इन दुकानदारों को भी फांसी दे देना चाहिये.
इन दुकानदारों को भी फांसी दे देना चाहिये. पिछले दिनों जैसे ही स्वाइन फ्लू भारत में फैलने लगा, मुझे आशंका होने लगी थी कि इससे बचने के लिये लगाये जाने वाले मास्क की कालाबाजारी न होने लगे. और मेरी आशंका सत्य हुई, स्वाइन फ्लू के बचाव के लिये लगाये जाने वाला मास्क जो आम तौर पर बीस-पच्चीस रुपये में मिलता है, इसकी कीमत डेढ़ से दो सौ रुपये वसूली जाने लगी. एक टेलीविजन चैनल पर इस कालाबाजारी का बाकायदा वीडियो तक दिखाया गया. दर-असल यह कोई नई बात नहीं है, मुनाफाखोरी तो इस देश की नियति बन चुकी है. पैसा लगाओ, चीजों को स्टोर करो, बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करो और एक के दस बनाओ. इस समय जबकि स्वाइन फ्लू से चार मौतें हो चुकी हैं, आठ सौ के आसपास लोग स्वाइन फ्लू से ग्रसित हैं, स्वाइन फ्लू से बचाने वाले मास्क की इस प्रकार की कालाबाजारी. यह कोई अनोखा मामला नहीं है, मुनाफाखोर कहीं बाज नहीं आते. रिलायंस द्वारा जब अपने जीएसएम पर प्रतिदिन दस रुपये का टाक-टाइम दिया गया तो दुकानदारों ने सिम की कालाबाजारी प्रारम्भ कर दी. कुछ दवा कम्पनियों ने सरकार द्वारा कुछ दवाइयों को नियन्त्रित सूची डालने पर उन दवाइयों का फार्मूला ही बदल दिया. इन मुनाफखोरों को भी फांसी पर चढाना चाहिये चाहे फिर वह खुदरा दुकानदार हो, स्टाकिस्ट या फिर कम्पनी का मालिक ही क्यों न हो.
आखिर में "रिदा के कारण अस्सी लोग बीमार हो गये" माननीय मन्त्री जी ने कहा. एक बच्ची अपनी जान से गयी, सांत्वना देने के स्थान पर ऐसे शब्द! यह तो इस तरह का मंतव्य प्रकट करता है जैसे कि रिदा से ही स्वाइन फ्लू फैलना प्रारम्भ हुआ है. एक शोक संतप्त परिवार के प्रति ऐसा रवैया! और जैसा कि रिदा के परिवारीजनों का कहना है कि रिदा को न्यूमोनिया था और उसे एच१एन१ नहीं था तो निश्चित रूप से यह एक गंभीर मामला बनता है. इस समय युद्ध स्तर पर कार्य कर इस वायरस पर काबू पाना चाहिये तथा देश में फैल रहे आतंक को रोकना चाहिये. स्वास्थ्य मन्त्री का इस तरह का बयान निश्चित रूप से आपत्तिजनक है. एक नेता के कारण तो करोड़ों लोग प्रभावित हो जाते हैं. एक व्यक्ति के निर्णय से करोड़ों लोगों पर असर पड़ता है, एक गलत निर्णय का नतीजा आजतक भारत भुगत रहा है. रिदा तथा अन्य असायमिक मौतों पर यही कहना चाहता हूं कि ईश्वर करे किसी को भी असामयिक मौत का सामना न करना पड़े तथा स्वाइन फ्लू से ग्रस्त मरीज शीघ्रातिशीघ्र स्वास्थ्य लाभ कर अपने घर वापस लौटें.
आखिर में "रिदा के कारण अस्सी लोग बीमार हो गये" माननीय मन्त्री जी ने कहा. एक बच्ची अपनी जान से गयी, सांत्वना देने के स्थान पर ऐसे शब्द! यह तो इस तरह का मंतव्य प्रकट करता है जैसे कि रिदा से ही स्वाइन फ्लू फैलना प्रारम्भ हुआ है. एक शोक संतप्त परिवार के प्रति ऐसा रवैया! और जैसा कि रिदा के परिवारीजनों का कहना है कि रिदा को न्यूमोनिया था और उसे एच१एन१ नहीं था तो निश्चित रूप से यह एक गंभीर मामला बनता है. इस समय युद्ध स्तर पर कार्य कर इस वायरस पर काबू पाना चाहिये तथा देश में फैल रहे आतंक को रोकना चाहिये. स्वास्थ्य मन्त्री का इस तरह का बयान निश्चित रूप से आपत्तिजनक है. एक नेता के कारण तो करोड़ों लोग प्रभावित हो जाते हैं. एक व्यक्ति के निर्णय से करोड़ों लोगों पर असर पड़ता है, एक गलत निर्णय का नतीजा आजतक भारत भुगत रहा है. रिदा तथा अन्य असायमिक मौतों पर यही कहना चाहता हूं कि ईश्वर करे किसी को भी असामयिक मौत का सामना न करना पड़े तथा स्वाइन फ्लू से ग्रस्त मरीज शीघ्रातिशीघ्र स्वास्थ्य लाभ कर अपने घर वापस लौटें.
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