ई० वी० एम० को अस्वीकार करने की वकालत की नेताओं ने.

ईवीएम पर आडवाणी समेत कई नेताओं ने प्रश्न चिन्ह लगाये हैं तथा महाराष्ट्र चुनावों में मतपत्रों के प्रयोग की मांग की है. यह एक स्थापित तथ्य है कि कई देशों में इन मशीनों का प्रयोग प्रतिबन्धित है. कई बुद्धिजीवियों ने भी ब्लाग/अखबार के माध्यम से इन मशीनों में हो सकने वाली गड़बड़ियों के बारे में व्यापक रूप से बताया भी है. इसके अतिरिक्त प्रो०साईंनाथ ने भी इन मशीनों के प्रयोग के विरुद्ध मुकदमा भी किया था. परम्परा के अनुरूप कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने उपरोक्त मांग की खिल्ली उड़ाते हुये कहा कि ऐसी बात करना देश को पीछे ले जाना है. मैं एक बार फिर अपनी बात दोहराना चाहता हूं कि इन मशीनों को सिर्फ एक छोटे से बदलाव से अधिक पारदर्शी बनाया जा सकता है. इसमें एक डिस्प्ले यूनिट लगाई जा सकती है जिसमें तमाम प्रत्याशियों के चुनाव चिन्ह, नाम, प्राप्त वोट तथा कुल वोट दिखाई देते रहें. जैसे ही मतदाता अपनी पसन्द के प्रत्याशी के नाम के आगे का बटन दबाये, वैसे ही उस प्रत्याशी के वोटों की संख्या एक वोट से और कुल वोटों की संख्या भी एक वोट से बढ़ जाये तथा यह बराबर डिस्प्ले होता रहे. इससे यह लाभ भी है कि मशीनों को जमा करने का झंझट, आठ-दस दिन निगरानी का बखेड़ा भी दूर हो जायेगा और पूरी पारदर्शिता भी रहेगी. जो दिक्कत होगी वह इतनी सी कि केन्द्रीय बलों की व्यवस्था थोड़ा अधिक करना पड़ेगी जो कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है.

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