क्या श्रीराम सेना ने जो किया उसकी निंदा उचित है?

मीडिया में बहुत होहल्ला इस बात पर हो रहा है कि कुछ लोग जो भगवा ब्रिगेड के सदस्य हैं, जिन्होंने लड़कियों केसाथ मारपीट की, वह बिल्कुल नाजायज है और किसी को हक़ नहीं है कि इस तरह से मार-पीट की जाएमैं भी सहमत हूँ कि यह बिल्कुल नाजायज है, लेकिन इस पर मुझे मीडिया का रवैया अखरता हैयह मीडिया तब कहाँ थी जब जम्मू-कश्मीर में कुछ लड़कियों के चेहरे पर इसलिए तेजाब डाल दिया जाता है कि वे बुरका नहीं पहनतींइस मीडिया को उस समय कुछ दिखाई क्यों नहीं देता जब तसलीमा के ऊपर दो मुस्लिम विधायक हमला कर देतेहैं, तब मीडिया को हरा रंग और हरी ब्रिगेड नजर क्यों नहीं आतीकैसा दोहरा चरित्र है यह, अगर चार-: हिन्दू नासमझी में इस तरह की घटना अंजाम दे देते हैं तो भगवा गुंडे, भगवा कहर, भगवा ब्रिगेड और मुस्लिम विधायक संगठित ढंग से जो कुछ करें वह नजर-अंदाज कर दिया जाता हैइन घटनाओं को लेकर तो मीडिया घंटों बहस-मुबाहिसे करती रहती है, लेकिन दूसरे तबके वाले जो कुछ भी कहें-करें, उसके लिए इनके पास समय नहीं है, उसके लिए कोई लाइव बहस का कोई स्कोप नहींप्रश्न यह है कि ऐसा करने के लिए क्या इन्हें विशेष तौर पर कहा जाता है, या हिन्दुओं को मानसिक प्रताड़ना पहुँचने में इन्हें मजा आता है या यह फिर कोई षड़यंत्र है, क्या है यह सबजहाँ तक मार-पीट की बात है, यह निंदनीय है और इसके जिम्मेदार लोगों को इसके लिए सजा भी मिलनी चाहिए लेकिन इसकी आड़ में हिन्दुओं को प्रताडित करना कहाँ तक सही है

कल की पोस्ट के सिलसिले में एक बात और वह यह कि यह मामला पकड़ में आ गया तो इतना तूल पकड़ गया लेकिन सत्य यही है कि डुमरियागंज में नकली नोट जहां पकड़े गये थे वहां जांच अधिकारी की बैंक पासबुक में आठ लाख रुपये पाये गये. कितने माल की बरामदगी होती है और कितना दिखाया जाता है, हर किसी को पता है. रेलवे में लूट की जितनी घटनायें होती हैं, उनमें न जाने कितनी बार रेलवे की पुलिस के लोग लिप्त पाये गये. कौन सी ऐसी जगह है, जहां चौराहों पर वसूली नहीं होती और कौन सा ऐसा अधिकारी है जिसे यह पता नहीं होता. कौन सा ऐसा मन्त्री, विधायक, सांसद है जो इन सब से अवगत नहीं है, लेकिन जो पकड़ गया वो चोर, जो नहीं पकड़ा गया वो साहूकार. एक्सेप्शन्स की जो बात कार्तिकेय ने कही मैं उससे सहमत हूं लेकिन अच्छे और ईमानदार काम करने वाले एक्सेप्शनल हैं, कामन तो अपने पद का दुरुपयोग करने वाले हैं.

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