सरकार की सहमति से बिकता जहर

सीएसई ने एक बार फिर अपनी रिपोर्ट से तहलका मचा दिया है. इसकी रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि भारतीय बाजार में बिकने वाले ब्रांडेड खाद्य तेलों में ट्रांस फैट (जोकि मात्रा बढ़ने पर हृदय के लिये अत्यन्त घातक बन जाता है) अन्य देशों में अधिकतम स्वीकृत मात्रा से पांच से बारह गुना अधिक मात्रा में मौजूद है. क्या इन चीजों का पता भारत सरकार को नहीं है? इसका उत्तर है, बिल्कुल है, स्वास्थ्य मन्त्री इसे स्वीकारते हैं लेकिन यह कुतर्क देते हैं कि इसकी बिक्री को एकदम प्रतिबन्धित नहीं किया जा सकता, यदि प्रतिबन्धित करेंगे तो जो भी ब्रांड मानकों के आसपास भी हैं उनकी बिक्री में और दामों में भारी उछाल आ जायेगा और भी अन्य कठिनाईयां उत्पन्न हो जायेंगी. लिहाजा भारतीय इन खाद्य तेलों के शिकार होते हैं तो होते रहें, मरते हैं तो मरते रहें. मैंने पहले भी प्रधानमन्त्री महोदय की सर्जरी को लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं की दयनीय दशा पर लिखा है. जिस देश में स्वास्थ्य सेवाओं की इतनी दयनीय हालत हो, वहां सरकार सबकुछ जानने के बावजूद मजबूरी का रोना रोते हुये तेल निर्माता कम्पनियों को पत्र लिख कर सीना चौड़ा कर रही हो उस देश को कोई नहीं बचा सकता. सबकुछ जानने के बाद भी यदि यह जहर बाजार में बिक रहा है तो यह एक आपराधिक कृत्य है जिसकी जिम्मेदार भारत सरकार है.

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