न्यायिक परिषद का गठन एक उचित कदम

केन्द्रीय सरकार ने न्यायिक परिषद बनाने की घोषणा कर निश्चित रूप से एक अच्छा कदम उठाया है, इस कदम की काफी दिनों से आवश्यकता महसूस की जा रही थी. भारत के एक पूर्व न्यायाधीश पर महाभियोग लाया गया था हालाँकि वह संसद में पारित नहीं हो सका. पश्चिम बंगाल के एक अन्य न्यायाधीश पर महाभियोग के बारे में प्रस्ताव लाया जा सकता है. निचले स्तर न्यायपालिका में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगना प्रारम्भ हो चुके हैं. कई जगह से फर्जी वारंट की भी बात सामने आई है. अभी गाजियाबाद में भविष्यनिधि घोटाले में लिप्त कर्मचारी ने भी कई लोगों का नाम लिया है, इसी प्रकार पंजाब तथा चंडीगढ़ उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के यहाँ रुपये पहुँचने के मामले में एक वकील को गिरफ्तार किया गया. आर०के०आनन्द तथा आई०यू०खान पर भी गवाह को बरगलाने के आरोप लगे भी हैं तथा साबित भी हुए हैं. भारत जैसे देश में यदि न्यायपालिका की साख यदि भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते गिरती है तो यह अत्यन्त घातक स्थिति होगी, अत: इस स्थिति में न्यायिक परिषद का गठन एक उचित कदम है। हमारे देश में न्याय पाना महंगा तथा एक जटिल एवं दुर्गम प्रक्रिया में बदल चुका है, जिसमें कभी कभी तो इतना वक्त लग जाता है कि किसी किसी मामले में मुद्दई, अभियुक्त या फिर गवाह की मौत हो जाती है और ऐसे मामलों में न्याय मिलना न मिलना बराबर हो जाता है. चूँकि व्यक्ति हर तरफ़ से निराश होकर कचहरी का रुख अपनाता है और उसमें भी अगर निचले स्तर पर ही मुक़दमे का फैसला होने में पन्द्रह-बीस साल लग जाएँ तो फिर न्याय कहाँ रह गया. इसलिए आवश्यक यह है कि हर स्तर पर मुकदमों में तारीखों की संख्या निश्चित की जाए, हर मुक़दमे के लिए हर स्तर पर अधिकतम दो वर्ष की समय सीमा निर्धारित की जाए, हर न्यायाधीश को एक निश्चित टारगेट हर माह दिया जाए, तथा न्यायिक प्रक्रिया को सरल, सुविधाजनक तथा अधिक पारदर्शी बनाया जाए एवं न्यायिक अधिकारियों को न्याय देने वाले अधिकारियों के रूप में रखा जाए, न्याय - आधीशों के स्थान पर. उपर्युक्त को लागू करने पर एक बार तो न्यायालयों में मुकदमों की संख्या अनापेक्षित रूप से बढ़ जायेगी, लेकिन इसके साथ ही लोगों का विश्वास न्यायिक व्यवस्था में अधिक मजबूत होगा और वे लोग जो अपने साथ होने वाले अन्याय को इसलिए चुपचाप सहन कर लेते हैं क्योंकि कचहरियों के चक्कर काटने में अपनी उमर गवाना नहीं चाहते, ऐसे वंचित लोग न्याय पा सकेंगे. दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर सामने वाला व्यक्ति अधिक प्रभाव रखता है तो लंबे समय तक खिंचने वाले मुकदमों में मुद्दई और गवाहों को अभियुक्त से खतरा रहता है, कई मामलों में मुद्दई या गवाहों को मार दिया गया या डरा धमका कर चुप करा दिया गया, लिहाजा समय-सीमा का होना अति-आवश्यक हो जाता है. आशा करता हूँ कि शीघ्र ही ऐसा बिल भी आएगा.

Comments

  1. आपने सही कहा.
    आप को विजयादशमी की शुभकामनाएं.

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  2. हमेशा की तरह सुंदर आलेख धन्यबाद मेरे ब्लॉग पर पधार कर उत्साह वर्धन के लिए धन्यबाद. गुणी जन का आशीर्वाद मेरा सौभाग्य है पुन: नई रचना ब्लॉग पर हाज़िर आपके मार्ग दर्शन के लिए कृपया पधारे और मार्गदर्शन दें

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  3. " well said, but aaj tk koee bhee sarkaree kaam time pr hotta dekha hai kya, or aise subject pr to sirf 'tareekh....tareekh....or tareekh...'

    regards

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  4. आपके मेरे ब्लॉग पर पधारने का धन्यबाद कृपया पुन: पधारे मेरी नई रचना मुंबई उनके बाप की पढने हेतु सादर आमंत्रण

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  5. आपका आगमन मेरा सौभाग्य है हार्दिक धन्यबाद आपका आगमन नियमित बनाए रखें मेरी नई रचना पढ़े
    हिन्दी काव्य मंच: दिल की बीमारी

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