जल भराव और लोगों की चतुराई.

उत्तर प्रदेश के जिन शहरों में इन दिनों बारिश हुई है उन शहरों की जल निकासी व्यवस्था की पोल खुल चुकी है हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नगर निगमों/पालिकाओं ने नाले साफ कराये, यह अलग बात है कि जमीन पर कितने साफ हुए और कितने कागजों में लेकिन यह सब छोड़िए, हमारे यहाँ के लोग भी बहुत चतुर हैं विकास प्राधिकरणों, परिषदों द्वारा बनवाए गए मकानों में नालियाँ बनाकर दी गई थीं कि बरसात होने पर इन नालिओं के जरिये पानी बह जाएगा लेकिन लोग अधिक चतुर निकले, नाली पर स्लैब डाल दी और आगे कुछ खुली पड़ी जगह पर छोटा सा लॉन बना दिया। बरसात आ गई और अब लोगों के घरों से बहकर पानी सड़क पर भरने लगा तो लोगों को चिन्ता हुई और लोग चिड़चिड़ाने लगे तथा दुनिया भर को कोसने लगे. क्योंकि उनके द्वारा नालियों को बन्द कर स्लैब डाल दिये गये और कहीं लान बना दिये गये, अब पानी के निकलने के स्थान बन्द हो गये. परिणाम वही कि पानी घर से निकल कर सड़क पर और फिर सड़के तालाबों में बदल गयीं और फिर वही पानी घरों में घुसने लगा. लोग नगर निगम और पालिकाओं को पानी उलीच-उलीच कर कोसने लगे. मेरे कहने का मंतव्य यही है कि हर कोई जिम्मेदारी एक दूसरे के ऊपर थोपने में लगा रहता है लेकिन वह खुद कितना जिम्मेदार है, यह नहीं देखता. एक बार फिर वही दोहराऊंगा कि हम लोग "हम सुधरेंगे जग सुधरेगा" का नारा तो बुलन्द कर देते हैं, लेकिन सुधरने की जिम्मेदारी दूसरों पर छोड़ देते हैं. कहीं यह रवैया हमें ले न डूबे.

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