हरियाणा में दलितों की शामत

हरियाणा में दलितों की तो शामत आ गई लगती है. मिर्चपुर की घटना को हुये अभी लगभग एक महीना ही गुजर पाया था कि पलवल जिले के भिटुकी गांव में एक बार फिर दबंगों ने दलितों को पीटा और उनके घरों में आगजनी की. गांव में प्रधानी का चुनाव था और दलित पहले ही दबंगों को लेकर आतंकित थे जिसके लिये उन्होंने शासन-प्रशासन से गुहार भी की. लेकिन हमेशा की तरह हरियाणा की पुलिस-प्रशासन ने चुप्पी साध ली और फिर दबंगों ने जमकर दलितों को पीटा और उनके घरों में आग लगा दी.  आजादी के बासठ साल बाद भी दलितों का यह हाल. कांग्रेस दलितों के हित का ढो़ल पीटती रहती है और कांग्रेस शासित प्रदेश में ही दलितों को जीने तक नहीं दिया जा रहा. मत देने का अधिकार संविधान ने दिया है न कि किसी पार्टी ने या किसी जाति विशेष ने और मतदान करना हर एक व्यक्ति का विशेषाधिकार है. हमें कोई ताकत नहीं रोक सकती अपनी मन-मर्जी मुताबिक मतदान करने से. आज के जमाने में भी दबंगों द्वारा ऐसे जुल्म! यह भी बिल्कुल सही है कि दलितों को हर एक पार्टी ने सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक माना है और अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिये उनका प्रयोग किया है. कब बन्द होगी जाति के नाम पर फैलाई जा रही यह बर्बरता. जब मामला मीडिया में उछल गया तो खानापूर्ति की गई अन्यथा किसी को कानोंकान खबर भी न होती. हरियाणा में दलितों की सुरक्षा की उम्मीद कम से कम कांग्रेस से तो नजर नहीं आती.

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