समलैंगिकता और गिरगिट






























समलैंगिकता के चर्चे चारों तरफ छाये हुये हैं, ऐसे में कल मुझे अकस्मात ही गिरगिट की प्रणय लीला देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. जिसमें कुछ दृश्य कैमरे पर कैद करने में सफलता मिल पायी. आप भी देखिये. पहले पहल एक गिरगिट आता है फिर वह इधर-उधर देखता है. कुछ देर तक वह झाडियों में घूमता है. फिर दूसरा गिरगिट जाता है. अब एक गिरगिट अपने गले के नीचे थैली फुलाता है, इस थैली का रंग भी बदलने लगता है. लगता है कि यह अपने साथी को आकर्षित करने के लिये ऐसा कर रहा है. अब दूसरा गिरगिट भी अपनी थैली को फुलाता है और दोनों गिरगिट एक दूसरे के नजदीक जाते हैं. इसके बाद कुछ सेकेन्डों के लिये उनकी प्रणय लीला चलती है और फिर दोनों गिरगिट अलग हो जाते हैं. प्रकृति में हर चीज अपने स्थान पर फिट है और हर एक जीव को कोई कोई खासियत अता की है. गिरगिट की तरह रंग बदल लेना मुहावरे को हम लोग निन्दात्मक रूप में प्रयोग करते हैं लेकिन यह रंग बदलने की विशेषता ही गिरगिट के लिये वरदान है. कभी रंग बदलते गिरगिट को देखिये कितना अद्भुत लगता है. (नेताओं को मत देखियेगा).

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