देहरादून में रणवीर की हत्या
कल मैंने देहरादून की बहादुर पुलिस के बारे में लिखा था कि उसने कितनी बहादुरी से एक युवक को मौत के घाट उतारा. उत्तराखंड के मुख्यमन्त्री ने एस०एस०पी० को हटा दिया और बाकी पुलिस वालों को लाइनहाजिर कर दिया. अब जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से लगभग साफ हो चुका है कि उक्त युवक की निर्ममता पूर्वक हत्या की गयी, यह कार्रवाई काफी नहीं है. इन पुलिस वालों को अविलम्ब सेवा निवृत्ति दे इन्हें सलाखों के पीछे डालकर हत्या का मुकदमा चलाना चाहिये. जिसे प्रदेश सरकार सेवानिवृत्त नहीं कर सकती उसके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिये राष्ट्रपति को अनुरोध पत्र लिखना चाहिये. अन्यथा पुलिस की वर्दी में ऐसे अपराधियों के हौसले यूंही बुलन्द होते रहेंगे. लाइन-हाजिर करना कोई सजा नहीं है, न ही ट्रांसफर कोई सजा है, इनके साथ वही व्यवहार किया जाना चाहिये जो आम अपराधी के साथ पुलिस किया करती है. चूंकि इन अपराधियों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती और यह अपराधी अपने रसूख और पैसे तथा संबंधों के बल पर तथा पुलिस और प्रशासन के अपने लोगों को बचाने की हठधर्मिता के चलते बच जाते हैं और एक अन्य अपराध करने के लिये तैयार हो जाते हैं. इसके अतिरिक्त मानवाधिकार आयोग को सीधे ही ऐसे अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करने का अधिकार दिया जाना चाहिये क्योंकि कई बार मानवाधिकार आयोग द्वारा दिये गये निर्देशों पर अमल नहीं किया जाता.
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