वाराणसी में अधिकारी की पिटाई
वाराणसी में एडीएम साहब को एक विधायक ने पीट दिया तो हाय-तौबा मच गई, जैसे उत्तर प्रदेश में एटम बम गिर गया हो. इससे पहले एटम बम गिरा था जब एक पुलिस के साहब के साथ एक नेता जी ने वैसा ही व्यवहार कर दिया जैसे कि आम तौर पर पुलिस वाले आम आदमी के साथ किया करते हैं. एडीएम साहब बिलखते हुए दिखाई दिये, मेरी पूरी हमदर्दी उनके साथ है. लेकिन मेरी बात घूम फिर कर फिर वहीं आ जाती है, कि अपना दर्द दर्द है, दूसरे का दर्द मजा. कभी आप को किसी काम के सिलसिले में तहसील, रजिस्ट्री दफ्तर, सहकारी समितियों के कार्यालय या थाने जाना पड़ा हो तो आपको पता चल जायेगा कि पुलिस-प्रशासन के अधिकारी किस तरह से काम करते हैं. यह मैं कई दफा लिख चुका हूं कि अंग्रेजों द्वारा दिया गया ढांचा उनके अपने सिस्टम को बनाये रखने और भारत की जनता को गुलाम बनाये रखने के लिये बनाया गया था. शायद इस ढांचे को जड़ से न उखाड़ना सबसे बड़ी गलती थी विभाजन के बाद. चूंकि यह ढांचा वही था, इसमें शामिल लोग भी वही थे, अंग्रेजी कल्चर की पैदावार, महारानी के प्रति वफादार और चाटुकार, लिहाजा स्वतन्त्रता के बाद सिर्फ इनकी लायल्टी बदल गयी. जो कार्य अंग्रेजों के लिये महारानी के वफादार हो कर कर रहे थे, वही काम अब स्वतन्त्र भारत के राजा-महाराजाओं अर्थात सत्ता-पक्षियों के लिये करने लगे. सत्ता "एक्स" की, ये एक्स के, सत्ता "वाई" की, ये वाई के. भ्रष्टाचार रूपी मलाई को चाटने के चक्कर में सत्ताधारियों की जी-हजूरी करने लगे. सत्ताधारियों ने अपने सही-गलत कामों को कराने के लिये इनकी पीठ पर हाथ रखना प्रारम्भ कर दिया. नतीजा यह हुआ कि गरिमा, लाज, संवेदना, मानवीय आधार, लोक-मंगल, जन-कल्याण, सब एक ओर. अपना स्वार्थ सब पर भारी. दोनों ही एक-दूसरे से भली भांति परिचित हैं, उनसे भी, उनकी मजबूरियों से भी और उनके धनात्मक बिन्दुओं से भी. पहले कानून को इसलिये तोड़ा-मरोड़ा जाता था कि एक - दूसरे की मदद कर सकें, बाद में इसकी आदत पड़ गयी और अब चाहकर भी कानूनों का पालन कराना स्वार्थ-प्रिय मुलाजिमों में नहीं रहा. दोनों ही एक दूसरे से खूब परिचित हो चुके हैं. इसलिये अब यही कहा जा सकता है कि कम से कम बिंवाई तो फटी. संविधान द्वारा प्रदत्त प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा की सुरक्षा की गारंटी पर रोज पड़ते पुलिस-प्रशासन के डंडे की चोट का कुछ अहसास तो कम से कम प्रशासन को हुआ. लेकिन फिर भी सुधरने की गुंजाईश न के बराबर है.
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