मृत शरीरों को ले जाने वाले वाहन अब जिन्दों को ढो रहे हैं-देश का नेतृत्व भी नागरिकों को इसी तरह ढ़ो रहा है..

लखनऊ-कानपुर राजमार्ग पर न जाने ऐसी कितनी बसें दिखाई दीं जो सवारियों को ढ़ो रही हैं.. ये बसें किसी समय मृत शरीरों को ले जाती थीं और मेडिकल कालेज, लखनऊ के आस-पास बहुतायत में खड़ी दिखाई देती थीं. अब मेडिकल कालेज भी इफरात में हैं और एम्बुलेन्स भी, लिहाजा इनका अस्तित्व खतरे में पड़ता दिखाई दिया तो मालिकान ने इन्हें जिन्दा सवारियों को ढ़ोने में लगा दिया.. अब देखिये इनके मालिकों का नजरिया, जो हमारे देश के होनहार कर्णधारों से हूबहू मिलता है. जिन्दा को ले जाने वाले वाहन पर "लाश के वास्ते" मिटाने तक की जहमत नहीं उठाई गई. और ठीक भी है कर्णधार भी जिन्दों और मुर्दों में अन्तर कहां मानते हैं.

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