इस टोल टैक्स से मुझे बचाओ.
यह टोल टैक्स आखिर क्या बला है?? आप पूरे देश में कहीं भी चले जाइये, टोल टैक्स नाम का यह भूत आपका पीछा छोड़ने वाला नहीं। हर महत्वपूर्ण राजमार्ग पर, हर महत्वपूर्ण पुल पर और अब तो कई नामालूम सड़कों और पुलों पर आपको टोल टैक्स चुकाने के निर्देश लिखे हुये मिल जायेंगे. ग्रामीण इलाकों में आपको इन बैरियर्स पर दो-तीन बदमाश से दिखने वाले शख्स भी बैठे दिखाई देंगे जो किसी भी आकस्मिकता से निपटने के लिये तैयार लगते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में तथा अमूमन सामान्य राजमार्गों पर दबंग शख्स, नेता तथा पुलिस वाले टोल-टैक्स नहीं चुकाते. चूंकि टोल टैक्स कलेक्शन का कार्य भी इसी तरह के लोगों का होता है इसलिये ये कलेक्टर्स ऐसे लोगों से पंगा नहीं लेते. मुझे यह भी बताया गया कि दो तरह की रसीदें छपवाई जाती हैं, जिससे कि टैक्स में भी घपला किया जाता है. मुझे टोल टैक्स देते समय जो तकलीफ होती है, वह इसलिये होती है.
१-कार खरीदते समय कुल कीमत का एक-चौथाई सरकार को अप्रत्यक्ष कर के रूप में दिया जाता है.
२-प्रत्यक्ष कर के रूप में बिक्रीकर या वैट का भुगतान किया जाता है.
३-सरकार को सड़क उपभोग शुल्क के रूप में एक मुश्त रकम का भुगतान किया जाता है.
४-अपनी आमदनी पर भी आयकर दिया जाता है.
५-कार चलाने के लिये पेट्रोल-डीजल खरीदते समय उस पर भी कर चुकता किया जाता है.
६-सरकारें वैट और सैट, इन्कम टैक्स, सेस और न जाने कितने प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष कर एक आम आदमी से वसूल करती है.
७-यह प्रश्न कि क्या सरकारों की जिम्मेदारी और किये जाने वाले कार्यों में आच्छी सड़कों और पुलों का निर्माण शामिल नहीं है.
८-पथकर की मात्रा इतनी अधिक होती है कि कुछ स्थानों पर एक बार जाने-आने में दो लीटर पेट्रोल की कीमत निकल जाती है अर्थात लगभग तीस-पैंतीस किलोमीटर की यात्रा का मूल्य पथकर या टोल टैक्स देने में स्वाहा हो जाता है.
९-इस पथकर के अतिरिक्त एक और शुल्क सड़क पर चुकाना पड़ता है, वह है पार्किंग का. कई स्थानों पर यह शुल्क पच्चीस रुपये से प्रारम्भ होता है.
यह चीजें छोटी जरूर हैं लेकिन किसी भी मितव्ययी व्यक्ति के लिये उक्त चीजें उकताहट और खीज पैदा कर सकती हैं.
१-कार खरीदते समय कुल कीमत का एक-चौथाई सरकार को अप्रत्यक्ष कर के रूप में दिया जाता है.
२-प्रत्यक्ष कर के रूप में बिक्रीकर या वैट का भुगतान किया जाता है.
३-सरकार को सड़क उपभोग शुल्क के रूप में एक मुश्त रकम का भुगतान किया जाता है.
४-अपनी आमदनी पर भी आयकर दिया जाता है.
५-कार चलाने के लिये पेट्रोल-डीजल खरीदते समय उस पर भी कर चुकता किया जाता है.
६-सरकारें वैट और सैट, इन्कम टैक्स, सेस और न जाने कितने प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष कर एक आम आदमी से वसूल करती है.
७-यह प्रश्न कि क्या सरकारों की जिम्मेदारी और किये जाने वाले कार्यों में आच्छी सड़कों और पुलों का निर्माण शामिल नहीं है.
८-पथकर की मात्रा इतनी अधिक होती है कि कुछ स्थानों पर एक बार जाने-आने में दो लीटर पेट्रोल की कीमत निकल जाती है अर्थात लगभग तीस-पैंतीस किलोमीटर की यात्रा का मूल्य पथकर या टोल टैक्स देने में स्वाहा हो जाता है.
९-इस पथकर के अतिरिक्त एक और शुल्क सड़क पर चुकाना पड़ता है, वह है पार्किंग का. कई स्थानों पर यह शुल्क पच्चीस रुपये से प्रारम्भ होता है.
यह चीजें छोटी जरूर हैं लेकिन किसी भी मितव्ययी व्यक्ति के लिये उक्त चीजें उकताहट और खीज पैदा कर सकती हैं.
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