चुनाव के बाद होने वाला गठबंधन क्या उचित है?

आम चुनाव का अन्तिम दौर तेरह मई को है, मतदान का प्रतिशत लगभग पचास के आसपास रहने की आशा है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि एक बार फिर खंडित जनादेश सामने आएगा। और अब चुनाव के बाद सत्ता के दलाल फिर स्थाई सरकार देने के नाम पर जोड़-तोड़ की राजनीति में घुस जायेंगे और एक बार फिर भारत की जनता को मूर्ख बनायेंगे। क्या यह सच नहीं है कि चुनाव के बाद होने वाले गठबंधन न होकर "ठगबंधन" होते हैं? तथा क्या यह उचित नहीं होगा यदि चुनाव से पहले बने गठबंधनों में किसी के द्वारा बहुमत प्राप्त न कर पाने की स्थिति में पांच साल तक राष्ट्रपति शासन लागू रहे??? इससे खरीद-फरोख्त की राजनीति पूरी तरह ख़त्म हो जायेगी। क्या ख्याल है आपका???

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