अब कौन मिलेगा

आंखों में आंसुओं के सिवा अब कौन मिलेगा,
ख्वाबों में ख्यालों के सिवा अब कौन मिलेगा,
जाते हो तो जाते हुए बस इतना बता दो,
इस घर में तुम्हारे सिवा अब कौन मिलेगा,
अब सुबह हुई नाश्ते का वक्त हुआ है,
इस नाश्ते में चाय के सिवा अब कौन मिलेगा,
नौ बज चुके हैं टिफिन भी तैयार नहीं है,
इस टिफिन में जूठों के सिवा अब कौन मिलेगा,
रुखसत करो ड्यूटी को मैं तैयार खड़ा हूँ,
रुखसत को अब सदके के सिवा कौन मिलेगा,
अब शाम हुई राह भी मैं घर की चला हूँ,
इस घर में हमारे सिवा अब कौन मिलेगा।

-श्री अली द्वारा उनकी स्वर्गीय पत्नी को समर्पित.  यह पुराने ब्लाग पर पोस्ट की गयी थी तकरीबन ढ़ाई बरस पहले.

Comments

Popular posts from this blog

बीस हजार का फिफ्टी परसेन्ट - बाढ़ तुम रोज आया करो....

मैलवेयर हटाने के चक्कर में ब्लाग रोल भी गायब हुआ..

मृतप्राय स्थिति हेतु क्षमा