बद अच्छा, बदनाम बुरा
पूर्वोत्तर में ईसा मसीह के एक विवादित चित्र को लेकर देश भर में बवाल प्रारम्भ हो गया. कल मजीठा में उपद्रव हुआ. उपद्रवियों ने जमकर तोड़-फोड़ की और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया. मजीठा, मोगा इत्यादि पंजाब के कई शहरों में काफी बवाल हो चुका है. सिख भी अपनी धार्मिक भावनाओं को लेकर बिल्कुल समझौता नहीं करते, जिसका प्रमाण बाबा राम रहीम द्वारा गुरु गोविन्द सिंह साहब जैसी वेश-भूषा धारण करने पर हुआ दंगा-फसाद है. रामगढियों को लेकर भी बवाल हो चुका है, और आजकल दर्शन सिंह को लेकर है. इससे पहले डेनिश कार्टूनिस्ट द्वारा बनाये गये मोहम्मद साहब के विवादास्पद चित्र को लेकर पूरे देश में आगजनी और तोड़फोड़ की गयी. पिछले दिनों मुहर्रम के दौरान उत्तर प्रदेश में दंगे और तोड़-फोड़ की कुछ घटनायें हुई :-
१-आगरा में उपद्रव हुआ.
२-मथुरा में शिया-सुन्नी भिड़े.
३-मैनपुरी में ताजिया दफनाने को लेकर शमशान की मिट्टी हटाने को लेकर पथराव की नौबत.
४-अलीगढ़ में एक बस के सामने आने पर बवाल, ताजियादार बड़ी मुश्किल से माने.
५-बहजोई, मुरादाबाद में नये रास्ते से ताजिये ले जाने की जिद, फिर पथराव और दुकानों में लूटपाट.
६-भदोही में पथराव.
७-धौरेहरा, लखीमपुर में नई जगह पर ताजिये रखने पर बवाल.
८-बाराबंकी के भिटौली में ताजिये निकालने को पीपल काटा और फिर दंगा.
९-गोरखपुर में दुकान का बोर्ड तोड़ने से मना करने पर ताजियेदारों द्वारा दुकान के मालिक कीर्ति कुमार गुप्ता की बुरी तरह पिटाई.
१०-फरीदपुर, बरेली में राधास्वामी मंदिर के ऊपर लगी बीम हटाने की जिद और फिर बवाल. बाद में ताजिया निकालने के लिये मंदिर के सामने की सड़क खोदी गयी.
इस सब के बाद भी हिन्दुओं को मीडिया घनघोर कट्टर धार्मिक रूप में चित्रित करने से नहीं चूकता. लिखने का उद्देश्य यह नहीं कि हिन्दुओं को भी दंगा करने का अधिकार मिले या फिर हिन्दुओं को ज्यादती करने का लाइसेंस दिया जाये. उद्देश्य यह है कि बाकी धार्मिक समूह अपनी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के नाम पर दंगा-फसाद भी करें तो मीडिया (विशेषत: इलेक्ट्रानिक) तथा तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेता इसे जायज ठहरा ही देते हैं और यदि हिन्दू अपनी मान्यताओं पर किये जा रहे कुठाराघात के प्रति कोई प्रतिक्रिया करने की कोशिश करता है तो ये सब दाना-पानी लेकर चढ़ बैठते हैं और फासिस्ट, रेसिस्ट, भगवा आतंकी जैसी उपाधियां देने से नहीं चूकते.
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