बड़े लोगों के मामले में गवाह, मुद्दई पता नहीं क्यों आत्महत्या कर लेते हैं....

एक माइक्रो पोस्ट.. अभी कुछ माह पहले हरियाणा में एटीएस के एसपी को उगाही के चलते एक ज्वैलर ने गिरफ्तार कराया था. इस ज्वैलर ने पिछले दिनों जहर खाकर खुदकुशी कर ली. उत्तर प्रदेश के कविता मर्डर केस के आरोपी की मृत्यु जेल के अन्दर संदिग्ध परिस्थितियों में हो गयी. नजारत घोटाले के आरोपी आशुतोष अस्थाना की मृत्यु भी जेल के अन्दर ही हो गयी. न जाने ऐसे कितने ही किस्से हैं जहां  मुल्जिम, मुद्दई या गवाह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के आगोश में समा चुके हैं. हालात बहुत भयावह हैं और परिस्थितियां विकट हैं. न्यायपालिका ही कुछ सार्थक कर सकती है.

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