स्वात में पत्रकार की हत्या, कानपुर में युवक की हत्या, आईएस ने पुलिसवाले को हड़काया , सी-बी-आई को मिली एक सफलता
पिछ्ले लेख में मैंने लिखा था कि स्वात घाटी में शरिया कानून लागू हो गये हैं और भारत के लिये यह खतरे की घन्टी है. भारत की सभी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों (हालांकि मेरे नजरिये से धर्मनिरपेक्ष होना किसी के लिये भी ठीक नहीं है, इस पर चर्चा फिर किसी दिन होगी) को मुस्लिम वोटों को पाने के लिये कट्टरपंथी मुस्लिम तत्वों को बढ़ावा देना तत्काल बन्द करना चाहिये अन्यथा जो आग आज स्वात घाटी को जला रही है वही आग कल भारत को जलाना प्रारम्भ कर देगी. अल-कायदा, तालिबान, हूजी, लश्कर समेत तमाम आतंकवादी गुटों का अगला निशाना भारत है, यह किसी से ढका-छुपा नहीं है. स्वात घाटी में शरिया कानून लागू किये जाने के बाद अब तालिबानों ने वहां से पाकिस्तान की फौज को हटाने का भी फरमान जारी कर दिया है. यह दिखाता है कि कट्टरपंथी इस्लामी तत्व बहुमत में आने के बाद किस तरह का व्यवहार करते हैं. अन्य धर्मों के लिये तो उनके पास किसी प्रकार की सहिष्णुता की भावना की उम्मीद क्यों कर की जा सकती है जब वह स्वयं इस्लाम के अनुयायियों के प्रति भी मानवीय व्यवहार नहीं अपनाते.
मूसा खान नामक पत्रकार की हत्या और स्वात में इन तालिबानियों के आदेशों की नाफरमानी करने वाले तमाम लोगों की निर्मम और जघन्य हत्यायें इनके इरादें स्वत: बयान करती हैं. भारत के ऊपर कितना गंभीर खतरा मंडरा रहा है यह इसी से पता लग रहा है कि भारत के नौसेना प्रमुख भी यह आशंका जता चुके हैं कि भारत में परमाणु हथियार भी आ सकते हैं, और पता नहीं कितने आ भी चुके हों. भारत के ऊपर जैविक-रासायनिक-परमाणु हमले की आशंका सरकार द्वारा भी प्रकट की जा चुकी है. लेकिन राजनीतिक दलों का जो रवैया रहा है वह बहुत ही निराशाजनक है, भारत के तमाम दल सिर्फ और सिर्फ सत्ता प्राप्ति की खातिर सिर्फ इसलिये कुछ मुस्लिम कट्टरपंथी तत्वों को बढ़ावा देने से बाज नहीं आते कि मुस्लिम कई जगह निर्णायक भूमिका में हैं. अभी भी समय है कि इस सब को सुधारा जा सकता है यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चलकर भारत के लिये बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो जायेगी.
शिक्षा ग्रहण करें - गद्दी का रास्ता मुस्लिम वोटों से जाता है, इसलिये कुछ करो न करो मुस्लिमों के लिये घोषणायें जरूर करते रहो.
कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल के अटैची ने पुलिस के सिपाही को इसलिये प्रताडित किया कि उसने इन साहब को कार चलाते समय मोबाइल से बात करने पर चालान कर दिया था, लगभग वही कहानी फिर से पटना में दोहराई गयी जहां एक महिला आईएएस की गाड़ी (जो नो पार्किंग में खड़ी थी) का चालान करने की कोशिश करने पर एक सहायक सब-इन्स्पेक्टर को खरी-खोटी सुननी पड़ी. पुलिस अधीक्षक महोदय कह रहे थे कि जाम लग रहा था जिसे खत्म करा दिया गया और मामला खत्म हो गया. पहला सवाल क्या एसपी साहब किसी आम आदमी के मामले में ऐसा करते? दूसरा जो आईएएस अधिकारी जो स्वयं कानून का पालन नहीं कर रही है, वो दूसरों से क्या पालन करायेगी और वह खुद अपनी ड्यूटी कैसे निभाती होगी? तीसरा अब वह सहायक सब इन्स्पेक्टर क्या आगे कभी कानून का पालन करने की जहमत उठायेगा.
शिक्षा ग्रहण करें - कानून सिर्फ उसके लिये है जो उसे तोड़ने में समर्थ नहीं है, इसलिये यदि कानून तोड़ना चाहते हैं तो खास बनें.
एक सफलता सीबीआई को और मिली-सुखराम के मामले में जिन्होंने टेलीफोन घोटाले में नाम आने पर यह कहा था कि उनके घर पर कोई आदमी यह रुपये डाल गया. अच्छा होता कि वह आदमी भारत के सौ करोड़ से अधिक लोगों के घर रुपये फेंक जाता. प्रश्न यह है कि बारह साल लग गये इस मामले को निपटने में, अदालतें अभी और भी हैं. अपील भी होगी ही इस निर्णय के विरुद्ध, जो पता नहीं कितने वर्षों में निपट पायेगी. इसलिये हर स्तर पर मुकदमों के निपटाने की अधिकतम समय सीमा २ वर्ष होना चाहिये अन्यथा Justice Delayed is Justice Denied की उक्ति ही सत्य साबित होती रहेगी.
पप्पू यादव, बिहार के आपराधिक इतिहास वाले सांसद तथा उम्रकैद की सजा पाये सांसद, को पटना उच्च न्यायालय से जमानत मिल गयी. सांसद महोदय की सदस्यता समाप्त होना चाहिये थी जो कि अफसोस है कि अभी तक नहीं हो पायी. कई अनेक अपराधी इस बार भी चुनाव लड़ेंगे और फिर माननीय बन जायेंगे. चुने जाने पर जनता द्वारा माफ कर देने का नाटक करने वाले यह अपराधी जनता का क्या भला करते हैं, सब जानते हैं. चुनाव नामक त्रिवेणी में डुबकी मारने के बाद इन के सभी दाग साफ हो जाते हैं. राजनीतिक दल जनता के सिर पर इसका दोष मढ़ देते हैं, एक-दूसरे को गाली देते हैं, लेकिन अपराधियों से पल्ला कोई भी नहीं झाड़ना चाहता. तेरी कमीज ज्यादा मैली है, इसलिये मेरी साफ है यह फलसफा है इनका.
शिक्षा ग्रहण करें - आप अपराधी हैं और चाहते हैं कि दरोगा आपको सैल्यूट मारे, एसपी आपसे हाथ मिलाये, कानून आपका बाल न बांका कर सके तो चुनाव लड़ें और माननीय बन जायें.
कानपुर में पुलिसवाले एक युवक को पूछताछ के लिये ले गये, अगले दिन उसकी लाश मिली. लोगों में गुस्सा भड़का, मारपीट की गयी. बड़े अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं. कार्रवाई क्या होगी-एक दो पुलिसवाले निलम्बित कर दिये जायेंगे, दरोगा और एस०ओ० लाइनहाजिर कर दिया जायेगा. बाद में इस पर लीपा-पोती कर दी जायेगी. दरोगा और बाकी पुलिस वाले फिर किसी अन्य थाने में जाकर फिर किसी गजराज को निशाना बनायेंगे.
शिक्षा ग्रहण करें - यदि सरकारी नौकरी में रहकर आपराधिक कृत्य करना हो तो पुलिस में भर्ती हो जायें.
मूसा खान नामक पत्रकार की हत्या और स्वात में इन तालिबानियों के आदेशों की नाफरमानी करने वाले तमाम लोगों की निर्मम और जघन्य हत्यायें इनके इरादें स्वत: बयान करती हैं. भारत के ऊपर कितना गंभीर खतरा मंडरा रहा है यह इसी से पता लग रहा है कि भारत के नौसेना प्रमुख भी यह आशंका जता चुके हैं कि भारत में परमाणु हथियार भी आ सकते हैं, और पता नहीं कितने आ भी चुके हों. भारत के ऊपर जैविक-रासायनिक-परमाणु हमले की आशंका सरकार द्वारा भी प्रकट की जा चुकी है. लेकिन राजनीतिक दलों का जो रवैया रहा है वह बहुत ही निराशाजनक है, भारत के तमाम दल सिर्फ और सिर्फ सत्ता प्राप्ति की खातिर सिर्फ इसलिये कुछ मुस्लिम कट्टरपंथी तत्वों को बढ़ावा देने से बाज नहीं आते कि मुस्लिम कई जगह निर्णायक भूमिका में हैं. अभी भी समय है कि इस सब को सुधारा जा सकता है यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चलकर भारत के लिये बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो जायेगी.
शिक्षा ग्रहण करें - गद्दी का रास्ता मुस्लिम वोटों से जाता है, इसलिये कुछ करो न करो मुस्लिमों के लिये घोषणायें जरूर करते रहो.
कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल के अटैची ने पुलिस के सिपाही को इसलिये प्रताडित किया कि उसने इन साहब को कार चलाते समय मोबाइल से बात करने पर चालान कर दिया था, लगभग वही कहानी फिर से पटना में दोहराई गयी जहां एक महिला आईएएस की गाड़ी (जो नो पार्किंग में खड़ी थी) का चालान करने की कोशिश करने पर एक सहायक सब-इन्स्पेक्टर को खरी-खोटी सुननी पड़ी. पुलिस अधीक्षक महोदय कह रहे थे कि जाम लग रहा था जिसे खत्म करा दिया गया और मामला खत्म हो गया. पहला सवाल क्या एसपी साहब किसी आम आदमी के मामले में ऐसा करते? दूसरा जो आईएएस अधिकारी जो स्वयं कानून का पालन नहीं कर रही है, वो दूसरों से क्या पालन करायेगी और वह खुद अपनी ड्यूटी कैसे निभाती होगी? तीसरा अब वह सहायक सब इन्स्पेक्टर क्या आगे कभी कानून का पालन करने की जहमत उठायेगा.
शिक्षा ग्रहण करें - कानून सिर्फ उसके लिये है जो उसे तोड़ने में समर्थ नहीं है, इसलिये यदि कानून तोड़ना चाहते हैं तो खास बनें.
एक सफलता सीबीआई को और मिली-सुखराम के मामले में जिन्होंने टेलीफोन घोटाले में नाम आने पर यह कहा था कि उनके घर पर कोई आदमी यह रुपये डाल गया. अच्छा होता कि वह आदमी भारत के सौ करोड़ से अधिक लोगों के घर रुपये फेंक जाता. प्रश्न यह है कि बारह साल लग गये इस मामले को निपटने में, अदालतें अभी और भी हैं. अपील भी होगी ही इस निर्णय के विरुद्ध, जो पता नहीं कितने वर्षों में निपट पायेगी. इसलिये हर स्तर पर मुकदमों के निपटाने की अधिकतम समय सीमा २ वर्ष होना चाहिये अन्यथा Justice Delayed is Justice Denied की उक्ति ही सत्य साबित होती रहेगी.
पप्पू यादव, बिहार के आपराधिक इतिहास वाले सांसद तथा उम्रकैद की सजा पाये सांसद, को पटना उच्च न्यायालय से जमानत मिल गयी. सांसद महोदय की सदस्यता समाप्त होना चाहिये थी जो कि अफसोस है कि अभी तक नहीं हो पायी. कई अनेक अपराधी इस बार भी चुनाव लड़ेंगे और फिर माननीय बन जायेंगे. चुने जाने पर जनता द्वारा माफ कर देने का नाटक करने वाले यह अपराधी जनता का क्या भला करते हैं, सब जानते हैं. चुनाव नामक त्रिवेणी में डुबकी मारने के बाद इन के सभी दाग साफ हो जाते हैं. राजनीतिक दल जनता के सिर पर इसका दोष मढ़ देते हैं, एक-दूसरे को गाली देते हैं, लेकिन अपराधियों से पल्ला कोई भी नहीं झाड़ना चाहता. तेरी कमीज ज्यादा मैली है, इसलिये मेरी साफ है यह फलसफा है इनका.
शिक्षा ग्रहण करें - आप अपराधी हैं और चाहते हैं कि दरोगा आपको सैल्यूट मारे, एसपी आपसे हाथ मिलाये, कानून आपका बाल न बांका कर सके तो चुनाव लड़ें और माननीय बन जायें.
कानपुर में पुलिसवाले एक युवक को पूछताछ के लिये ले गये, अगले दिन उसकी लाश मिली. लोगों में गुस्सा भड़का, मारपीट की गयी. बड़े अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं. कार्रवाई क्या होगी-एक दो पुलिसवाले निलम्बित कर दिये जायेंगे, दरोगा और एस०ओ० लाइनहाजिर कर दिया जायेगा. बाद में इस पर लीपा-पोती कर दी जायेगी. दरोगा और बाकी पुलिस वाले फिर किसी अन्य थाने में जाकर फिर किसी गजराज को निशाना बनायेंगे.
शिक्षा ग्रहण करें - यदि सरकारी नौकरी में रहकर आपराधिक कृत्य करना हो तो पुलिस में भर्ती हो जायें.
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