धर्म निरपेक्षता का एक और उदाहरण प्रस्तुत किया मुलायम सिंह ने
धर्म निरपेक्षता का एक और उदाहरण प्रस्तुत किया मुलायम सिंह ने . एक पोस्ट में मैंने धर्म-निरपेक्षता के बारे में बहुत थोड़ा सा लिखा था जिसे पढ़कर कई पाठकों ने कड़ी आपत्ति जताई. अब असली धर्म-निरपेक्षता क्या है यह देखिये - उलेमाओं के चरण पखारना वोटों की खातिर, सच्चर कमेटी लागू करने का आश्वासन, उर्दू अध्यापकों की भर्ती पर इतराना और बढा़ने की घोषणा (यह अलग बात है कि संस्कृत धीरे-धीरे मरती रहे), मुसलमानों के विरोध में कभी कोई काम न करने की घोषणा (जैसे कि अभी तक मुसलमानों के खिलाफ ही सारे काम हुये हैं-इसके बावजूद मुसलमानों की जनसंख्या में हिन्दुओं के मुकाबले कई गुना वृद्धि हुई है समानुपात में). इसका दूसरा पहलू भी देखिये इस पर न तो हिन्दू कुछ बोलेंगे न धर्मनिरपेक्षी (शायद यही असली धर्मनिरपेक्षता है), फिर अगर यही काम कोई हिन्दू नेता किसी हिन्दू धर्माचार्य के पास जाकर करता और ऐसे ही आश्वासन हिन्दुओं के लिये देता तो अब तक तमाम चैनल वाले चिल्लाने लगते, दूसरी पार्टियों के धर्मनिरपेक्षी नेता गला फाड़ते हुये नहीं थकते और मुसलमानों के धर्मगुरु अबतक उस नेता के दल को हराने का फतवा जारी कर चुके होते.
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