गर्व से कहिये "दिल्ली पुलिस जिन्दाबाद"

" दिल्ली पुलिस का काला चेहरा एक बार फिर सामने आया है। आरोप है कि एक बेहद गरीब परिवार के दो बच्चों को दिल्ली के राजौरी गार्डन इलाके की पुलिस चोरी के इल्जाम में उठा ले गई। जब बच्चों को छोड़ने की गुहार लगाने उनकी मां पुलिस के पास गई तो 12 साल के बच्चे को अपनी ही मां के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किय़ा गया। इस खबर के सामने आने के बाद पुलिस के एक आला अधिकारी को जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
दरअसल 22 मई को दिल्ली के राजौरी गार्डन पुलिस चौकी में मौजूद पुलिस को एक घिनौना चेहरा सामने आया है। पीड़ित ममता का आरोप है कि पुलिस वालों ने उसके बेटे को ही उसका बलात्कार करने का हुक्म दिया। ममता का आरोप है कि पुलिसवालों ने अपने बेटे के सामने ही उसे कपड़े उतारने का हुक्म भी दिया। ममता और उसके परिवार को राजौरी गार्डन के पुलिसवाले किसी चोरी के सिलसिले में पूछताछ के लिए लाए। दो दिनों तक बच्चों की पिटाई और घर की तलाशी के बाद भी पुलिस को कुछ नहीं मिला। 
इसके बाद 22 मई को दिल्ली पुलिस ने रात में फिर इस परिवार को चौकी पर बुलाया। ममता का आरोप है कि पति-पत्नी और बच्चों से पूछताछ के बाद उसे और उसके 12 साल के बड़े बेटे को चौकी के अंदर कमरा में बंद कर दिया गया। आरोप है कि पुलिस ने चौकी में ही ममता के कपडे़ जबरदस्ती उतरवाए और उसके 12 साल के मासूम बच्चे को अपनी मां के साथ सेक्स करने को कहा। ये हुक्म बिजली की तरह उनपर गिरा, लगातार 2 घंटे तक गिड़गिड़ाने के बाद दोनों को कमरे से निकाला गया।
ये औरत ये जख्म भूलना नहीं चाहती। उसे अंगारों की तरह अपने सीने में दहकाते रहना चाहती है ताकि उन वर्दीवालों को सजा दिलवा सके। उसने पुलिस के आला अफसरों के दरवाजे खटखटाए। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग में भी गई। ममता और उसके पति का आरोप है कि पुलिसवाले अब इस शिकायत से बचने के लिए उन्हें 20 हजार की रिश्वत देना चाह रहे हैं।
वहीं इलाके के डीसीपी शरद अग्रवाल सफाई देने लगे कि ममता और उसके रिश्तेदारों को पुलिस नहीं बल्कि चोरी की शिकायत करने वाली महिला ही चौकी लेकर आई थी और उसके सामने ही आरोपियों से सारी पूछताछ की गई। डीसीपी के मुताबिक ममता के आरोपों की जांच राजौरी गार्डन के एसीपी को दे दी गई है और जांच के नतीजों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। यानि जिस थाने के लोगों पर संगीन आरोप हैं उसी थाने के अफसर को जांच सौंप दी गई है। साफ है दिल्ली पुलिस इस केस का कत्ल करने की तैयारी में है।"-IBN NEWS

पढ़ी आपने यह खबर. यह कोई पहली बार नहीं है कि पुलिस पर इस तरह के आरोप लगे हैं. अंजाम पता नहीं क्या होगा. लेकिन इन्साफ पाना गरीब के लिये तो लगभग असम्भव है. अमूमन ऐसे मामलों के उछलने के बाद कार्रवाई करने के आदेश दे दिये जाते हैं, एक-दो को निलम्बित कर दिया जाता है. लेकिन जैसे जैसे समय गुजरता जाता है, पुलिस वाले रसूखदार होते ही हैं, मामले को मैनेज कर लिया जाता है. ऐसा नहीं है कि थानों की और पुलिस की कारगुजारियों का पता उच्चाधिकारियों को नहीं होता, लेकिन वे भी तो इसी के अंग हैं. मामला अधिक तूल पकड़ जाये, एक-दो को निलम्बित कर दो, इन्क्वायरी बिठा दो. इन्क्वायरी की रिपोर्ट के आने में ही सालों लग जाते हैं, तब तक आदमी गम खाकर चुपचाप बैठ जाता है या कह लीजिये कि बिठा दिया जाता है. बस हो गया इन्साफ.

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