एक दरोगा की दादागिरी

बात कल दोपहर की है, दो बजे का समय रहा होगा जब सूर्य देव अपनी प्रचण्ड किरणों से धरती को तपा रहे थे। सड़क के किनारे एक पार्क है, जिसके चारों तरफ फुटपाथ है। इस फुटपाथ के किनारे पेड़ों की छाया रहती है जिसमें लोग खड़े हो जाते हैं और रिक्शे वाले भी सुस्ता लेते हैं। ऐसे ही कल एक रिक्शा खड़ा था जिस पर रिक्शे वाला बैठा हुआ था। पीछे से एक फोर्ड फिएस्टा आती है, जिसकी गति काफी तेज थी, लगा कि रिक्शे वाला गया। लेकिन पास आते-आते हल्की हुई, और फिर उसने पीछे से रिक्शे को ठोक दिया, रिक्शा आगे की ओर उछला, रिक्शे वाला नीचे। उसने पीछे देखा तो उसकी हिम्मत जवाब दे गयी और आस पास में खड़े बाकी लोगों की भी। क्योंकि इस नयी-नकोर कार के अन्दर एक तीन-सितारा धारी इन्स्पेक्टर मौजूद था, उतरने के बाद उसने रिक्शे वाले को घूरा, उसकी मां-बहन के साथ नाता जोड़ा। सड़क पर रिक्शा खड़े करने के आरोप में अन्दर कराने की धमकी दी। बाद में इत्मीनान से अपनी गाड़ी छाया में लगाई और जय हिन्द।

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