एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद की कहानी
एक स्टिंग ऑपरेशन की कहानी बयान कर रहा हूँ। एक अधिकारी का स्टिंग ऑपरेशन एक पीड़ित व्यक्ति की शिकायत पर एक न्यूज चैनल ने किया। उस स्टिंग में उस अधिकारी को पीड़ित से रुपये लेते हुए दिखाया गया था। मामले की शिकायत पुलिस में भी की गई थी, अत: स्टिंग ऑपरेशन होने के बाद पुलिस ने भी जांच शुरू की। विभागीय जांच के अलावा एक अन्य एजेन्सी ने भी जांच की। आप सोच रहे होंगे, नतीजा क्या हुआ होगा, संभवत: बहुत ही कड़ी कार्रवाई हुई होगी। लेकिन असलियत बिल्कुल इसके विपरीत है। अधिकारी को निलंबित किया गया। पुलिस गिरफ्तारी नहीं कर पायी, दूसरी एजेंसियों ने भी मामले में कुछ तथ्य नहीं पाये, न्यूज एजेन्सी वालों को इतनी फुरसत ही नहीं थी कि वे आगे आ पाते (हालाँकि कानूनी पेचीदगियां इतनी हैं कि उन्होंने ने भी कुछ हद तक ठीक किया , क्योंकि अजय कटारा का उदाहरण सबके सामने है)। न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुए मुक़दमे की पुलिस द्वारा की गई छान-बीन के बाद यह पाया गया कि जिस आदमी ने यह रुपये दिए, उसकी हैसियत ही नहीं थी रुपये देने की। फिर वह व्यक्ति कहाँ से रिश्वत देता, अत: यह शिकायत निराधार है और किसी षडयंत्र के चलते उस अधिकारी को फंसाया गया है। इसके बाद वह अधिकारी ठाठ से बहाल हुआ और आज फिर मजे से वैसे ही नौकरी कर रहा है जैसे कि पहले कर रहा था, कुल मिलकर अब आप समझ गए होंगे कि जिन स्टिंग ऑपरेशन को आप टेलीविजन पर देखते हैं, उनमें से कुछ का क्या हश्र होता है। विभिन्न संस्थाएं किस प्रकार काम करती हैं और इस देश का भविष्य क्या है, आप ख़ुद ही अंदाजा लगा सकते हैं।
एक अधिकारी के पास एक सज्जन आए, उन्होंने अपने लिए सच बोलने वाले एक बहुत तेज-तर्रार चैनल का पत्रकार बताया, कुछ देर बात करते रहे, बाद में पता चला कि उन सज्जन के यहाँ कोई पार्टी थी जिसके लिए उन्हें ठंडे की आवश्यकता थी जो पूर्ण कर दी गई।
एक बार भारत सरकार से फिर से पुराना सवाल -"भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में छुपाये गए काले धन के बारे में किस दिन भारत सरकार स्विस सरकार से सूचना लेकर उसे सार्वजनिक करेगी?"
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