एक बेवकूफी से भरा काम किया कुछ लड़कियों ने

अभी एक बेवकूफी से भरा काम किया कुछ लड़कियों ने, जिन्होंने एक पार्टी के अध्यक्ष को अंडरगारमेन्ट क्या भेजे, खबरिया चैनलों की तो लाटरी लग गयी. ऐसे शब्द और ऐसे ग्राफिक्स दिखा रहे थे जिन्हें लिखते हुये मुझे शर्म आ रही है. पता नहीं क्या मानसिक स्तर है इन लड़कियों का और क्या मानसिक स्तर है उन खबरिया चैनलों के सम्पादकों का जिन्होंने इस तुच्छ घटना को खूब जोर शोर से उछाला. वात्स्यायन भी यहीं हुये थे, जिनके लिखा हुआ ग्रन्थ आज भी अतुल्य है, लेकिन उसी देश में खुलेपन के नाम पर बेहयाई का ऐसा प्रदर्शन! और हो भी क्यों न, कुछ ही वर्ष पहले जब एक स्वनामधन्य निर्माता-निर्देशक और धर्मनिरपेक्षता तथा मानवाधिकारों के पैरोकार ने यह कहने में कोई हिचक नहीं दिखाई कि अगर यह लड़की मेरी ...... ......................................................................! क्या से क्या हो गया है भारत के लोगों का मानसिक स्तर.

घुघूती जी का धन्यवाद कि उन्होंने अपनी टिप्पणी के जरिये मेरी एक बड़ी गलती को सुधार दिया - मैंने और शब्द अनजाने में प्रयोग किया था जो मुझे नहीं करना चाहिये था। मैंने लेख की अपनी गलती सुधार ली है और यह सबक भी लिया है कि आगे से पोस्ट पब्लिश करने से पहले कम से कम दो बार पढूंगा। (यह मैं अपने कमेन्ट देने के बाद {घुघूती जी के कमेन्ट के बाद लिख रहा हूं}) एक बार पुन: उन्हें धन्यवाद.

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