ई० वी० एम० में बदलाव होना चाहिए.
पिछले दिनों आदरणीय सुरेश चिपलूनकर जी ने ईवी मशीनों के बारे में प्रोफेसर साईनाथ द्वारा इन मशीनों के उपयोग के विरुद्ध सन २००४ में दाखिल की गई याचिका के बारे में तथा कई विद्वान व्यक्तियों द्वारा इन मशीनों में सम्भावित गड़बड़ियों की आशंका के बारे में बताया था. कई देशों द्वारा इन मशीनों को खारिज किये जाने के बारे में और इन मशीनों में चिप द्वारा कन्ट्रोल किये जाने की सम्भावना के बारे में भी बताया. सबसे बड़ी बात यह कि मतदाता जो वोट डाल रहा है वह उस उम्मीदवार के खाते में जमा हुआ या नहीं, इन मशीनों में मतदाता की आंखों के सामने यह सुनिश्चित नहीं हो सकता कि उसका वोट कहां गया. इसलिये मेरी छोटा सा सुझाव यह है कि इन मशीनों में थोड़ा सा और सुधार किया जाये और वह यह कि इन मशीनों में एक गणक भी हो जो वोट डालने के समय ही कुल वोटों की संख्या, प्रत्याशी-वार वोटों की संख्या लगातार डिस्प्ले होती रहे. इससे फायदा यह होगा कि मतगणना के लिये लगने वाला समय बचेगा तथा लोगों को यह सुनिश्चित होगा कि उनके वोट के साथ किसी भी प्रकार की हेराफेरी नहीं हो सकती.अलबत्ता दलों को यह कष्टदायक लग सकता है तथा उनकी प्रमुख आपत्ति यह होगी कि कई चरणों में चुनाव होने पर एक चरण के चुनाव परिणाम अन्य चरणों के परिणामों पर असर डाल सकते हैं. इस सम्बन्ध में मेरा पहला निवेदन है कि या तो ये दल यहां के आम आदमी को अक्ल से कोरा समझते हैं कि वह एक चरण के परिणामों से प्रभावित हो सकता है और वास्तव में ऐसा ही माना जाता है यदि ऐसा न होता तो एक्जिटपोल इत्यादि पर रोक न लगाई जाती. बहरहाल इस स्थिति से निपटने के चुनाव एक ही चरण में कराना एक अच्छा विकल्प रहेगा.
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