एलर्जी से उत्पन्न खांसी के लिये एक स्व-अनुभूत प्रयोग

मुझे एलर्जी है प्रोटीन से. अब प्रोटीन से बच पाना तो बहुत मुश्किल है. कोशिश करता हूं कि इससे बचा रह सकूं. कभी-कभी पन्द्रह-बीस दिन में सेट्रीजीन लेता हूं. इसके साथ ही मुझे सुबह को काफी देर तक लगातार छींकें आती हैं और खांसी भी परेशान करती है. शाम को यह दिक्कत बहुत बढ़ जाती थी विशेषत: सोने से पहले ऐसा लगता था कि गले में कोई चीज अटक सी रही हो और खंखारने लगता था. एक दिन मेरी पत्नी ने किसी पुरानी पत्रिका में पढ़ा कि खांसी के लिये तेजपात की दो-तीन पत्तियां दूध में खौलाकर उस दूध को पीने से लाभ मिलता है. चूंकि मैं कई नामचीन चिकित्सकों से सलाह ले चुका था और दवाई भी, तथा कई इसी प्रकार के नुस्खे भी आजमा चुका था लेकिन मुझे कोई लाभ नहीं हुआ अत: मैंने इस बात को भी टाल दिया. खैर, मेरी पत्नी ने उस दिन जिद कर मुझे वह नुस्खा आजमाने को कहा. मैंने उसमें थोड़ा संशोधन किया वह यह कि तेजपात को चाय में डलवा दिया. इसलिये क्योंकि दूध मुझे अब अच्छा नहीं लगता, मुझे बचपन के वे दिन याद आ जाते हैं जब नानी के यहां हंडिया में खौलता हुआ दूध जिसका रंग हल्का गुलाबी हो जाता था, उसे जब गुड़ के साथ पीता था, तो बड़ा ही आनन्द आता था अब तो उस स्वाद की अनुभूति ही रह गयी है. खैर चाय का स्वाद भी थोड़ा सा बदल गया जो थोड़ा अच्छा भी लगा. दो-तीन दिन तक लगातार तीन बार मैंने इस चाय का लुत्फ उठाया और फिर मुझे महसूस हुआ कि मुझे सुबह को छींके आना बन्द हो गयीं और खांसी का जो सिलसिला मुझे रोज रात को परेशान करता था वह खत्म हो गया है.

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