पहेली का हल
दरअसल यह कोई ऐसी-वैसी पहेली नहीं है.यह पहेली वैदिक भारतीय वर्ण व्यवस्था से संबंधित है और इसका उत्तर उन सभी व्यक्तियों के मुंह पर एक तमाचा है जो भारतीय समाज में जातीयता का जहर घोल रहे हैं, चाहे फिर वह किसी भी जाति से संबंधित क्यों न हों. इन सभी व्यक्तियों के बीच यह समानता है कि यह सभी उस भारतीय वैदिक वर्ण व्यवस्था को सामने लाते हैं जो चक्रीय थी, यह सब प्रदर्शित करते हैं कि प्राचीन वैदिक युग में व्यक्ति किसी विशेष जाति से बंधा नहीं होता था बल्कि कर्म से वर्ण तय होता था और एक वर्ण से दूसरे वर्ण में वैवाहिक संबंध होते थे. इस पहेली का उत्तर है कि भारत में वैदिक युग में लागू वर्ण व्यवस्था चक्रीय थी न कि अपने स्थान पर अडिग, अविचल. दुर्भावना तथा पूर्वाग्रह से ग्रसित कुछ लोग अपने कुतर्कों के माध्यम से भारतीय वैदिक ग्रंथों के बारे में बिना पढे़ कुछ भी बोलते रहते हैं. ब्राह्मण अपने लिये सर्वोच्च मानते हुये अपने ढ़ंग से व्याख्या करते हैं तो अनुसूचित जातियों के लोग अपने ढ़ंग से अपने समर्थन के लिये तथ्य खोज लाते हैं. इसमें कोई दोराय नहीं कि अनुसूचित जातियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और आज भी किया जा रहा है, लेकिन यह भी सच है कि वैदिक युग में जाति आधारित व्यवस्था नहीं थी बल्कि वर्ण आधारित व्यवस्था थी, जोकि चक्रीय थी. चूंकि इस बात को न तो ब्राह्मण ही मानने को तैयार हैं और न ही अनुसूचित जातियों के व्यक्ति. लेकिन नीचे दिये गये उदाहरण इस सत्य को सप्रमाण प्रस्तुत करते हैं कि यह व्यवस्था वैदिक काल में लागू थी और उस समय इन सभी वर्णों के मध्य वैवाहिक सम्बन्ध भी होते थे. वैदिक साहित्य इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है.
बाल्मीक - शूद्र थे ब्राह्मणत्व को प्राप्त,
ऐतरेय ब्राह्मण के रचयिता महर्षि आत्रेय शूद्र परिवार में जन्मे थे.
महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास केवट महिला सत्यवती के पुत्र थे.
सत्यकाम - ज्वाला नामक शूद्र कन्या के पुत्र थे.
महाराज जनश्रुति भी शूद्र थे.
महर्षि पराशर चाण्डाली पुत्र थे.
जनक ब्राह्मणत्व को प्राप्त हुये.
महर्षि विश्वामित्र क्षत्रिय से ब्राह्मणत्व को प्राप्त.
श्रृंगी, कौशिक, गौतम, वशिष्ठ, अगस्त्य, माण्डव्य, मातंग, भारद्वाज आदि अब्राह्मण होते हुये भी कर्म के आधार पर ब्राह्मणत्व को प्राप्त हुये.
महाविद्वान रैक्व स्वयं शूद्र थे.
पैरभी और भालानन्द क्षत्रिय से शूद्रत्व को प्राप्त हुये.
तैत्रिरीय संहिता के अनुसार क्षत्रिय राजा रथानिधि ने अपनी कन्या का विवाह सकाश्व ब्राह्मण से किया था.
बाजसनेई संहिता के अनुसार वृहस्पति ने अपनी पुत्री रोमसा का विवाह क्षत्रिय राजा सवनेय भवगण्य से किया था.
क्षत्रिय राजा ययाति ने शुक्राचार्य की कन्या देवयानी से विवाह किया था.
महर्षि अंगिरा की पुत्री शरवनी का विवाह राजा असंग से हुआ था.
कसीवान (जो एक दासीपुत्र थे) ने वृषया से विवाह किया था.
अर्जुन का विवाह उलूमी नामक नाग जाति की कन्या से हुआ तथा भीम का विवाह हिडिम्बा नामक कन्या से हुआ था.
सुमित्रा (महाराज दशरथ की पत्नी), ब्राह्मण पिता और कर्णी (अनार्य जाति) माता की पुत्री थीं.
ऐलुष ऋग्वेद के दसवें मंडल के रचयिता एक शूद्र थे.
हमारा दुर्भाग्य यह रहा है कि हर कोई अपने स्वार्थों की पूर्ति हेतु समाज को अधिक से अधिक बांटकर अधिक से अधिक वोट पाकर सत्ता सुख हासिल करना चाहता है. किसी की भी इच्छा नहीं है भारत को एक सही राह पर लाने की. समाज को जितना तोड़ पायेंगे सत्ता प्राप्त करने के मौके उतने ही अधिक हो जायेंगे, इस सिद्धान्त पर काम करते हुये समाज में बिखराव लाया जा रहा है. ऊपर से तथाकथित बुद्धिजीवी अपने मतलब की चीजें खोजकर अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं, उन्हें भी समाज के व्यापक और दीर्घकालीन हितों से कोई लेना देना नहीं है.
बताइये अब आप क्या कहेंगे???????
बाल्मीक - शूद्र थे ब्राह्मणत्व को प्राप्त,
ऐतरेय ब्राह्मण के रचयिता महर्षि आत्रेय शूद्र परिवार में जन्मे थे.
महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास केवट महिला सत्यवती के पुत्र थे.
सत्यकाम - ज्वाला नामक शूद्र कन्या के पुत्र थे.
महाराज जनश्रुति भी शूद्र थे.
महर्षि पराशर चाण्डाली पुत्र थे.
जनक ब्राह्मणत्व को प्राप्त हुये.
महर्षि विश्वामित्र क्षत्रिय से ब्राह्मणत्व को प्राप्त.
श्रृंगी, कौशिक, गौतम, वशिष्ठ, अगस्त्य, माण्डव्य, मातंग, भारद्वाज आदि अब्राह्मण होते हुये भी कर्म के आधार पर ब्राह्मणत्व को प्राप्त हुये.
महाविद्वान रैक्व स्वयं शूद्र थे.
पैरभी और भालानन्द क्षत्रिय से शूद्रत्व को प्राप्त हुये.
तैत्रिरीय संहिता के अनुसार क्षत्रिय राजा रथानिधि ने अपनी कन्या का विवाह सकाश्व ब्राह्मण से किया था.
बाजसनेई संहिता के अनुसार वृहस्पति ने अपनी पुत्री रोमसा का विवाह क्षत्रिय राजा सवनेय भवगण्य से किया था.
क्षत्रिय राजा ययाति ने शुक्राचार्य की कन्या देवयानी से विवाह किया था.
महर्षि अंगिरा की पुत्री शरवनी का विवाह राजा असंग से हुआ था.
कसीवान (जो एक दासीपुत्र थे) ने वृषया से विवाह किया था.
अर्जुन का विवाह उलूमी नामक नाग जाति की कन्या से हुआ तथा भीम का विवाह हिडिम्बा नामक कन्या से हुआ था.
सुमित्रा (महाराज दशरथ की पत्नी), ब्राह्मण पिता और कर्णी (अनार्य जाति) माता की पुत्री थीं.
ऐलुष ऋग्वेद के दसवें मंडल के रचयिता एक शूद्र थे.
हमारा दुर्भाग्य यह रहा है कि हर कोई अपने स्वार्थों की पूर्ति हेतु समाज को अधिक से अधिक बांटकर अधिक से अधिक वोट पाकर सत्ता सुख हासिल करना चाहता है. किसी की भी इच्छा नहीं है भारत को एक सही राह पर लाने की. समाज को जितना तोड़ पायेंगे सत्ता प्राप्त करने के मौके उतने ही अधिक हो जायेंगे, इस सिद्धान्त पर काम करते हुये समाज में बिखराव लाया जा रहा है. ऊपर से तथाकथित बुद्धिजीवी अपने मतलब की चीजें खोजकर अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं, उन्हें भी समाज के व्यापक और दीर्घकालीन हितों से कोई लेना देना नहीं है.
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