भारत के लोगों की बुद्धिमानी की एक मिसाल

बरेली की एक और दिलचस्प घटना का जिक्र करना चाहूंगा.मुझे एक पाश कालोनी कहे जाने वाले मुहल्ले में रुकने का मौका मिला. मैं जहां रुका था वहीं पर चार-छ: मकानों के आगे उ०प्र०आवास विकास परिषद का एक मकान था जिसमें कुछ दुकानें थीं. मकान एक मुख्य सड़क पर था, जिसके कारण तीनों दुकानें काफी चला करती थीं. एक दिन उन दुकानों के आगे लगे हुये शटर की जगह दीवार चुनी हुई दिखाई दी, दूसरी दुकान के आगे चार-पांच ईंटें रखकर चुन दी गयी थीं जिससे ऐसा लग रहा था कि मानो किसी कार के खड़े करने के लिये गैरेज बनाया गया हो. दूसरे दिन वह ईंटें हटाई जा चुकी थीं, दीवार मानो जादू के जोर से गायब हो चुकी थीं. मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि आखिर मकान मालिक ने ऐसा क्यों किया कि दुकानों को बन्द करने के लिये एक दिन ईंटों की दीवार चुनवाई और एक दिन बाद वह दीवार तुड़वा दी गयी. ऐसा भी नहीं था कि मकान मालिक का दिमागी तवाजन गड़बड़ा गया हो, वह बिल्कुल दुरुस्त था. फिर जब एक-दो लोगों से पूछा तो यह कहानी निकल कर सामने आई कि चूंकि यह मकान आवासीय इलाके में था और लीजहोल्ड पर था, इसे फ्रीहोल्ड कराने के बाद इसका पंजीकरण होना था. चूंकि उत्तर प्रदेश में अब मकानों की खरीद-फरोख्त के समय मकान का फोटोग्राफ भी लगता है, और अगर फोटोग्राफ में दुकाने आतीं तो एक तो आवासीय भवन के व्यावसायिक उपयोग का मामला बनता और दूसरे पंजीकरण फीस भी बढ़ जाती, लिहाजा मकान मालिक ने समझदारी दिखाई. इस समझदारी में उ०प्र०आवास विकास परिषद के लोगों ने भी भूमिका निभाई और हल्का लेखपाल ने भी, जिसकी रिपोर्ट भी पंजीकरण में मुख्य भूमिका निभाती है. जय भारत, जय भारत के बुद्धिमान लोग.
सूरज जब निकलता है तो कितना सुंदर लगता है आसमान, देखिये।
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