भारत की आत्मा ने हरियाणा के थाने में आत्महत्या कर ली.
पिछले दिनों हरियाणा के पुलिस मुख्यालय में सरिता नाम की महिला ने सल्फास खाकर इसलिए आत्म हत्या कर ली क्योंकि उसके साथ पुलिस वालों ने बलात्कार किया था और शिकायत करने पर पुलिस अफसरों ने अपना पूरा कर्तव्य निभाते हुए उसकी शिकायत तक दर्ज नहीं होने दी, जिनसे उसने शिकायत की उसमें सर्किल अफसर से आई०जी० तक शामिल थे. इससे पहले मुंबई में जीआरपी के एक अधिकारी ने एक लड़के को निर्वस्त्र कर उसके गुप्तांगों में डंडे की सहायता से मिर्च लगायी. एक स्टिंग आपरेशन में यह दिखाया जा चुका है कि अगर आप के पास पैसे हों तो किसी की झूठी मुठभेड़ भी करायी जा सकती है, किसी बेक़सूर को किसी भी इल्जाम में फंसाया जा सकता है, ख़ुद राजधानी दिल्ली गवाह है ऐसे कई मामलों की जिसमें पुलिस ने लोगों को कई मामलों में झूठा फंसाया. टीवी पर देखा ही होगा कि पुलिस वाले किस तरह नेत्रहीन प्रदर्शनकारियों तक पर लाठियां भांजते हैं. इलाहाबाद में एक झूठी मुठभेड़ टीवी पर दिखाई गई थी जिसमें सरेंडर के लिए चिल्लाने वाले अपराधी को सरेंडर कराने के स्थान पर भगाया गया और पीछे से गोली मार दी गई, क्या यह कृत्य हत्या के दायरे में नहीं आता. यदि पुलिस वाले इसे हत्या नहीं मानते तो खून के बदले खून करने वाले आम अपराधियों के ऐसे कृत्य हत्या के दायरे में कैसे आ सकते हैं, अगर पुलिस बदला लेती है तो ठीक है आम आदमी बदला ले ले तो हत्या. कुछ दिनों पहले एक एसपी को दिखाया गया था, जो एक डॉक्टर के विरुद्ध झूठी शिकायत को निपटाने की जगह सीओ से मिलने की हिदायत देता है यह जानकर भी कि वह सीओ ही रिश्वत मांग रहा है. पुलिस की वर्दी में लिपटे इन अपराधियों के विरुद्ध कोई सार्थक कार्यवाई नहीं होती, दिक्कत यह है कि हमाम में सभी नंगे हैं. इन लोगों के विरुद्ध कार्यवाई करे तो कौन करे. बड़े अफसर, नेता सभी आपस में रिश्तेदार हैं, तू मेरी पीठ खुजा मैं तेरी खुजाता हूँ. अगर यही हाल रहा तो police की definition हो जायेगी - "PRINICIPLE ORGANISATION OF LEGISLATIVELY INCORPORATED CRIMINAL ELEMENTS" . और यही रवायत कायम रही तो धीरे धीरे पूरा देश ही नक्सलवाद की चपेट में आ जायेगा .
" pdh kr royan royan kaanp gya hai, itnee haivaneeyt ko kya kha jaye..... isse jyada sharmnaak kya ho skttaa hai"
ReplyDeleteRegards
i think is is fact or police ki jo defination aapne di hai vo aaj se nahi hamesha se aisi rahi hai. police ki haivaniyat aap sirf in kuch muddo se hi pta kar pate hai jo ujagar houe hai. lekin aisi bahut si kahaniyan hai jo bahar aati hi nai jinhe sirf ve hi jante hai jin par gujarti hai. fir bhii aapka bahut bahut shukariya is satya ko saamne lane ke liye.
ReplyDeleteRakesh Kaushik
एकदम जघन्य अपराध है और इसकी सज़ा शीघ्रातिशीध्र मिलनी चाहिए.
ReplyDeleteआपने व्यभिचार और भ्रष्टाचार के रिश्तों की सही पड़ताल की है।
ReplyDelete