लोग आपको भूल चुके हैं शास्त्री जी.

२८ सितम्बर को सरदार भगत सिंह का जन्म दिन था, हम कृतघ्न भारत वासियों ने किस तरह से मनाया था, सबको याद होगा। आज बापू का जन्म दिन है, गनीमत है कि अभी भी सरकारें और कुछ राजनीतिक पार्टियाँ आपको याद कर लेती हैं। और आप की मूर्तियों पर फूल मालाएं चढ़ा दी जाती हैं। सिपाही भी एक जोरदार सलूट मारते हैं। लेकिन जिस व्यक्ति ने आजादी के बाद देश पर कुर्बानी दी, जो अपने पूरे जीवन में सादगी की मिसाल बना रहा, जिसने पूरे देश को यह दिखाया कि गीता में दिए गए उपदेशों पर चलना कैसे सम्भव है। जिसने पोली-- टिक्स में रहते हुए एक पैसा नहीं बनाया, जो पूरा गांधीवादी और राष्ट्रभक्त था, उसे कैसे साइड-लाइन किया जा सकता है, इसे आज के राजनीतिक व्यापारियों से सीखा जा सकता है। कल के अखबारों में एक छोटी सी लाइन छपी मिल जायेगी कि ' बापू के साथ इस अवसर पर शास्त्री जी को याद किया गया'। दुर्भाग्य है कि इन दोनों महान पुरुषों के जन्म-दिन पर अखबार में 'क्वात्रोची के मुद्दे को दफ़नाने की तैयारी' जैसी हेड-लाइन पढ्ने को मिल रही है, क्या बेजोड़ संगम है। आपको मेरा नमन, यदि आप न होते तो यह आजादी जिसका दुरूपयोग हम पूरी बेशर्मी से कर रहे हैं, न कर पाते। यह आपके ही व्यक्तित्व विशाल का बड़प्पन है कि आपको गालियाँ देकर भी लोग प्रसिद्धि पा जाते हैं। मत-वैभिन्य होना एक अलग बात है और गालियाँ देना एक अलग। नेताजी, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, बिस्मिल, लाहिरी, आजाद, अशफाक न जाने कितने दीवाने इस बलिवेदी पर कुर्बान हो गए, उन्हें आज कौन याद करे। उनके याद करने से कौन सी वोटों की फसल लह-लहा उठेगी। मैं आप सबको फिर से नमन करता हूँ। शास्त्री जी आप ने वह कर दिखाया जो अन्य किसी के बस की बात नहीं था। इस गन्दगी भरे माहौल में आप ही अछूते रह सकते थे, काश आज के नेताओं में आप जैसा व्यक्तित्व किसी का होता। आप को नमन है। ऊपर से हमारे जैसे लोगों को दुर्भाग्य यह कि देश के महान लोग यह भी बताने को तैयार नहीं कि आप की मृत्यु किन हालातों में हुई, इस देश में आप दुबारा मत पैदा होना अन्यथा आप को सूली पर चढ़ा दिया जाएगा।
आज कल बहुत व्यस्त हूँ इसलिए माफ कीजियेगा, लिखा हुआ पढ़ रहा हूँ टिप्पणया नहीं पा रहा ।
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