मकान क्या वाकई में सस्ते हो गये हैं.
जयप्रकाश से कल मेरी फिर मुलाकात हुई, चूंकि वह एक पढा-लिखा व्यक्ति है लिहाजा जब भी मिलता है देश-विदेश के मुद्दों पर बात होती रहती है. कल का मुद्दा मकान और होमलोन के सस्ते होने का था. मुझसे बोला भाईसाहब, टीवी पर खूब आ रहा है कि होमलोन सस्ते हो गये, अब घर खरीदना आसान हो गया है. मैंने कहा बिलकुल, कुछ बैंकों ने पांच लाख तक के कर्ज के लिये प्रोसेसिंग फीस माफ कर दी है. पांच से बीस लाख तक के कर्ज पर ब्याज के दरों में काफी कटौती की गयी है. उसका चेहरा बात करते करते तमतमाया गया, मुझसे बोला कि आप भी सरकार में शामिल हो गये या फिर कोई नाजायज काम करने लगे हैं या फिर मुझसे मजाक कर रहे हैं. आप को लगता है कि क्या अब मैं अपना मकान ले सकता हूं आप जानते हैं कि यहां सबसे सस्ता मकान कितने का है, कम से कम आठ लाख का. मेरी कमाई कितनी है महीने की? जब मैं दिन-भर मेहनत से काम करता हूं तो लगभग एक महीने में सात-आठ हजार रुपये अधिकतम कमा पाता हूं. इस आठ हजार में मुझे अपने तीनों बच्चों की फीस भी भरनी है, उन्हें कापी-किताबें भी दिलानी हैं, उन्हें स्कूल भेजने का भी इन्तजाम करना है. अपना, अपने बीबी-बच्चों, अपने मां-बाप का पेट भी पालना है, हारी-बीमारी का भी इन्तजाम करना है. आप जानते हैं जब पेट्रोल के दाम बढे, हर चीज मंहगी हो गयी, जाने से खाने तक के दाम बढ गये, लेकिन अब वह बढत वापस हो गयी है कितनी चीजों के दाम कम हुये, किराये-भाडे में कितनी कमी आयी? फिर वह बोला छटा केन्द्रीय वेतन आयोग क्या आया, स्कूलों ने फीस बढाने के नोटिस जारी कर दिये, डाक्टरों ने अपनी फीस डेढ गुनी कर दी. मैं क्या करूं अगर अपनी मजदूरी डेढ गुनी करता हूं तो मेरे ग्राहक दूसरी दुकान पर जाना शुरू कर देंगे, अगर अपने बनाये हुये जूते-चप्पलों के दाम डेढ गुने करता हूं तो आप भी कोई और दुकान खोजना शुरू कर दोगे. फिर मेरी छोडो आप बताओ आप की आमदनी कितनी है, ज्यादा से ज्यादा अठारह-बीस हजार होगी, डेढ सौ गज का मकान चौदह लाख का है, अगर बारह लाख लोन लोगे तो लगभग ग्यारह हजार रुपये की किस्त बनेगी, बाकी कितने बचेंगे आठ-नौ हजार, इसमें आप क्या क्या कर लोगे, भगवान न करे एक बार बीमार पड गये तो पन्द्रह दिन में बीस-पच्चीस हजार के लपेटे में आ जाओगे. बच्चों को पढाओगे-लिखाओगे या नहीं. कल के लिये कुछ जोडोगे या नहीं, बच्चों की उच्च शिक्षा के लिये, उनकी शादी-विवाह के लिये बचत करोगे या नहीं. मेरे लिये आप कह सकते हो कि क्या जरूरत है बच्चों को निजी स्कूल में पढाने की, क्या जरूरत है निजी अस्पतालों में इलाज कराने की जब सरकारी स्कूल और सरकारी अस्पताल में मुफ्त पढाई और इलाज हो सकता है. लेकिन आप जानते हो सरकारी स्कूलों में कैसी पढाई होती है और सरकारी अस्पतालों में कैसा इलाज होता है, क्या आप पसंद करोगे अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढाना, क्या आप पसंद करोगे सरकारी अस्पताल में इलाज करवाना? क्या इन सब खर्चों के बाद कर्जे की किश्त चुका पाओगे? अब आप बताओ कि कैसे खरीद पाओगे चौदह लाख का मकान. मैं निरुत्तर हो चुका था और सोच रहा था कि मकान क्या वाकई में सस्ते हो गये हैं.
Comments
Post a Comment