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सुविधाशुल्क लेने का एक नायाब तरीका

मेरे एक मित्र ने मुझे बताया कि उनके एक अधिकारी ने उन्हें दो टिकिट कैंसिल कराने को दिये. चार लोगों की रिटर्न जर्नी के टिकट थे, दिल्ली से चेन्नई तक के एसी - द्वितीय के. उन्होंने टिकिट कैंसिल कराये और पैसे वापस कर दिये जो कई हजारों में बनते थे. एक साधारण सी प्रक्रिया थी यह. अगले वर्ष   अपनी एल०टी०सी० हेतु उन्हें रेलवे टिकिट के नम्बरों की आवश्यकता थी, जो उनसे खो गये थे. इस हेतु वे मित्र अपनी रिजर्वेशन स्लिप तलाशने रिजर्वेशन कार्यालय में पहुंचे, जहां पहुंचकर उनके होश उड़ गये. उन्हें वहां अपने कार्यालय के लगभग सभी कर्मचारियों के द्वारा इसी प्रकार कैंसिल कराये गये टिकिटों की स्लिप्स मिलीं जो कि सैकड़ों की संख्या में थीं और उनकी राशि कई लाख बैठती थी. बाद में यह पता चला कि यह तरीका उन अधिकारी द्वारा घूस लेने के लिये बनाया गया था. जिससे वह पैसा लेते उसके लिये वह स्लिप भरकर दे देते और टिकिट मंगा लेते, बाद में उन टिकिटों को कैंसिल कराकर पैसा अपने हवाले कर लेते. है न नायाब तरीका.

क्या करेंगे हेडली को भारत लाकर?

अभी अभी जी के पिल्लई साहब का बयान पढ़ रहा था हेडली के बारे में. और इसके सम्बन्ध में छपी खबर भी कि अमेरिका हेडली का प्रत्यर्पण करना नहीं चाहता. कान पक चुके हैं और आंखे थक गई हैं हेडली के बारे में सुनते और देखते. पता नहीं अखबार वालों की कलम क्यों रुक जाती है और टीवी पर चिल्ला चिल्लाकर अपनी आवाज को बुलन्द करने वाले धर्मनिरपेक्ष स्वनामधन्य निर्भीक पत्रकारों की जुबान पर अंगारे क्यों आ जाते हैं दाऊद गिलानी (जोकि हेडली का सही नाम है) का नाम लेते हुए. खैर, भारत लाकर क्या करेंगे हेडली का? मुझे तो एक ही बात समझ में आती है कि शायद ये लोग उसे बाइज्जत बरी कराना चाहते होंगे . या फिर ये बयान दिलाना चाहते होंगे कि हेडली के विरुद्ध भगवा आतंकवादियों ने साजिश कर उसे फंसाया है. या फिर ये कि वो तो समाजसेवा के लिये भारत आया था और भारत में विभिन्न जगहों पर समाजसेवा के थोक आउटलेट खोलना चाहता था. अमेरिका में ट्रायल होगा तो साल-डेढ़ साल के अन्दर उसे सजा हो जायेगी और इतनी कि वह मरने के बाद ही जेल से बाहर निकल सकेगा. और भारत में? कितने समर्थ लोगों को सजा हुई है आजतक. और फिर कितनी बेशर्मी से बयानबाजी करते घूमते हैं...

अगर आदमी बीमार न पड़ता तो क्या होता ??

उत्तर बहुत सारे हो सकते हैं और हैं जिनके बारे में फिर कभी। लेकिन एक चीज है जो नहीं होती..... क्या??? ... ........ ........... ................. ................... ..................... ........................ ............................. ................................... ....................................... ........................................... ................................................ .................................................... ................................................................ ..................................................................... ............................................................................ स्वास्थ्यगत कारणों के आधार पर एन० डी० तिवारी का इस्तीफा

क्या चिट्ठाजगत हैक हो गया है या कोई तकनीकी खराबी आ गयी है ?

कई दिनों से चिट्ठाजगत नहीं खुल रहा है जिस के कारण अपने अकाउंट को नहीं देख पा रहा हूँ। कृपया बताने की कृपा करें कि चिट्ठाजगत क्यों नहीं खुल रहा है। क्या यह बंद कर दिया गया है या किसी तकनीकी खराबी के चलते बंद हो गया है अथवा हैक कर लिया गया है?

रुचिका के मामले में चौटाला की बेशर्म सफाई

कुछ देर पहले बेशर्म सफाई देते हुये चौटाला को देखा जो रुचिका कांड के अपराधी और हरियाणा पुलिस के पूर्व महानिदेशक राठौर के विरुद्ध क्या क्या कदम उठाये, बता रहे थे। जब एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि आपने इसके विरुद्ध क्या कार्रवाई की तो चौटाला का जबाव था कि चार्जशीट होने पर निलम्बित कर दिया गया तथा चूंकि मामला अदालत में था और अदालत से उसे बेल मिल गयी थी लिहाजा उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई करना अदालत की अवमानना होती। चौटाला कह रहे थे कि विभागीय इन्क्वायरी के आदेश दिये और उसके बाद उसे निलम्बित कर दिया गया। उन्हें क्या यह नहीं पता कि निलम्बन कोई सजा नहीं होती और फिर उन्होंने यह भी नहीं बताया कि क्या विभागीय कार्रवाई की गयी. पुलिस पदक देने के लिये अनुशंसा के सवाल को यह कहकर टाल गये कि यह आईएएस आईपीएस अफसरों के प्रमोशन का मामला अलग से चलता है. पता नहीं किसे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे थे चौटाला. किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिये आपराधिक कृत्य हेतु जो न्यायिक कार्रवाई होती है वह तो होती ही है, लेकिन इसके अतिरिक्त दोषी कर्मचारी को दंडित करने हेतु सरकार के पास विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के विकल्प खुले...

मोदी द्वारा उठाया गया एक अच्छा कदम जिसकी आलोचना होने लगी

पिछले दिनों गुजरात में चुनाव सुधार सम्बन्धी एक अच्छा निर्णय लिया गया। यह निर्णय गुजरात में होने वाले स्थानीय चुनावों के मद्दे-नजर एक बेहतरीन कदम है। इसके अनुसार स्थानीय चुनावों में मतदान को अनिवार्य कर दिया गया है। गुजरात में होने वाले स्थानीय चुनावों में अब प्रत्येक मतदाता को मतदान करना ही पड़ेगा तथा जो व्यक्ति मतदान से अनुपस्थित रहेंगे उनके लिए अपनी अनुपस्थिति का कोई ठोस कारण प्रमाणों के साथी प्रस्तुत करना पड़ेगा अन्यथा जानबूझ कर मतदान से अनुपस्थित रहने वाले मतदाताओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके साथ ही "किसी को भी मत नहीं " का विकल्प भी गुजरात के स्थानीय चुनावों में मतदाताओं को दिया गया है। जैसा कि अपेक्षित था गुजरात कांग्रेस ने इस बिल का विरोध यह कहते हुए किया कि यह मोदी की तानाशाही है और लोकतंत्र में मतदान करना या न करना मतदाता का विशेषाधिकार है और संविधान में वर्णित कर्तव्यों में कहीं भी अनिवार्य मतदान के बारे में कोई प्रावधान नहीं किया गया है, लिहाजा यह संविधान से इतर है। पता नहीं किस संविधान की बात कर रहे थे गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता, उस संविधा...

मुस्लिम ब्लॉगर का कसाब प्रेम

अभी अभी अजीज बरनी नाम के सज्जन के ब्लॉग की दो प्रविष्टियाँ पढ़ीं । एक का नाम है " कसाब की जबान प र हेडली का नाम , सवाल बहुत बड़ा है " और दूसरी है " २६ / ११ को मुंबई पुलिस का किरदार एक और सवाल "। दोनों ही पोस्टों में किस कदर एक तरफा रवैया अपना कर यह सिद्ध करने की कोशिश की जा रही है जैसे कि कसाब एक संत पुरुष था और उसके लिए फंसाया गया है । दूसरी तरफ यह भी सिद्ध किया जा रहा है कि करकरे और काम्टे की हत्या किसी षड्यंत्र के चलते पुलिस वालों ने ही करा दी । उनकी दोनों प्रविष्टियों का निचोड़ यही है । अधिकाँश मुस्लिम ब्लॉगर किस हद तक सांप्रदायिक सोच रखते हैं , उसका एक नमूना भर आप इन प्रविष्टियों में देख सकते हैं ( और हाँ , श्री महफूज अली जैसे अच्छी सोच वाले व्यक्ति इस श्रेणी में शामिल नहीं हैं ) । बात फिर वही आती है कि हिन्दू अपने जेन्युइन हितों की बात करे तो सांप्रदायिक लेकिन मुस्लिम घोर साम्प्रदायिकता फैलाये तो भी धर्म - निरपेक्...