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Showing posts from November, 2009

इस कुर्बानी की परम्परा को क्यों नहीं रोका जाता.

अभी बकरीद थी, करोड़ों की संख्या में जानवर काट दिये गये। कुर्बानी का मतलब है त्याग, लेकिन किसका एक निर्दोष जानवर का. लोगों के खाने पीने के पीछे अनेकों तर्क हो सकते हैं, जिन पर बहस करना मेरा मकसद नहीं. लेकिन एक परम्परा के नाम पर खून बहाने का यह सिलसिला. मेरे शहर में ही मैंने खून से बजबजाती नालियां देखीं हैं. इतना वीभत्स कृत्य. मुझे पता नहीं कि यह सत्य है अथवा नहीं लेकिन यह सुनते हैं कि मुहम्मद साहब ने अपने साथियों को निहायत ही चिन्ताजनक हालातों में जब उनके पास खाने पीने के लिये कुछ भी नहीं था, तब ऊंट को मार कर खाने के लिये कहा था. पुत्र की कुर्बानी की टक्कर की कुर्बानी का माद्दा और सानी तो कोई नहीं रखता लेकिन उस परम्परा के चलते करोडों जानवर जरूर इसकी भेंट चढ़ जाते हैं. जब भी रवायतों के नाम पर जीवहत्या होती है, चाहे वह देवी के लिये बलि हो या बकरीद, मुझे बहुत तकलीफ होती है. यहां तक कि अधिकतर व्यक्ति स्वयं उन जानवरों को नहीं काट सकते जिनकी वह कुर्बानी देते हैं. एक छोटी सी घटना जानवर के प्रेम और सम्वेदना को लेकर - मेरे घर के पास में एक कुतिया रहती थी, जिसके तीन बच्चे हुये. जिस घर के सामन...

क्या हमारी तरह का धर्म-निरपेक्ष होना वास्तव में उचित है?

हम सब लोगों को धर्म - निरपेक्षता का पाठ पढाया जाता है और यह सिखाया जाता है कि धर्म - निरपेक्षता की अवधारणा सबसे अच्छी अवधारणा है । लेकिन हमारी तरह का धर्म - निरपेक्ष होना क्या वास्तव में उचित है ? जो धर्म - निरपेक्षता हमें सिखाई पढ़ाई जा रही है , वह ठीक है ? किस तरह का धर्म - निरपेक्ष आचरण होना चाहिए हमारा ? मैं आप लोगों से निवेदन करता हूँ कि आप अपने विचार रखने की कृपा करें । मेरे हिसाब से धर्म से निरपेक्ष होना ही हमें सही राह से भटका देता है । सैनिक का धर्म है देश के लिए लड़ना , अध्यापक का धर्म है शिक्षा देना , तो विद्यार्थी का शिक्षा ग्रहण करना है । धर्म और अंध - धर्म के बीच का जो फर्क है उसे हम लोग नहीं देख पाये । एक संप्रदाय के लिए धर्म - निरपेक्षता का मायना और है दूसरे के लिए और । कई चीजें हैं , कई नजरिये हैं । देश को धर्म-निरपेक्ष बनाते बनाते कब प्रो-मुस्लिम हो गए, पता ही नहीं चला और यह स्वयं मुस्लिमों के लिए, उनके समग्र हितों के लिए कहीं अधिक नुकसान दायक है...

सात मौतें ज्यादा बड़ी हैं या एक व्यक्ति की दूसरी शादी?

आप लोग जवाब दें मेरे इस सवाल का कि दो बम धमाके , सात मौतें और पचास घायल ज्यादा बड़े हैं या एक उद्योगपति की दूसरी शादी । कल इन धर्म - निरपेक्षिया चैनलों के पास इतना समय नहीं था कि असम में हुए दो बम धमाकों , उनमें मारे गए सात व्यक्तियों और पचास घायलों के ऊपर तवज्जो दे पाते , क्योंकि उनके पास राज कुंद्रा की दूसरी बीवी शिल्पा के लहंगे और गहनों को दिखाने से ही फुरसत नहीं थी । मुझे नहीं पता कि इन धमाकों में हिन्दू मारे गए या मुसलमान , मैं बस इतना जानता हूँ कि सात इंसान मारे गए , जिनके घर होंगे , बच्चे होंगे , जिनके मारे जाने पर उनके घरवालों को , उनके बीवी बच्चों को उतनी ही तकलीफ हुई होगी , जितनी कि हमें होती है । बात इतनी सी है कि इन धमाकों में न तो कोई पत्रकार , न नेता और न अफसर काम आता है , अन्यथा ये कब के बंद हो गए होते ... कोई और हो न हो मैं इन के गम में हिस्सेदार हूँ । मैंने अपने सहोदर खोये हैं , मेरे भारत के नागरिक शहीद हुए हैं । ...

हंसने के लिए कुछ वाक्य जिनका प्रयोग आप अकेले में कर सकते हैं.

मैं यहां कुछ ऐसे वाक्य लिख रहा हूं जिनका प्रयोग आप अकेले में हंसने के लिये कर सकते हैं:- हम आतंकवाद से कड़ाई से निपटेंगे. अमेरिका से हेडली को प्रत्यर्पित किया जायेगा. भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जायेगी. चीन से निपटने के लिये हम पूरी तरह से सक्षम हैं. आने वाले पांच सालों में बिजली की समस्या खत्म हो जायेगी. हमारा निशाना अगला ओलम्पिक है. टीम इन्डिया ने कड़ा अभ्यास किया. कानून के अनुसार कार्रवाई की जायेगी. पाकिस्तान से कड़ाई से निपटा जायेगा. किसी भी आतंकवादी को बख्शा नहीं जायेगा. साम्प्रदायिक एकता को बढ़ावा देने हेतु कदम उठाये जायेंगे. कानून की दृष्टि में सब बराबर हैं. दलालों का प्रवेश निषिद्ध है. आपकी सहायता के लिये हर समय तत्पर है पुलिस. हर हाथ को काम मिलेगा, कोई भी बेरोजगार नहीं रहेगा. जनता ने हमारी नीतियों को पसन्द किया है. हमारी नीतियों को जनादेश मिला है. यहां न थूकें. नो पार्किंग. पुलिस उनका सम्मान करती है जो कानून का पालन करते हैं. धूम्रपान करना मना है. देश से गरीबी हटा दी जायेगी. कोई भी भूखे पेट नहीं रहेगा. मंहगाई पर जल्द ही काबू पा लिया जायेगा. नो कमेन्ट्स. कानून अपना का...

रैन बसेरा और सड़क

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पहले चित्र में एक गरीब का रैन बसेरा देखिये जो दिन भर मजदूरी करने के बाद रात्रि यहाँ गुजारता है । इस में देखिये कि किस तरह आधी सड़क तो अतिक्रमण कर घेर ली गई है । देश के सबसे बड़े दुश्मनों में एक बढती हुई जनसँख्या है जिस पर कोई ध्यान नही देता , सिर्फ और सिर्फ़ अपने वोट बैंक की खातिर ।

बोझा और टेकनोलोजी का संगम

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रिक्शेवाला काम के बोझ से लदा है , क्योंकि उसे भी अपना घर चलाना है । आप उसके गले में लटक ती हुई मोबाइल की डोरी को स्पष्ट देख सकते हैं ।

क्या इस वृद्धा के लिए कभी गुड टाइम्स आएगा??

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इस वृद्धा के लिए देखिये , जो अपने रैन बसेरे की तरफ बढ़ रही है । पीठ पर लदी थैली फिर लिखा है गुड टाइम्स । लेकिन क्या इस महिला के लिए कभी गुड टाइम्स आ पायेगा ???

एक जिंदगी ऐसी भी

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जिंदगी के बसर करने का एक तरीका यह भी है । भारत के भविष्य को भी यहाँ देख सकते हैं ।

जिंदगी यूँ भी बसर होती है

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ये भी भारत का नागरिक (वोटर है) जो डलाव से प्लास्टिक और लोहा बीनकर जीवन यापन करने की कोशिश कर रहा है. क्या इस नागरिक तक भारत के संविधान में दी हुई तमाम गारंटियां और पार्टियों द्वारा दिखाये गये सपने पहुंच पायेंगे? या फिर हर हाथ को काम की यही मूर्त अभिधारणा है??

विजिलेंस वीक

मुफ्त का मुर्गा उड़ाया, बोतल वो पूरी पी गये. कार एसी में वो घूमे, रूम में जा फिर सो गये. नोट की गड्डी संभाली, हर चीज पाई ठीक. कुछ इस तरह निपटा गये, वो सतर्कता वीक.

नेता जी का ऐलान

नेताजी ने कर दिया खंभ ठोक ऐलान तीन महीने तक नहीं गिरने वाले दाम गिरने वाले दाम खूब स्टॉक लगाओ करो मुनाफाखोरी चूस जनता को जाओ कह दानव कविराय जगो अब वोटर प्यारे कर दो इनको चित्त दिखाओ दिन में तारे