ठुमक चलत रामचन्द्र, बाजत पैंजनियां....

इस भजन को सुनिये और तुलसी बाबा ने जिस रामराज्य की कल्पना की थी कि जहां देहिक, देविक, भौतिक क्लेश न हों, सभी लोग बराबर हों, सब को बराबरी का हक मिले, उस रामराज्य की तरफ बढ़ने की कामना में मेरा साथ दीजिये. जहां राष्ट्रप्रेम हो, सद्भाव हो, वास्तविक धर्मनिरपेक्षता हो, कानून का शासन हो, न्याय हो. सही मायनों में सर्वधर्म समभाव हो, सही अर्थों में बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय हो. यही मेरी कामना है ..

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