगाड़ दास, मूड था बिगड़ा हुआ, लग रहे थे उदास। कुछ करीब आए, हम यूँही मुस्कुराये. फिर दागा एक सवाल, क्या हुआ नेताजी, क्यों बिगड़ा हुआ है हाल। हमें भी कुछ बताइये. बताने से गम हल्का होता है, बताकर गम को दूर भगाइए। नेताजी ने दिल को कडा किया. अपने जख्मों को हरा किया। मुंह को खोला और कुछ इस तरह बोला। क्या बताएं भ्राता। हमें तो हो गया ढाई करोड़ का घाटा। हम रह गए सन्न, नेताजी का कोई नहीं था व्यापार। दुनियावी चीजों से नहीं था उन्हें कोई सरोकार। हमने फिर दुस्साहस किया। सवाल पर सवाल दाग दिया। कैसे यह सब हो गया हमें भी बताइए? अपने गम में हमें भी भागीदार बनाइये। उन्होंने दिया प्रतिउत्तर. सुन मेरे पुत्तर, पचास लाख में मिल रहा था टिकट। कुछ हो गई थी समस्या विकट। जिस कारण अरेंज नहीं कर पाया था मनी. और टिकट पा गया था रामधनी। अरे टिकट पा गया होता तो पिछले दिनों तीन करोड़ पाता। पचास निकाल कर ढाई करोड़ फिर भी बच जाता.

किस लिए चुनते हैं हम इन्हें.

पिता जी कहते थे कि एक रुपये में से सिर्फ पन्द्रह पैसे नीचे तक पहुंच पाते हैं, उनके सुपुत्र का कहना है कि यह राशि अब पांच पैसे तक पहुंच गयी है। कितना महान काम किया है, यह ज्ञान बाँट कर। पिछले साठ सालों में अधिकतर उन्हीं के दल का शासन रहा है। इस महान कृत्य के लिए देश उनका ऋण कैसे चुका पायेगा। दिल्ली वाली मैडम कहती हैं कि लड़कियां adventurous न बनें। लखनऊ वाली मैडम कहती हैं कि मुझे पता है थाने बिकते हैं, अब यह सब बंद करना होगा। ललुआ मोची वहीं का वहीं खड़ा है, जहाँ उसके बाप-दादा खड़े थे। घरेलू मोर्चे वाले छोटे मंत्री जी असम में होने वाले धमाकों पर कहत े हैं कि असम में यह सब होता रहता है। बड़े मंत्री जी कहते हैं कि विस्फोट होना है यह तो मालूम था लेकिन कब और कहाँ होगा यह मालूम नहीं था। आख़िर किस लिए चुनते हैं हम इन जन-प्रतिनिधियों को। प्रतिनिधि हैं, इसलिए प्रति व्यक्ति से इकट्ठी हुई निधि पर ऐश करने के लिए। जरा सोचिये। क्या आवश्यकता है हमें ऐसे जन प्रतिनिधियों की, केवल इसलिए कि हम इन्हें चुने, ये ऐयाशी करें हमारे पैसे पर, हमारे ऊपर लाठी-गोली चलवायें और हमारे ऊपर हमले होते रहें ये व्यवस्था क...

हमारे सांसद

जरा एक नजर नीचे भी डाल लीजिये, हम जो सांसद चुनकर भेजते हैं, उन्हें क्या क्या सुविधाएँ मिलती हैं। किस तरह से ये किसी राजा महाराजा से कम हैं। इनके लिए न्यूनतम योग्यता कुछ भी नहीं, चपरासी के लिए भी कम से कम आठवाँ पास होना चाहिए। इनके विरुद्ध चाहे हत्या जैसे संगीन अपराध में मुकदमे दर्ज हों, थोडी बहुत सजा भी हो गई हो तब भी सांसद चुने जा सकते हैं, लेकिन अगर कोई लड़का मार-पीट में फँस गया हो तो उसे सरकारी नौकरी मिलना असंभव है। सरकारी नौकर अगर हड़ताल पर रहे तो कई दफा उसे तनख्वाह नहीं मिलती, ये सदन में सोते रहें, हंगामा करते रहें, न भी आयें तब भी सारी सुविधाओं के पात्र हैं। एक सरकारी कर्मचारी को यह कहकर चुनाव में हिस्सा लेने नहीं दिया जाता कि वह लाभ के पद पर है, लेकिन इनसे ज्यादा लाभ कौन पाता है, नीचे स्पष्ट हो जायेगा (ध्यान दें कि मैं निकम्मे सरकारी नौकरों के पक्ष में नहीं बोल रहा हूँ, मैं केवल एक तुलना कर रहा हूँ)। यह भी कहा जाता है कि सरकारी कर्मचारी व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन जितनी पहुँच इन सांसदों की होती है, उतनी किसी भी सरकारी कर्मचारी की नहीं हो सकती। Have...

एक ई-मेल का ब्यौरा

एक ई-मेल जो मुझे कहीं देखने को मिली थी, उसका विवरण नीचे दिया जा रहा है, मैं कह नहीं सकता कि इस मेल का विवरण सत्य है या नही। लेकिन यदि इस मेल में दिया गया विवरण सत्य है तो वास्तव में यह एक बड़ी दुखद स्थिति है। A VERY INTERESTING ARTICLE...ONE MUST READ Who owns the media in India? Recent Gujarat election have witnessed unaccountable money paid to media persons of both, print and electronic by Saudi Arabia to discredit Modi, which Media did very faithfully without success. There are several major publishing groups in India, the most prominent among them being the Times of India Group, the Indian Express Group, the Hindustan Times Group, The Hindu group, the Anandabazar Patrika Group, the Eenadu Group, the Malayalam Manorama Group, the Mathrubhumi group, the Sahara group, the Bhaskar group, and the Dainik Jagran group. Let us see the ownership of different media agencies. · NDTV: A very popular TV news media is funded by Gospels of Charity in Spain Supports Communism. Recently...

भगत सिंह का भी एन - काउन्टर हो गया होता

अगर आजादी से पहले पुलिस का सम्पूर्ण नियंत्रण भारतीय हाथों में होता तो भगत सिंह का भी फर्जी एन-काउंटर हो गया होता। पुलिस में जो अपराधी मानसिकता के व्यक्ति भरती हो गए हैं उन्होंने पुलिस की परिभाषा को, लगता है कुछ इस तरह से परिभाषित कर दिया है - Principal Organisation of Legislatively Incorporated Criminal Elements.

भिवानी पुलिस ने कुलदीप की हत्या कर दी

भिवानी पुलिस ने कुलदीप की हत्या कर दी। सोच समझ कर, बेरहमी के साथ, शराब और वर्दी के नशे में धुत होकर। मामले को रफा-दफा करने के अंदाज में पुलिस ने पहले बयान दिया कि सड़क ख़राब थी, गोली इसलिए चल गई, ताज्जुब है कि किसी पुलिस वाले को न लग कुलदीप के सर में लगी। फिर कहा कि Mistaken Identity के कारण ऐसा हो गया। बाद में एक पुलिसवाले को गिरफ्तार करना दिखा दिया। लगभग रोज ही पुलिसवालों की बेरहमी के किस्से मीडिया में दिखाई देते हैं। चौराहे के सिपाही से लेकर बड़े अधिकारियों सबका हाल मालूम ही है। लगभग हजारों की संख्या में लोग रोजाना पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाते हैं जिनमें से अधिकाँश मामलों की ख़बर ही नहीं लग पाती। उत्तर प्रदेश की एक घटना २००७ में सभी चैनलों पर दिखाई गई थी जिसमें एक अभियुक्त को भागकर पीछे से गोली मार दी गई थी। अगर पुलिस ही न्यायपालिका का काम करने में समर्थ है तो न्यायपालिका की आवश्यकता है ही नहीं। पुलिस भी उन्हीं को मार गिरा पाती है जिनमें से अधिकतर निरीह होते हैं। समर्थ गुंडे और बदमाशों के ख़िलाफ़ कुछ भी नहीं कर पाते यह वीर पुलिस वाले। उनके माननीय बन जाने के बाद सैल्यूट अवश्य मारते ...

श्री सुरेश चिपलूनकर तथा हर्ष जी के ब्लाग पर पाई एक बेहतरीन रचना .

Quote - क्या आप धर्मनिरपेक्ष हैं ? जरा फ़िर सोचिये और स्वयं के लिये इन प्रश्नों के उत्तर खोजिये..... १. विश्व में लगभग ५२ मुस्लिम देश हैं, एक मुस्लिम देश का नाम बताईये जो हज के लिये "सब्सिडी" देता हो ? २. एक मुस्लिम देश बताईये जहाँ हिन्दुओं के लिये विशेष कानून हैं, जैसे कि भारत में मुसलमानों के लिये हैं ? ३. किसी एक देश का नाम बताईये, जहाँ ८५% बहुसंख्यकों को "याचना" करनी पडती है, १५% अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिये ? ४. एक मुस्लिम देश का नाम बताईये, जहाँ का राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री गैर-मुस्लिम हो ? ५. किसी "मुल्ला" या "मौलवी" का नाम बताईये, जिसने आतंकवादियों के खिलाफ़ फ़तवा जारी किया हो ? ६. महाराष्ट्र, बिहार, केरल जैसे हिन्दू बहुल राज्यों में मुस्लिम मुख्यमन्त्री हो चुके हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मुस्लिम बहुल राज्य "कश्मीर" में कोई हिन्दू मुख्यमन्त्री हो सकता है ? ७. १९४७ में आजादी के दौरान पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या 24% थी, अब वह घटकर 1% रह गई है, उसी समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब आज का अहसानफ़रामोश बांग्लाद...