नेताओं की डगर पे चमचों दिखाओ चल के

राहुल भैया खूब पैरोडी करते हैं, मैंने भी "इन्साफ की डगर पे बच्चों दिखाओ चल के" की पैरोडी कहीं पढ़ी थी, जिसकी दूसरी पंक्ति याद रह गयी "यह देश है तुम्हारा खा जाओ इसको तल के". कुछ मूड बना और इतने सुन्दर गीत की जोड़-तोड़ मैंने कुछ यूं कर दी, सिर्फ इसलिये कि मुझे मूल पैरोडी याद नहीं आ रही थी.

नेताओं की डगर पे चमचों दिखाओ चल के
यह देश है तुम्हारा खा जाओ इसको तल के

दुनिया की बात सहना और कुछ न मुंह से कहना
रूई कान में तुम देके आगे को बढ़ते रहना
रख दोगे एक दिन तुम मुंह सब के बंद कर के
नेताओं की डगर पे .............

अपने हो या पराये कोई न बचने पाये
डाइजेशन देखो तुम्हारा हर्गिज न गड़बड़ाये
मौका बड़ा कठिन है, खाना संभल संभल के
नेताओं की डगर पे .............

भाई हो या भतीजा तुम सबका ध्यान रखना
फुल सात पीढियों का तुम इन्तजाम रखना
स्विस बैंक की तिजोरी तुम खूब रखना भर के

नेताओं की डगर पे चमचों दिखाओ चल के
यह देश है तुम्हारा खा जाओ इसको तल के

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