नैतिकता की दुहाई देते लोग-1

हमारे देश के नेता बहुत महान हैं, इतने कि एक बार ही में इतना त्याग कर जाते हैं, नैतिकता की इतनी ऊंचाई छू जाते हैं, इतने मानदंड स्थापित कर जाते हैं कि आने वाली कई पुश्तों का काम उसी त्याग और नैतिकता से चल जाता है। अभी नैतिकता के कुछ नए पैमाने स्थापित हुए जिनमें नोट के बदले वोट, गुरु जी को गद्दी, खान साहब और आनंद साहब द्वारा मिलकर न्याय को उसके सही मुकाम तक पहुँचाने के लिए किए गए कार्य शामिल हैं। बार कौंसिल को बड़ी तकलीफ हुई कि बेचारे दोनों वकीलों के ऊपर इतना जुल्म, चार महीने तक प्रैक्टिस पर पाबंदी। दो हजार रुपये जुर्माना, बहुत नाइंसाफी है। कितने वकीलों के विरुद्ध शिकायतों पर बार कौंसिल ने क्या कार्यवाई की है, भारत की समस्त बार कौंसिल इसके लिए सार्वजनिक करेंगी क्या? क्या वकील बन्धु यह भी बताएँगे कि अभियुक्त द्वारा गवाह को डराने-धमकाने पर क्या सजा हो सकती है? जब जेठमलानी एक बिल ला रहे थे कि मुकदमों को एक निश्चित समय-सीमा में निपटाना पड़ेगा उस समय किसने और क्यों विरोध किया, इसे भी बताना चाहिए। यह भी बताना चाहिए कि एक मुकदमे का फैसला आने तक कुल कितनी तारीखें पड़ती हैं और कितनी वकीलों द्वारा ली जाती हैं। इसी तरह डॉक्टर भी बड़े परेशान रहते हैं। पता नहीं कौन सी कंपनी क्या गिफ्ट देगी, किस पर कितना कमीशन मिलेगा, फलां को गाड़ी मिली है, फलां को विदेश में छुट्टी, मेरे हिस्से में क्या आएगा। आई०एम०ए० क्या बताएगी कि आजतक कितने डॉक्टरों के विरुद्ध कितनी शिकायतें आयीं और उनमें कितने समय में क्या कार्यवाई की गई। कितने डॉक्टर फीस की रसीद देते हैं, कितने दवाईओं के जेनेरिक नाम लिखते हैं, कितने ब्रांड नाम? किस आधार पर डॉक्टर की फीस निर्धारित होती है, किस आधार पर बेड चार्जेस लिए जाते हैं, अपने ही हॉस्पिटल में भरती मरीजों से विजिटिंग फीस क्यों ली जाती है, इंजेक्शन लगाने के चार्जेस, नर्सिंग चार्जेस और तमाम खर्चे किस आधार पर लिए जाते हैं? ये लोग भी नैतिकता के पुरजोर रक्षक माने जाते हैं जैसे कि हमारे नेता और वकील तथा अन्य बुद्धिजीवी लोग। हमारे देश की सबसे बड़ी और नैतिकता की रक्षक पार्टी की नैतिकता शिब्बू सोरेन के मामले में खुलकर सामने आ गई है।

Comments

  1. आपको जन्माष्टमी पर्व की
    बधाई एवं शुभकामनाएं
    भाई हमारे देश मे.. एक कहावत बिलकुल सही बेठती हे,... अंधी पीस रही हे आटा, ओर कुते चाट रहे हे

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