धर्मनिरपेक्षता के एक और अवतार - मौलाना बुखारी

आज के अखबार में मौलाना बुखारी का बयान पढ़ा कि अबुल बशर को गुजरात पुलिस फंसा रही है, एक और लोकल मुस्लिम नेता का बयान भी था कि पुलिस मुसलमानों को आतंकवादी बना रही है। बड़ा आश्चर्य हुआ और ज्ञान में वृद्धि भी हुई। वैसे भी अब यह महसूस होने लगा है कि हम किसी उदारवादी इस्लामिक देश में रह रहे हैं। मैं कभी भी कट्टरपंथी नहीं रहा, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी धर्म विशेष में जन्म लेने के कारण मेरी आस्थाओं पर हमला किया जाए। पिछले दिनों श्रीमान लालू यादव, मुलायम सिंह यादव तथा रामविलास पासवान जी ने एक बयान दिया कि सिमी पर बैन लगाया जाए तो आर०एस०एस० / विहिप / बजरंग दल पर भी बैन लगाया जाना चाहिए, कितने बम आर०एस०एस० / विहिप / बजरंग दल ने लगाये हैं? यह इन महानुभावों ने नहीं बताया। दाऊद की बहन ने भी कहा कि उसको मुंबई पुलिस फंसा रही है । हिन्दुओं को काटकर फ़ेंक दीजिये और वे शिकायत भी न करें , यही इन लोगों की चाहत है। बुखारी साहब तब कहाँ थे जब अहमदाबाद, बंगलोर, जयपुर, हैदराबाद में बम-विस्फोट हुए, इन्होनें तब कोई बयान जारी क्यों नहीं किया, ये उन मृतकों के परिवार वालों से क्यों नहीं मिले? उमर अब्दुल्ला संसद में चीखकर कहते हैं कि एक इंच जमीन भी नहीं देंगे, बाकी देश में हज-हाउस बनाये जा रहे हैं किसी ने भी आपत्ति नहीं की। कश्मीर से हिन्दू साफ कर दिए गए, उनकी संपत्ति हड़प कर ली गई, कोई धर्म-निरपेक्षी नहीं बोला। तीस्ता सीतलवाड़ को भी गुजरात की ही याद आती है, गोधरा में जो लोग मारे गए उनके बारे में कोई चर्चा नहीं। पहले अंग्रेजों ने यह कहकर फूट डाली कि आर्यन बाहर से आए थे, द्रविडों के ऊपर उन्होंने हमला किया, अब इसी थेओरी को हमारी नई पीढी को सिखाया जा रहा है। ऐसा लगता है जैसे कि कश्मीर में हमेशा से मुस्लिमों का शासन रहा, मुस्लिमों के अतिरिक्त अन्य कोई वहां का मूल निवासी है ही नहीं। बुखारी जी के बयान से लगता है कि हिन्दू सबसे बड़े आतंकवादी हैं जो अपने आप आबादी कम करने के उद्देश्य से बम लगा रहे हैं। यहाँ तो हिन्दुओं को इस तरह से दिखाया जा रहा है जैसे कि वे बाहर से आ गए हैं और यहाँ के मूल निवासियों पर अत्याचार कर रहे हैं। इस तथ्य को अनदेखा किया जा रहा है कि बाहर से बहुत कम संख्या में मुस्लिम यहाँ पर आए थे और आज जो मुस्लिमों की संख्या यहाँ पर है उनमें से अधिकाँश के पूर्वजों ने धर्म-परिवर्तन कर इस्लाम स्वीकार किया था। कश्मीर के ये हालात अपने आप बताते हैं कि इस देश में हिन्दुओं के साथ क्या होगा जब जन-सांखिकीय संतुलन हिन्दुओं से हट जायेगा। लेकिन हिन्दुओं की सोच शुतुर्मुर्गीय है। वे अपने इतिहास से कोई सबक नहीं लेते । इतिहास साक्षी है कि सोमनाथ में क्या हुआ था, गुजरात में तत्कालीन राजा यही सोचते रहे कि हिमालय और रेगिस्तान को पार कर लुटेरे सोमनाथ नहीं पंहुच सकते, लेकिन वे पंहुचे भी और सोमनाथ को लूटा भी। यहाँ के राजघराने भी एक - दूसरे की मदद करने की बजाये एक - दूसरे से लड़ते रहे। बिल्कुल वही स्थिति आज भी है। गोद में बैठा कर दाढी नुचवाने का इससे अच्छा उदहारण कहीं नहीं मिलेगा।

Comments

  1. बहुत सही, मज़ा आ गया. तबियत खुश कर दी आप के जोशीले लेख ने. आशा है कि आप अपना लेखन हमेशा जारी रखेंगे.

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  2. जब भी एक होने की कोशिश करें आरक्षण, जाति, प्रदेश जैसी कोई हड्डी उछाल दो, अगले ही सेकेण्ड ख़ुद ही एक दूसरे को मरने मारने पिल पड़ेंगे.

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