नक्सलियों के हाथों शहीद हुये जवानों को श्रद्धान्जलि
हे सैनिक मर
मर जायेगा तो क्या जायेगा ?
वोट बैंक भी तो नहीं है
फिर क्या पता कितने अपने कितने विपक्षियों के होते
हो सकता है कि साम्प्रदायिक होते,
धर्मनिरपेक्षियों के लिये न होते...
इसलिये मर..
आत्मा है अजर, अमर
इस पर विश्वास कर...
मर..
मरेगा तभी तो शहीद का दर्जा पायेगा...
तभी तो वादा कर पायेंगे तेरे बुत लगाने का..
एक पेट्रोल पम्प दिलाने का...
तू मरेगा तभी तो नोबेल शांति का हमें मिलेग..
शांति की जमीन पर ही तो खड़ा होता है दोस्ती का महल..
चल घर से निकल, टहल..
अपनी चेकपोस्ट पर पहुंच,
सीमा पर पहरेदारी कर,
और इंतजार कर,
दुश्मन की गोली का,
नेताओं की बेशर्म ठिठोली का,
घर से निकल,
बाजार चल, यात्रा कर,
और फिर इंतजार कर,
बम के फटने का, एक दुर्घटना घटने का,
कफन का, भाषण का..
नेताओं की कुटिल राजनीति के
राशन का.
मर.
मर जायेगा तो क्या जायेगा ?
वोट बैंक भी तो नहीं है
फिर क्या पता कितने अपने कितने विपक्षियों के होते
हो सकता है कि साम्प्रदायिक होते,
धर्मनिरपेक्षियों के लिये न होते...
इसलिये मर..
आत्मा है अजर, अमर
इस पर विश्वास कर...
मर..
मरेगा तभी तो शहीद का दर्जा पायेगा...
तभी तो वादा कर पायेंगे तेरे बुत लगाने का..
एक पेट्रोल पम्प दिलाने का...
तू मरेगा तभी तो नोबेल शांति का हमें मिलेग..
शांति की जमीन पर ही तो खड़ा होता है दोस्ती का महल..
चल घर से निकल, टहल..
अपनी चेकपोस्ट पर पहुंच,
सीमा पर पहरेदारी कर,
और इंतजार कर,
दुश्मन की गोली का,
नेताओं की बेशर्म ठिठोली का,
घर से निकल,
बाजार चल, यात्रा कर,
और फिर इंतजार कर,
बम के फटने का, एक दुर्घटना घटने का,
कफन का, भाषण का..
नेताओं की कुटिल राजनीति के
राशन का.
मर.
यह लिखी थी गौतम राजरिषी जी के मित्र को श्रद्धान्जलि देने के लिये टिप्पणी के रुप में. लेकिन पता न था कि यह मुझे नक्सलियों के हाथों शहीद होने वाले सिपाहियों के लिये श्रद्धान्जलि देने के काम भी आयेगी..... दुख और क्षोभ के साथ..
Comments
Post a Comment