भारत के पूर्व राष्ट्रपति महोदय का अपमान.

भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्रीमान एपीजे अब्दुल कलाम साहब के साथ कान्टीनेन्टल एअरलाइन्स ने सुरक्षा जांच के लिये उनके जूते खुलवाये, उनके पर्स और मोबाइल की जांच भी की। इस घटना को लेकर भारत की मीडिया में भी काफी हो हल्ला हुआ और संसद में भी इस घटना को लेकर हंगामा हुआ. इस घटना को लेकर एक राय में अमेरिकन एअरलाइन्स की निन्दा की गयी और अन्ततोगत्वा एअरलाइन्स ने इस घटना पर माफी मांग ली. लेकिन वह भी महामहिम तक नहीं पहुँची। इस घटना में तीन मुख्य बिन्दु सामने दिखाई देते हैं.

पहला कि यह घटना अप्रैल में हुई थी तो पूर्व राष्ट्रपति के साथ मौजूद अधिकारियों ने इसे अब तक क्यों दबाये रखा? इसे अब तक छुपाये रखने के पीछे क्या मकसद था? क्या भारतीय अधिकारी भारत की जमीन पर ही एक विदेशी को भारत के प्रोटोकाल का पालन कराने में सक्षम नहीं हैं या भारतीय अधिकारियों को ही प्रोटोकाल का ज्ञान नहीं है? या फिर यह एक विदेशी गोरी चमड़ी के आगे आत्म-समर्पण करने का मामला है? इस पर जांच कराई जाना चाहिये कि भारतीय अधिकारियों की भूमिका कैसी रही. और इसके बाद भी एअरलाइन्स पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गयी. कितना लुंज पुंज है एक सौ बीस करोड़ वोटों का देश।

दूसरा बिन्दु यह कि श्रीमान कलाम से सीख हासिल करें कि उन्होंने एअरलाइन्स के नियमों का पालन करते हुये सुरक्षा जांच पर कोई आपत्ति किये बिना अपनी जांच करने दी. जबकि यहां के छुटभैये नेता से लेकर मन्त्री तथा अधिकारी नियमों का पालन करने में अपनी हेठी समझते हैं तथा नियमों को धता बताकर आम आदमी को अपने खास होने का अहसास कराते हैं, जिसकी देखादेखी अन्य लोग भी नियम-कानून को तोड़ने की अग्रसर होते हैं.

तीसरा यह कि सरकारें यह सीख लें कि अमेरिका अपने देश और अपने लोगों की सुरक्षा के लिये किस कदर चिन्तित है और कितने प्रभावी कदम अमेरिका ने अपनी सुरक्षा हेतु उठाये हैं. अमेरिका में गैरकानूनी रूप से प्रवेश करना असंभव है जबकि भारत को तो स्वयं नेताओं ने अनाथालय बना दिया है, एक ऐसा अनाथालय जिसमें कोई व्यवस्थापक तक नहीं है. बाहर से आये हुये अवैध विदेशी नागरिकों को निकालना तो दूर, उन्हें भारतीय नागरिकता देने के लिये एक भूतपूर्व मन्त्री ने आवाज उठाई तथा आई०एम०टी०डी० जैसा अधिनियम बना दिया गया. और तो और एक नेता की नागरिकता विदेशी साबित होने के बाद भी वह सांसद बना रहा.

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