मणिपुर में हत्याएं और मीडिया तथा नेता

मणिपुर में हिन्दीभाषी नौ मजदूरों की हत्याएं कर दी गयीं। हमारी धर्म-निरपेक्ष मीडिया के पास उनके बारे में दिखाने के लिए एक-दो मिनट का समय भी नहीं है, जबकि पिंक पैंटी मिशन पर घंटों बरबाद कर दिए। भगवा को अपमानित करने का कोई मौका न छोड़ने वाली मीडिया अब इस पर क्यों मुहं बाँध कर बैठी हुई है, क्या जाति-प्रदेश और धर्म के आधार पर उत्तर-पूर्वी प्रदेशों में हिंसा का नंगा नाच जायज है। वैलेंटाइन दिवस पर पक्ष-विपक्ष पर घंटों बरबाद करने वाली मीडिया के पास इन निरीहों के लिए कुछ मिनटों का भी समय नहीं है। और यही हाल है हमारे देश के तथा-कथित धर्म-निरपेक्ष बुद्धिजीवी, समाजसेवी और नेताओं का, मानव-अधिकार की वकालत करने वाले लोगों का। यह लोग वोट बैंक का हिस्सा नहीं हैं इसलिए सब चुप हैं, गांधी जी के बंदरों की तरह।

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