चीन पर हमला कर सकता है भारत - प्रचंड उवाच.
नेपाल के भूतपूर्व राष्ट्रपति और माओवादी नेता पुष्प कमल दहल "प्रचंड" यह दावा कर रहे हैं कि भारत चीन पर हमला कर सकता है और चूँकि वह भारत की नीतिओं को नहीं मान रहे थे इसलिए भारत के दवाब में आकर उन्हें सत्ता से हटा दिया गया। प्रचंड के इस बयान को, भरत वर्मा द्वारा किए गए विश्लेषण, जिसमें उन्होंने यह आशंका प्रकट की थी कि चीन २०१२ तक भारत पर हमला कर सकता है, के जवाब के तौर पर माना जा सकता है। यह कोई ढँकी-छुपी बात नहीं है कि चीन ही इन माओ-वादिओं का पोषक रहा है। नेपाल के माओ-वादिओं को धन, हथियार तथा नैतिक और राजनैतिक समर्थन सभी कुछ चीन ने ही मुहैया कराया था। नेपाल हमेशा से ही भारत का मित्र रहा है और भारत में पहुँचने को चीन के लिए सबसे बड़ी बाधा भी। पुष्प कमल दहल का यह बयान हास्यास्पद तो कतई नहीं है, बल्कि यह हो सकता है कि इसके पीछे भी चीन और प्रचंड की कोई सोची समझी रण-नीति हो. क्या पुष्प-कमल को भारत का इतिहास नहीं पता है या फिर चीन का? क्या प्रचंड के लिए यह जानकारी नहीं है कि पाकिस्तान को चीन हथियार देता है, चीन बांग्ला-देश, श्रीलंका और म्यांमार को भी सैन्य सहायता दे रहा है और इसी बहाने उसने भारत को चारों तरफ से घेर लिया है? बासठ में चीन ने भारत पर हमला किया था न कि भारत ने चीन पर धावा बोला था। यह संकेत कोई अच्छे संकेत नहीं हैं भारत के लिहाज से, इसलिए अच्छा हो यदि भारत के कर्ता-धर्ता अपनी आतंरिक सुरक्षा, गुप्तचर सेवाएं तथा सैन्य तैयारी को प्राथमिकता दें तथा दूरदर्शिता का परिचय दें जिससे कि बासठ को दोहराने से बचाया जा सके।
पिछली पोस्ट के फोटो अब दिखाई देने लगे हैं।
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