साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर तथा कर्नल पुरोहित के मामलों की सूक्ष्म जांच होना चाहिए.

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर तथा लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के मामले में जिस तरह से एटीएस रोज नए खुलासे कर रही है वह अपने आप में संदेह उत्पन्न करने वाले हैं। एटीएस कहती है कि समझौता एक्सप्रेस में आरडीएक्स का प्रयोग हुआ, लेकिन फोरेंसिक सबूतों के अनुसार इसमें अमोनियम नाइट्रेट का प्रयोग हुआ था। अब खबरें आ रही हैं कि आई० बी० के दवाब के कारण एटीएस इसका खंडन कर रही है। हरियाणा पुलिस भी अब कह रही है कि इस ब्लास्ट में आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था। इनमें से कौन सी एजेन्सी सच्ची है और कौन सी झूठी, कहना मुश्किल है। एक चैनल ने उस प्रापर्टी डीलर से बात की जिसके बारे में यह आरोप लगाया गया था कि कर्नल पुरोहित ने उस डीलर को रुपये विस्फोटकों को खरीदने के लिए दिए थे, उस प्रापर्टी डीलर ने चैनल को यह बताया कि यह पैसे उसे एक फ्लैट को खरीदने के लिए दिए गए। भारतीय सेना C-4 अर्थात आरडीएक्स का प्रयोग करती ही नहीं तथा जब्त किए गए विस्फोटकों को गवाहों के सामने ही निष्प्रयोज्य कर दिया जाता है, अत: सेना का विस्फोटक पुरोहित के हाथ लगने की थ्योरी परवान चढ़ती नहीं दिखाई देती। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कल यह भी कहा कि उसे बुरी तरह प्रताडित किया जा रहा है, यहाँ तक कि उसके सतीत्व पर भी उंगली उठाई गई और बुरी तरह मारा पीटा गया। कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी पूर्व निर्धारित योजना के अंतर्गत हिन्दुओं को बदनाम करने की कोई बड़ी साजिश इसके पीछे काम कर रही हो। अत: यह बहुत आवश्यक हो जाता है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश से इस पूरे प्रकरण की जांच करायी जाए, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके तथा जो कोई भी दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा सके तथा मालेगाँव, मोडासा और समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोटों के सही अभियुक्तों को सजा मिल सके।

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