सूरत में बलात्कार के अभियुक्तों की पिटाई
सूरत में भीड़ ने गैंगरेप के अभियुक्तों की पिटाई कर दी. निसंदेह इन भेड़ियों ने जो घृणित कार्य किया है उसकी अधिकतम सजा इन्हें जल्द से जल्द मिलना ही चाहिये. अभियुक्तों की पिटाई को क़ानून की दृष्टि से जायज नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन आखिर क्या कारण है कि जनता कानून हाथ में लेने को मजबूर हो जाती है. हो सकता है कि सरकारों और उनके नुमाइन्दों को यह न दिखाई देता हो लेकिन आम आदमी को इसकी वजह मालूम है. वह है पुलिस द्वारा कायदे से और त्वरित कार्रवाई न करना तथा कानूनी दांव-पेंचों के चलते अभियुक्तों का छूट जाना या फिर सजा में अत्यधिक देरी. यदि पुलिस अपना काम ठीक से नहीं करती, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और फोरेंसिक विज्ञानं का सहारा न लेकर ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं करती या फिर अभियुक्तों से सांठ-गाँठ कर लेती है तो इसके लिए आमजन क्यों सजा भुगते। यदि जजों की संख्या कम है तो इसके लिए आमजन तो उत्तरदाई नहीं है। वही लोग कानून हाथ में लेते हैं जो यह जानते हैं कि क़ानून उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता या फिर वह लोग जो यह मानते हैं कि कानूनी प्रक्रिया में गुनाहगार बच जाते हैं। सरकारों को अभी चेत जाना चाहिये अन्यथा ऐसा न हो कहीं बहुत देर हो जाये.
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