लखीमपुर खीरी में पुलिस की बर्बरता

विगत दिनों लखीमपुर खीरी में दो पुलिस वालों ने एक गर्भवती महिला को मात्र इसलिये ट्रेन से धक्का देकर नीचे फेंक दिया कि उसका पति उन पुलिस वालों को सौ रुपये नहीं दे पाया. महिला की मृत्यु हो गयी और उसकी एकबालिका लगभग अनाथ हो गयी. पुलिस वाले महिला के पति से सौ रुपये इसलिये मांग रहे थे कि उसने साइकिल ट्रेन में रख ली थी. बाद में हर गुनहगार की तरह अपनी बेगुनाही के लिये एक झूठा बहाना गढ़ते नजर आये. यदि महिला के पति ने साइकिल रख ली थी तो इसके लिये उनके पास वैध कानूनी रास्ता था, वह टी सी को बुलाकर कानूनी कार्रवाई कर सकते थे. लेकिन यह कोई ढ़ंकी छुपी बात नहीं है कि अधिकतर लूट-पाट के मामलों में रेलवे की सुरक्षा के लिये लगाये गये पुलिस के जवान ही आरोपित पाये जाते हैं, अवैध वसूली और ट्रेन की बोगियों बेचने के किस्से तो रोज की ही बात बन चुके हैं. इस मामले में भी लीपा-पोती करने की कोशिश की गई और भा०द०स०की धारा ३०४ अर्थात गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया. जबकि यह मामला अवैध वसूली का था, कर्तव्य निभाते हुये जानबूझ कर नीचे फेंक कर हत्या का अर्थात धारा ३०२ का था. फिर भी सुश्री मायावती ने सख्त रवैया अपनाते हुये इन सिपाहियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया, जो निश्चित रूप से प्रशंसनीय है. इसके बादइन अपराधियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिये तथा यह कोशिश की जानी चाहिये कि पुलिस वालों की अपराधों में संलिप्तता पाये जाने पर निलम्बन या लाइन हाजिर करने के स्थान पर सेवानिवृत्ति जैसी कार्रवाई की जाये तथा उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सलाखों के पीछे भेजा जाये तभी व्यवस्था में कुछ सुधार हो सकेगा.

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